Ghazipur में आया पहला अर्जुन अवार्ड…
गाजीपुर के खेल इतिहास में मंगलवार का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ। भारतीय हॉकी के मिडफील्डर और पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता राजकुमार पाल को प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किए जाने की घोषणा के बाद गाजीपुर और पूर्वांचल में खुशी का माहौल है। राजकुमार पाल जनपद से अर्जुन अवार्ड पाने वाले पहले और एकमात्र खिलाड़ी बन गए हैं। यह उपलब्धि उनके व्यक्तिगत संघर्ष के साथ उनकी मां मनराजी पाल, मेघबरन सिंह स्टेडियम करमपुर और उन लोगों के समर्पण को भी सामने लाती है, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने में सहयोग किया।
आठ वर्ष की उम्र में उठ गया पिता का साया: राजकुमार पाल का बचपन आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। जब वह महज आठ वर्ष के थे, तभी उनके पिता कल्पनाथ पाल का निधन हो गया। परिवार के सामने जीवन-यापन की चुनौती खड़ी हो गई, लेकिन मां मनराजी पाल ने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। उन्होंने कठिन दौर में अपने तीनों बेटों को खेल और अनुशासन की राह पर आगे बढ़ाया।
उनके त्याग और संघर्ष का परिणाम यह रहा कि बड़ा बेटा जोखन पाल भारतीय सेना (Indian Army) में देश सेवा कर रहा है, मंझला बेटा राजू पाल भारतीय रेलवे (Indian Railways) में कार्यरत है और सबसे छोटे बेटे राजकुमार पाल ने ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक हासिल करने के बाद अर्जुन अवार्ड तक का सफर तय किया।

करमपुर स्टेडियम ने दिखाई प्रतिभा को राह: राजकुमार पाल की खेल यात्रा में सैदपुर ब्लॉक स्थित मेघबरन सिंह स्टेडियम (Meghbaran Singh Stadium), करमपुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि खेल के जूते और हॉकी किट तक खरीदना मुश्किल था। इसी दौरान स्टेडियम के संस्थापक स्वर्गीय ठाकुर तेज बहादुर सिंह (Teju Bhaiya) ने परिवार की परिस्थितियों और बच्चों की प्रतिभा को पहचाना।
दी गई जानकारी के अनुसार, तेजू भैया ने तीनों भाइयों के लिए भोजन और पौष्टिक आहार की व्यवस्था के साथ अभ्यास के लिए आवश्यक खेल उपकरण, जूते और अन्य सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराईं। बांस की डंडियों से हॉकी का अभ्यास शुरू करने वाली प्रतिभा ने आगे चलकर आधुनिक एस्ट्रोटर्फ तक का सफर तय किया। राजकुमार पाल की अर्जुन अवार्ड के लिए घोषणा को स्टेडियम से जुड़े लोगों ने तेजू भैया के सपने की उपलब्धि के रूप में देखा।
मुख्यमंत्री के सहयोग से मिला संबल: इस उपलब्धि पर मेघबरन सिंह स्टेडियम के निदेशक एवं पूर्व सांसद राधे मोहन सिंह (Radhe Mohan Singh) ने कहा कि तेजू भैया के निधन के बाद स्टेडियम परिवार के सामने कठिन परिस्थितियां आईं। उनके अनुसार, उस दौर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के सहयोग और प्रोत्साहन से स्टेडियम परिवार को संबल मिला। राधे मोहन सिंह के मुताबिक, पेरिस ओलंपिक में पदक जीतकर राजकुमार के स्वदेश लौटने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करमपुर पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया था। उन्होंने बताया कि राजकुमार को उत्तर प्रदेश पुलिस में उप पुलिस अधीक्षक (DySP) का पद भी प्रदान किया गया। स्टेडियम परिवार ने अर्जुन अवार्ड की उपलब्धि को करमपुर की प्रतिभा और खेल के प्रति मिले प्रोत्साहन की बड़ी सफलता बताया।
घर पहुंचकर मनाई गई खुशी: अर्जुन अवार्ड की घोषणा के बाद मेघबरन सिंह स्टेडियम परिवार की ओर से राजकुमार पाल के पैतृक आवास पर खुशी साझा की गई। स्टेडियम के संचालक एवं महासचिव अनिकेत सिंह (Aniket Singh) उनके घर पहुंचे और राजकुमार की मां मनराजी पाल तथा भाभी नीलम पाल को मिठाई खिलाकर बधाई दी। इस दौरान रमेश यादव, मनीष रावत और विशाल पाल भी मौजूद रहे। परिजनों ने इस उपलब्धि को गांव, स्टेडियम और वहां से जुड़े गुरुजनों तथा सदस्यों के आशीर्वाद और सहयोग का परिणाम बताया।
ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए बना प्रेरणा स्रोत: मेघबरन सिंह स्टेडियम के संचालक अनिकेत सिंह सहित पदाधिकारियों और खेल प्रेमियों ने राजकुमार पाल को अर्जुन अवार्ड के लिए बधाई दी। उनका कहना है कि गाजीपुर से पहला अर्जुन अवार्ड पाने वाले खिलाड़ी के रूप में राजकुमार पाल की उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। राजकुमार पाल की यात्रा यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बीच भी प्रतिभा को यदि अनुशासन, समर्पण और उचित मार्गदर्शन मिले तो वह बड़े मंच तक पहुंच सकती है। करमपुर की माटी से निकले राजकुमार पाल का अर्जुन अवार्ड तक पहुंचना गाजीपुर के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
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