कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने जज शबीना खान को कब फोन कर क्या-क्या कहा?
उत्तर प्रदेश की महिला आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल एक बार फिर चर्चा में हैं। वह देवीपाटन मंडल की कमिश्नर हैं। गोंडा जिले में सीनियर डिवीजन की सिविल जज शबीना खान ने उनके खिलाफ जिला जज को पत्र लिखा है। पत्र में सिविल जज ने एक लंबित मुकदमे को लेकर उन पर अनुचित दबाव बनाए जाने और हाईकोर्ट में शिकायत करने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाया है। जज ने यह भी कहा कि बातचीत के दौरान उनके संस्कारों पर सवाल उठाए गए, जिससे वह आहत हुईं।
30 साल पुराने मुकदमे से जुड़ा है मामला:
यह पूरा मामला ‘ज्योति विद्या मंदिर बनाम नगरपालिका’ मुकदमे से जुड़ा बताया गया है। यह मुकदमा करीब 30 वर्षों से निचली अदालत में लंबित है। मामला काफी पुराना होने के कारण अदालत में इसकी तेजी से सुनवाई चल रही थी और मुकदमा निस्तारण के करीब पहुंच चुका था।
आरोप है कि इसी मुकदमे को लेकर देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने सिविल जज शबीना खान से संपर्क किया। जज ने जिला जज को लिखे पत्र में इस बातचीत और उसके बाद हुए घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख किया है।
जज ने कमिश्नर की कॉल का बताया पूरा घटनाक्रम:
शिकायती पत्र के अनुसार, 15 जुलाई को दोपहर करीब 1:26 बजे सिविल जज शबीना खान के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया। उस समय उनका सात वर्षीय बेटा मोबाइल पर वीडियो देख रहा था। बच्चे ने फोन उठाया तो दूसरी तरफ से महिला ने पूछा कि उसकी मां कहां हैं।
बच्चे ने बताया कि उसकी मां वॉशरूम में हैं। इसके बाद फोन करने वाली महिला ने बच्चे से उसका नाम, उम्र और परिवार से जुड़ी कुछ बातें पूछीं। जब बच्चे ने महिला का नाम पूछा तो उन्होंने अपना परिचय नहीं दिया और फोन काट दिया।
करीब एक घंटे बाद दोपहर 2:32 बजे उसी मामले में दोबारा कॉल आने की बात पत्र में कही गई है। इस बार जज शबीना खान ने फोन उठाया और परिचय पूछा। जज के मुताबिक, महिला ने खुद को देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल बताया।
लंबित मुकदमे को लेकर बातचीत का आरोप:
जज के अनुसार, बातचीत के दौरान कमिश्नर ने उनसे पूछा कि वह कब तक छुट्टी पर रहेंगी। जब जज ने छुट्टी के बारे में पूछे जाने का कारण जानना चाहा तो उन्हें बताया गया कि अदालत में लंबित मुकदमे के संबंध में बातचीत करनी है।
शिकायती पत्र के अनुसार, जज ने इसके बाद फोन काट दिया। उन्होंने पत्र में कहा कि उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं हुआ कि कोई कमिश्नर सीधे फोन करके अदालत में लंबित मुकदमे पर बातचीत करेगी। जज ने यह भी उल्लेख किया कि सरकारी पक्ष रखने के लिए अदालत में सरकारी वकील नियुक्त होते हैं।
इसके बाद दोपहर करीब 3:21 बजे जज के पास उनके स्टेनो आशुतोष के नंबर से फोन आया। स्टेनो ने बताया कि कमिश्नर के स्टेनो उनकी छुट्टी के बारे में जानकारी और उनका मोबाइल नंबर मांग रहे हैं।
तीसरी बातचीत में दबाव बनाने का आरोप:
शिकायती पत्र के अनुसार, दोपहर करीब 3:32 बजे कमिश्नर और सिविल जज के बीच फिर बातचीत हुई। जज ने आरोप लगाया कि इस बातचीत के दौरान कमिश्नर ने कहा कि अच्छा हुआ कि दोनों के बीच बात हो गई, वरना वह उनकी शिकायत हाईकोर्ट में करने वाली थीं।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि बातचीत के दौरान सीनियर आईएएस अधिकारी से बात करने के तरीके को लेकर जज पर टिप्पणी की गई। जज के अनुसार, उनके व्यवहार और न्यायिक अधिकारी के रूप में उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
संस्कारों पर सवाल उठाने का भी आरोप:
सिविल जज शबीना खान ने जिला जज को भेजे पत्र में कहा कि जब उन्होंने कमिश्नर को अपनी स्थिति समझाने की कोशिश की तो उनकी बात नहीं सुनी गई। पत्र के मुताबिक, कमिश्नर ने कहा कि उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और उनके संस्कारों पर भी सवाल उठाए।
जज ने अपने पत्र में जवाब दिया कि वह अपनी छुट्टी की अवधि या समय बताने के लिए बाध्य नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी अनजान नंबर से आए फोन पर लंबित मुकदमे के संबंध में चर्चा करना उचित नहीं है।
जज ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का पक्ष रखने के लिए अदालत में सरकारी वकील पहले से मौजूद होते हैं। इसके बावजूद बातचीत के दौरान सीनियर आईएएस अधिकारी होने का हवाला दिए जाने का आरोप लगाया गया।
मुकदमा दूसरी अदालत में भेजने की मांग:
शिकायती पत्र में सिविल जज शबीना खान ने आरोप लगाया कि कमिश्नर ने अपने पद के प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए उन पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास किया। उन्होंने हाईकोर्ट में शिकायत करने की बात कहे जाने का भी उल्लेख किया।
जज ने जिला जज से अनुरोध किया कि निष्पक्ष न्याय के हित में उनके न्यायालय में लंबित मुकदमे को किसी दूसरी अदालत में स्थानांतरित किया जाए। उनके अनुरोध के बाद यह मुकदमा गोंडा सीनियर डिवीजन के सिविल जज एफटीसी नवीन की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है।
आज होनी है मामले की सुनवाई:
मुकदमा स्थानांतरित किए जाने के बाद अब इसकी सुनवाई गोंडा सीनियर डिवीजन के सिविल जज एफटीसी नवीन की अदालत में होनी है। दी गई जानकारी के अनुसार, 24 अगस्त को मामले की सुनवाई निर्धारित है।
मामले में सिविल जज की ओर से लगाए गए आरोप पत्र में दर्ज घटनाक्रम और उनके अनुरोध के आधार पर मुकदमा दूसरी अदालत में भेजा गया है। दुर्गा शक्ति नागपाल की ओर से इस संबंध में कोई अलग पक्ष या प्रतिक्रिया दी गई है, इसकी जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।
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