आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने किसे कहा ‘रामपुर का रावण’, भेष बदलकर कौन रच रहा साजिश?
रामपुर में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan) से रामपुर जेल में मुलाकात की। बताया गया कि पहले से अनुमति लिए जाने के बाद दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आजम खान के साथ पारिवारिक और भावनात्मक विषयों के अलावा मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। इस मुलाकात को लेकर असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की रामपुर में हुई रैली और उसके बाद सामने आए राजनीतिक बयानों की भी चर्चा हो रही है। मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने ओवैसी का नाम लिए बिना रावण का उदाहरण देते हुए टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश का बयान:
रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उनसे सवाल किया गया कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की ओर से दावा किया जा रहा है कि असदुद्दीन ओवैसी की रामपुर रैली के बाद अखिलेश यादव दबाव में आकर आजम खान से मिलने पहुंचे हैं। सवाल दोहराए जाने पर अखिलेश यादव ने ओवैसी का नाम लिए बिना रावण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि रावण ने भी एक दिन के लिए अपना भेष बदला था और उसी रूप में सीता को ले गया था। अखिलेश यादव ने इस उदाहरण के जरिए अपनी बात रखी और रामपुर की भावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रामपुर की भावनाओं को कुचला जा रहा है और कहा कि समाजवादी पार्टी तथा आजम खान सामाजिक न्याय की स्थापना की दिशा में काम कर रहे हैं। आजम खान पर मुकदमों और जौहर विश्वविद्यालय को लेकर उठाए सवाल:
अखिलेश यादव ने आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। यह आरोप अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान लगाया। आजम खान से जुड़े जौहर विश्वविद्यालय (Jauhar University) के मामले का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने विश्वविद्यालय को ढहाए जाने संबंधी आदेश पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) की सरकारों को शिक्षा से कोई मतलब नहीं है। इस तरह अखिलेश यादव ने आजम खान के मामले को राजनीतिक और शैक्षिक मुद्दों से जोड़ते हुए प्रदेश सरकार की आलोचना की। ओवैसी ने रामपुर रैली में आजम खान का मुद्दा उठाया:
इससे पहले 18 अक्टूबर को रामपुर में आयोजित जनसभा के दौरान एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आजम खान के मुद्दे पर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया था। ओवैसी ने आजम खान की परेशानियां दूर होने की कामना करते हुए उनके लिए दुआ करने की बात कही थी। उन्होंने अन्य लोगों के जेल में होने का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया था कि अखिलेश यादव ने उनकी रिहाई के लिए उसी तरह आवाज क्यों नहीं उठाई। ओवैसी ने अपने भाषण में मौलाना तौकीर रजा खान, शिफा रहमान, सफूरा जरगर, इशरत और शरजील इमाम का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने इन लोगों के मामलों में वैसी सक्रियता नहीं दिखाई, जैसी अपने राजनीतिक समर्थकों के लिए दिखाई जा सकती थी। ओवैसी के इस बयान को आजम खान के प्रति सहानुभूति और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाने के संदर्भ में देखा जा रहा है। अखिलेश-आजम की मुलाकात को लेकर राजनीतिक बयानबाजी:
ओवैसी की रामपुर रैली के बाद अखिलेश यादव के आजम खान से मुलाकात के कार्यक्रम की चर्चा सामने आई। इसके बाद एआईएमआईएम के नेताओं की ओर से दावा किया जाने लगा कि अखिलेश यादव ओवैसी के राजनीतिक प्रभाव के कारण आजम खान से मिलने पहुंचे हैं। हालांकि, यह एआईएमआईएम नेताओं का राजनीतिक दावा है। दी गई जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले आजम खान की पत्नी और पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. तंजीन फातिमा (Dr. Tazeen Fatma) भी अखिलेश यादव से उनके आवास पर मिली थीं। इसके बाद बरेली और मुरादाबाद मंडल की विधानसभा सीटों को लेकर मांग संबंधी खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि इन खबरों पर तंजीन फातिमा ने नाराजगी भी जताई थी। रामपुर की मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी चर्चा:
आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव के बयान और ओवैसी की पिछली जनसभा में लगाए गए आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर अखिलेश यादव ने आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर ओवैसी ने आजम खान के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व की भूमिका पर सवाल खड़े किए। दोनों नेताओं के बयानों के बीच आजम खान से मुलाकात राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। हालांकि, मुलाकात के पीछे किसी खास राजनीतिक दबाव की बात को उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थापित तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता।
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