गाजीपुर: निष्ठा और स्वाभिमान लाभ-हानि से ऊपर होते हैं: चंदन सिंह ‘चौधरी’
गाजीपुर। करंडा क्षेत्र के कटरिया निवासी चंदन सिंह ‘चौधरी’ ने राजनीतिक जीवन में निष्ठा और स्वाभिमान को व्यक्तिगत लाभ-हानि से ऊपर रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि राजनीति में पद और व्यक्तिगत लाभ हमेशा स्थायी नहीं होते, लेकिन विचारधारा, संगठन और अपने सिद्धांतों के प्रति निष्ठा का महत्व अलग होता है। इतिहास में ऐसे कई उदाहरण सामने आते हैं, जहां नेताओं ने पद या राजनीतिक लाभ की अपेक्षा अपने विचारों और संगठन के साथ बने रहना चुना।
उमाशंकर सिंह का दिया उदाहरण:
चंदन सिंह ने स्वर्गीय उमाशंकर सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतिम और एकमात्र विधायक होने के बावजूद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) का साथ नहीं छोड़ा। उनके अनुसार उमाशंकर सिंह अपने दम पर बहुजन समाज पार्टी में मजबूती से खड़े रहे। उन्हें न राज्यसभा का अवसर मिला और न ही एमएलसी का कोई पद, इसके बावजूद उन्होंने अपने राजनीतिक सिद्धांतों और संगठन के प्रति निष्ठा बनाए रखी।
ओम प्रकाश सिंह का भी किया उल्लेख:
चंदन सिंह ने गाजीपुर के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश सिंह आज भी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) में बने हुए हैं। चंदन सिंह ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ लोगों की ओर से उनके खिलाफ असामान्य और अमर्यादित टिप्पणियां की जाती हैं। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी और संगठन के साथ बने रहे।
चंद्रशेखर के राजनीतिक फैसले का जिक्र:
उन्होंने स्वर्गीय चंद्रशेखर के राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि आपातकाल के विरोध में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। चंदन सिंह के अनुसार उस समय चंद्रशेखर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के काफी करीबी माने जाते थे, लेकिन विचारधारा और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े सवाल पर उन्होंने अपना निर्णय लिया।
अमर सिंह के योगदान का किया उल्लेख:
चंदन सिंह ने स्वर्गीय अमर सिंह के राजनीतिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी और स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में मेहनत की और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चंदन सिंह के अनुसार बाद में राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक विरोधियों का साथ नहीं लिया।
निष्ठा को तत्कालिक लाभ से जोड़ने पर बात:
चंदन सिंह ने कहा कि इन सभी उदाहरणों में एक समान बात दिखाई देती है। उनके अनुसार ये सभी लोग क्षत्रिय समाज से आते थे और अपने राजनीतिक संबंधों तथा निष्ठा को तत्कालिक लाभ-हानि के आधार पर बदलने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में विचारधारा और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को महत्व देना जरूरी है।
स्वाभिमान को लेकर कही यह बात:
चंदन सिंह ने कहा कि क्षत्रिय अपनी निष्ठा को लाभ-हानि की शर्तों पर जल्दी नहीं बदलते। उनके अनुसार जब तक परिस्थितियां असामान्य न हो जाएं या स्वाभिमान को ठेस न पहुंचे, तब तक अपने निर्णय और निष्ठा पर कायम रहने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने राजनीतिक जीवन में निष्ठा और स्वाभिमान को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी बात रखी।
चंदन सिंह ‘चौधरी’ ने अपने बयान में राजनीतिक जीवन के दौरान निष्ठा, संगठन और स्वाभिमान को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर रखने पर जोर दिया। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक व्यक्तित्वों के उदाहरणों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि परिस्थितियां बदलने के बावजूद सिद्धांतों और राजनीतिक संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
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रिपोर्टर: जफ़र इकबाल
