यूपी राज्यसभा चुनाव में 10 सीटों का बड़ा गणित! सामने आएगी छुपे चेहरों की सच्चाई?
परखिये मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता… लेकिन राजनीति बिना परखे होती कहाँ है और परखने में अपनी रहती कहाँ है? जी हाँ, 2027 विधानसभा की संभावित तस्वीर बहुत जल्द आपके सामने होगी. उत्तर प्रदेश में होने वाला राज्यसभा चुनाव, कई चेहरों से नकाब उतरेगा. हर दाव 27 के समीकरण को परिभाषित करेगी.
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं, लेकिन इस समय सभी सीटों पर विधायक नहीं हैं। मौजूदा समय में 396 विधायक है और सात सीटें रिक्त हैं, जहाँ उपचुनाव नहीं हुए हैं। इसी 396 सदस्यीय विधानसभा के निर्वाचित विधायक 16 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मतदान करेंगे। चुनाव आयोग ने 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना की तारीख तय की है। भाजपा का दावा है कि 8 सीटें उसके खाते में तय है, मौका मिला तो नवां भी नहीं छोड़ेंगे और सपा कह रही है नवां छोडो, आठवां भी जितने नहीं देंगें. लेकिन सवाल है ये संभव कैसे होगा? कौन टूटेगा, कौन किससे जुटेगा? तोड़ने जोड़ने का असली खेल तो यहीं स्पष्ट हो जायेगा.
2022 में क्या था विधानसभा का गणित:
पहले 2022 के विधानसभा चुनाव का समीकरण समझिये, उस समय भाजपा ने 255 सीटें जीती थीं। उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिली थीं। यानी भाजपा-एनडीए का चुनावी आंकड़ा 273 था।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी (सपा) ने 111 सीटें जीतीं। उसके तत्कालीन गठबंधन सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल ने 8 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने 6 सीटें जीतीं। यानी SP गठबंधन का आंकड़ा 125 था। कांग्रेस को 2, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक को 2 और बसपा को 1 सीट मिली थी।
2022 में ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा, सपा के साथ थी। लेकिन जुलाई 2023 में सुभासपा एनडीए में चली गई। इसके बाद मार्च 2024 में जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल भी एनडीए में शामिल हो गई। यानी 2022 में सपा के साथ खड़े आठ आरएलडी विधायक और छह सुभासपा विधायक अब भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के राजनीतिक खेमे में आ गए।
अब यहीं से आज के राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक गणित शुरू होता है।
111 से 101 तक पहुंची सपा:
2022 में सपा के 111 विधायक थे। इसके बाद कई राजनीतिक बदलाव हुए। रामपुर और स्वार जैसी सीटों पर आज़म खान और अब्दुल्ला आजम को कोर्ट द्वारा सज़ा सुनाये जाने की वजह से सदस्यता समाप्त हो गयी, रामपुर उप चुनाव में उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना ने सपा के आसिम राजा को हरा दिया, फिर स्वार में उपचुनाव हुआ और भाजपा की सहयोगी अपना दल-सोनेलाल के शफीक अहमद अंसारी ने सपा की अनुराधा चौहान को हरा दिया। यानि दोनों सीटें NDA के पास चली गयी.
घोषी विधानसभा में दारा सिंह चौहान, सपा से जीते थे लेकिन भाजपा में जाने के लिए उन्होंने सपा छोड़ दिया और सीट खाली हुई, फिर उपचुनाव हुआ और उपचुनाव हुआ और सपा के सुधाकर सिंह ने भाजपा के दारा सिंह चौहान को हरा दिया, यानि सीट सपा के पास ही रह गयी।
2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव सहित चार विधायक, सांसद बन गए तो सपा की चार सीटों पर उपचुनाव हुआ। कुंदरकी और कटेहरी सपा के पास थीं। कुंदरकी में रामवीर सिंह और कटेहरी में धर्मराज निषाद भाजपा के टिकट पर जीते। यानि दोनों सीट भाजपा के पास चली गयी.दूसरी तरफ करहल और सीसामऊ सपा ने बचा लीं। करहल से तेज प्रताप सिंह और सीसामऊ से नसीम सोलंकी जीते। यानि ये दोनों सीटें सपा के खाते में बनी रहीं.
कुंदरकी और मिल्कीपुर जैसे उपचुनावों में भी SP अपनी सीटें हार गई। अवधेश प्रसाद के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद मिल्कीपुर सीट खाली हुई थी। 2025 में यहां उपचुनाव हुआ। भाजपा के चंद्रभानु पासवान ने सपा के अजीत प्रसाद को 61,710 वोटों से हराया।
2022 में दुद्धी से भाजपा के रामदुलार जीते थे। 2024 में उनकी सदस्यता जाने के बाद उपचुनाव हुआ और सपा के विजय सिंह गोंड ने जीत दर्ज की। लेकिन जनवरी 2026 में विजय सिंह गोंड का निधन हो गया और दुद्धी सीट फिर खाली हो गई और यहां उपचुनाव नहीं हुआ।
इसी तरह घोसी के सपा विधायक सुधाकर सिंह का नवंबर 2025 में निधन हुआ। घोसी सीट भी खाली हुई और 2026 में वहां उपचुनाव नहीं कराया गया। फिर जुलाई 2026 में निजामाबाद से सपा के वरिष्ठ विधायक आलम बदी आजमी का निधन हुआ और वह सीट भी रिक्त हो गई।
अब आता है 2024 का सबसे बड़ा ट्विस्ट: क्रॉस वोटिंग
फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के सात विधायकों ने भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस वोट किया। इनमें मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्य और अभय सिंह शामिल थे। महाराजी प्रजापति ने मतदान नहीं किया था। इस क्रॉस वोटिंग का असर सिर्फ उस दिन के राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं रहा। 2025 में सपा ने तीन विधायकों—अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और मनोज पांडेय—को पार्टी से निष्कासित कर दिया। बाद में विधानसभा में इन्हें असंबद्ध सदस्य माना गया। इसके बाद अगस्त 2025 में पूजा पाल को भी सपा ने निष्कासित कर दिया। चारों की विधानसभा सदस्यता खत्म नहीं हुई। लेकिन सपा की संख्या से ये चार विधायक बाहर हो गए।
सपा के मामले में बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है। 2022 में उसके 111 विधायक थे। इसके बाद रामपुर और स्वार की सीटें क्रमशः भाजपा और अपना दल (सोनेलाल) के पास चली गईं। 2024 के उपचुनाव में कुंदरकी और कटेहरी भाजपा के पास चली गईं तथा 2025 में मिल्कीपुर भी भाजपा ने जीत ली। दूसरी ओर घोसी में सपा ने 2023 का उपचुनाव जीतकर सीट बरकरार रखी, लेकिन विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद यह सीट अब रिक्त है। निजामाबाद के सपा विधायक आलमबदी के निधन के बाद यह सीट भी रिक्त है। इसके अलावा सपा के चार विधायक—मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और पूजा पाल—पार्टी से निष्कासित होकर असंबद्ध सदस्य हो चुके हैं। इन बदलावों के बाद सपा के वर्तमान विधायक 100 रह गए हैं। वहीँ अब सपा और कांग्रेस साथ हैं तो अब सपा गठबंधन की कुल सीटें 102 हैं.
2022 के मुकाबले भाजपा की संख्या में शुद्ध रूप से कोई बदलाव नहीं हुआ। भाजपा ने 2022 में 255 सीटें जीती थीं। इसके बाद रामपुर, कुंदरकी, कटेहरी, मिल्कीपुर और मझवां जैसी सीटों पर उपचुनाव जीतकर भाजपा ने पांच सीटें हासिल कीं, लेकिन खतौली सीट राष्ट्रीय लोकदल के हाथ चली गई और दुद्धी सीट उपचुनाव में सपा के पास चली गई। इसके अलावा फरीदपुर, शिकारपुर और फतेहाबाद की भाजपा सीटें विधायकों के निधन के कारण रिक्त हो गईं। 24 सितंबर को आगरा की फतेहाबाद विधानसभा सीट से भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा का निधन हो गया। इससे एक और विधानसभा सीट रिक्त हो गई। इससे पहले 2 सितंबर को शिकारपुर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा का भी निधन हो चुका था। इस तरह भाजपा को पांच सीटों का फायदा और पांच सीटों का नुकसान हुआ, जिससे उसका वर्तमान आंकड़ा फिर 255 पर है।
अपना दल (सोनेलाल) की संख्या 2022 के 12 से बढ़कर 13 हुई, क्योंकि स्वार उपचुनाव में उसके उम्मीदवार ने सपा से सीट जीत ली। राष्ट्रीय लोकदल की संख्या 8 से बढ़कर 9 हुई, क्योंकि खतौली उपचुनाव में उसने भाजपा से सीट जीत ली। निषाद पार्टी की 2022 की 6 सीटें घटकर 5 रह गईं, क्योंकि मझवां सीट, जो 2022 में निषाद पार्टी के खाते में थी, 2024 के उपचुनाव में भाजपा ने जीत ली। सुभासपा के 6, कांग्रेस के 2 और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 विधायक वर्तमान में भी उसी संख्या में हैं। वहीं 2022 में बसपा के पास एक सीट थी, लेकिन रसड़ा के विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद वह सीट भी रिक्त है।
यानी 396 मौजूदा विधायकों में NDA के पास 288 और सपा-कांग्रेस गठबंधन के पास 102 विधायक हैं। बाकी 6 विधायक जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 और 4 असंबद्ध विधायक हैं। सात सीटें रिक्त हैं।
आइये समझतें हैं राज्यसभा का गणित:
उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा के निर्वाचित विधायक वोट देते हैं। आम जनता सीधे राज्यसभा सांसद को वोट नहीं देती। संविधान के अनुच्छेद 80(4) के अनुसार चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) से होता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में अभी 7 सीटें खाली हैं, इसलिए प्रभावी रूप से 396 विधायक हैं। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होगा और एक उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक वोट निकालने के फार्मूले के अनुसार—कुल वैध वोट को सीटों में एक जोड़कर भाग किया जाता है फिर उसमे 1 जोड़ दिया जाता है। यानि इस हिसाब से 396 वोट है और 10 राज्यसभा की सीटें हैं, तो 10 में एक जोड़ा जायेगा, वो होगा 11, अब 11 से 396 में भाग देने पर 36 आता है और उसमें 1 जोड़ने पर 37 वोट होते हैं।
इसलिए, अगर सभी 396 विधायक वैध वोट डालते हैं, तो एक राज्यसभा उम्मीदवार को निर्वाचित होने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट चाहिए होंगे। यानी सिर्फ 36 वोट पर्याप्त नहीं माने जाएंगे। इसके बाद जिस उम्मीदवार को कोटा पूरा हो जाता है, वह निर्वाचित होता है और जरूरत पड़ने पर शेष वोट तथा बाहर हुए उम्मीदवारों के वोट उनकी अगली वरीयता के आधार पर दूसरे उम्मीदवारों को स्थानांतरित किए जाते हैं। यह लोकसभा या विधानसभा जैसा वोट नहीं है। विधायक को उम्मीदवारों के सामने अपनी पसंद का क्रम बताना होता है:
1 = पहली पसंद
2 = दूसरी पसंद
3 = तीसरी पसंद
पहले प्रथम वरीयता के वोट गिने जाते हैं। जिस उम्मीदवार को कोटा यानी 37 वोट मिल जाते हैं, वह निर्वाचित हो जाता है। मान लीजिए किसी उम्मीदवार को पहली गिनती में:
A = 40 वोट
B = 35 वोट
C = 28 वोट
मिले।
A के पास 37 से ज्यादा वोट हैं, इसलिए A निर्वाचित हो जाएगा। इसके बाद जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त वोट और बाहर होने वाले उम्मीदवारों के वोट अगली वरीयता के आधार पर स्थानांतरित होते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में केवल पार्टी की कुल सीटें नहीं, बल्कि पहली वरीयता के वोटों का सटीक प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है।
अब समझतें हैं कि यूपी के मौजूदा आंकड़े में इसका मतलब क्या है?
396 मौजूदा विधायकों में NDA के पास 288 और सपा-कांग्रेस गठबंधन के पास 102 विधायक हैं। भाजपा 8 सीटें जितने का दावा कर रही और सपा 3 सीटें. अब सवाल है की ये कैसे मुमकिन हैं? सीटें तो केवल 10 हैं.
भाजपा को 8 सीटें जितने के लिए 37 × 8 = यानि 296 विधायक चाहियें, लेकिन अभी पुरे NDA के पास 288 विधायक हैं. यानि 296 − 288 = 8 विधायक और चाहिए. यानि 7 सीटों पर जीत संभव हो सकती है लेकिन आठवें के लिए आठ विधायक और चाहिए.
वहीँ सपा गठबन्धन के पास 102 विधायक हैं. 3 सीटें जितने के लिए 37×3 = 111 विधायक चाहियें. यानि 111 − 102 = 9 विधायक और चाहिए. यानि 2 सीटों पर जीत संभव हो सकती है लेकिन तीसरे के लिए 9 विधायक और चाहिए.
अब उतरेगा नकाब?
जी हाँ, अब ये एक ऐसी परिस्थिति है जब असली चेहरे सामने आयेंगें और 27 के समीकरण की तस्वीर भी साफ़ होगी. पहला सवाल है की भाजपा आठवीं सीट कैसे जीतेगी? भाजपा को 8 विधायक और चाहियें. लेकिन यदि जनसत्ता दल के 2 और चार असंबद्ध विधायक, जो सपा से निष्काषित हैं वो NDA के साथ आते हैं तो: 4+2= यानि 6 विधायक और भाजपा को मिल जायेंगें, लेकिन चाहिए 8 तो 8-6 = यानि 2 विधायक और कहाँ से आयेंगें?
क्या कोई बड़ा खेल होगा या भाजपा को लगेगा तगड़ा झटका?
राजनीति के खिलाडी इस बात को गहराई से समझते होंगें कि NDA के कुछ विधायक ऐसे हैं जो शायद NDA के है ही नहीं. जी हाँ, RLD के पास कुल 9 विधायक और सुभासपा के पास कुल 6 विधायक हैं। 2022 में दोनों दल सपा के गठबंधन सहयोगी थे। RLD ने 8 और SBSP ने 6 सीटें जीती थीं।
सूत्रों के अनुसार सपा की नजर RLD के तीन विधायकों और सुभासपा के चार विधायकों पर होने की बात सामने आ रही है, जो थे तो सपा के, लेकिन चुनाव लड़ा था RLD और सुभासपा के टिकट पर। सुभासपा से अब्बास अंसारी, जगदीश नारायण राय, दुद्धराम और हंसूराम के नाम काफी हैं, गणित को समझने के लिए।
यदि ये सात विधायक राज्यसभा चुनाव में सपा उम्मीदवारों को प्रथम वरीयता का वोट देते हैं, तो 100 सपा के + 2 कांग्रेस + 3 RLD + 4 सुभासपा के = यानी सपा के पास संभावित = 109 विधायक हो जायेंगें। तीसरी जीत के लिए सपा को 9 विधायक और चाहिए थे. यानि 9-7 = अब 2 विधायकों की और जरुरत होगी.
यहाँ बड़ा झटका भाजपा को लगता दिखाई दे रहा है, क्योंकि इन सात विधायकों का समर्थन NDA से हटता है तो 288-7= यानि अब 281 विधायक भाजपा के पास रह जायेंगें. यानि 8 सीटें जितने के लिए 37 × 8 = यानि 296 विधायक चाहियें, लेकिन अभी पुरे NDA के पास 281 विधायक बचते हैं तो 296 − 281 = 15 विधायक और चाहिए. लेकिन यदि जनसत्ता दल के 2 और चार असंबद्ध विधायक, जो सपा से निष्काषित हैं वो NDA के साथ आते हैं तो: 4+2= यानि 6 विधायक और भाजपा को मिल जायेंगें, लेकिन चाहिए 15 तो 15-6 = यानि 9 विधायक और कहाँ से आयेंगें?
2024 की क्रॉस वोटिंग का असर:
2024 के राज्यसभा चुनाव में SP के सात विधायकों ने BJP उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी और एक विधायक मतदान से अनुपस्थित रहा था। BJP ने उस चुनाव में अपेक्षित सात के बजाय आठ सीटें जीतीं, जबकि SP के तीन उम्मीदवारों में से दो ही जीत पाए। बाद में मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह को SP से निष्कासित किया गया। पूजा पाल भी बाद में SP से बाहर हुईं और जून 2026 में BJP की प्रदेश कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष बनाई गईं।
इसलिए 2026 में क्रॉस वोटिंग केवल अतीत की घटना नहीं है; 2024 का अनुभव इस चुनाव के संभावित रणनीतिक गणित को प्रभावित कर सकता है।
BJP के संभावित उम्मीदवार कौन:
29 सितंबर तक BJP ने आधिकारिक रूप से आठ उम्मीदवारों की अंतिम सूची घोषित नहीं की थी। पार्टी में कई नामों पर मंथन की खबरें हैं। इनमें स्मृति ईरानी, हरदीप सिंह पुरी, हरीश द्विवेदी, बीएल वर्मा, गीता शाक्य, रेखा वर्मा, प्रियंका रावत, कौशल किशोर, राजवीर सिंह, कुमार विश्वास समेत कई नाम विभिन्न रिपोर्टों में चर्चा में हैं। BJP ने केंद्रीय नेतृत्व को नामों का पैनल भेजा है; अंतिम निर्णय अभी बाकी बताया गया है।
SP के उम्मीदवारों की स्थिति:
SP ने 28 सितंबर की बैठक के बाद प्रो. रामगोपाल यादव और आलोक रंजन के नाम घोषित किए हैं। तीसरे उम्मीदवार के नाम पर चर्चा जारी थी। सलीम इकबाल शेरवानी और PDA से किसी चेहरे के नाम की चर्चा रिपोर्टों में है।
और अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल—क्या सात विधायक पूरा खेल बदल सकते हैं?
यही तो बड़ा सवाल है. इन सात विधायकों का मतदान व्यवहार सपा के तीसरी सीट के गणित में बड़ा अंतर पैदा करता है। यही इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण संभावित क्रॉस-वोटिंग फैक्टर है। यह दावा नहीं किया जा सकता कि वे निश्चित रूप से SP को वोट देंगे; उपलब्ध रिपोर्टें केवल ऐसी संभावना और SP की कोशिशों की बात करती हैं।
क्या भाजपा को लग सकता है और बड़ा झटका?:
जी हाँ, यहाँ एक बड़े चेहरे की बदलती निति ने नई परिस्तिथि पैदा की है. निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद ने सितंबर में सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की। इसके बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हुईं। निषाद ने मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन साथ ही BJP के साथ गठबंधन को लेकर कहा कि यदि BJP उनके लिए अपने दरवाजे बंद करती है तो पार्टी को अपने विकल्पों पर विचार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका समर्थन उस पक्ष को होगा जो निषाद समुदाय की मांगों पर काम करेगा।
भाजपा को आठवीं जीत के लिए 9 विधायक की आवश्कता पड़ सकती है और सपा को तीसरी जीत के लिए 2 विधायक की. केवल संजय निषाद के रहने से भाजपा को आठवीं जीत तो नहीं मिल सकती लेकिन संजय निषाद की नाराजगी सपा को जीत जरुर दिला सकती हैं, यदि वो सपा को समर्थन देते हैं तो, पहले भी सपा के साथ रह चुके हैं.यानीं 100 सपा के + 2 कांग्रेस + 3 RLD + 4 सुभासपा और + 5 निषाद पार्टी के = यानी सपा के पास संभावित = 114 विधायक हो जायेंगें। तीसरी जीत के बाद भी 3 विधायक शेष रह जायेंगें.
इसका अर्थ यह नहीं है कि निषाद पार्टी के पांच विधायक सपा को वोट देने वाले हैं। अभी ऐसा कोई घोषित निर्णय नहीं है। लेकिन यदि सपा को तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ती है, तो NDA के भीतर सहयोगी दलों के रुख पर नजर क्यों है—इसका जवाब यहीं मिलता है।
लेकिन राजनीति के जानकार इस बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं की अंतिम वक़्त में भाजपा ऐसा खेल खेलती है की राजनीति का इतिहास भी सर खुजाने लगता है…
इसलिए अंतिम नतीजा केवल विधानसभा में मौजूद दलों की घोषित संख्या से तय नहीं होगा। प्रथम वरीयता के वास्तविक वोट, क्रॉस वोटिंग और सहयोगी दलों के विधायकों का मतदान व्यवहार इस गणित को बदल सकता है।
धन्यवाद…
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए विधानसभा के आंकड़े 29 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। राज्यसभा चुनाव का गणित वर्तमान विधायकों की संख्या और संभावित प्रथम वरीयता मतों के आधार पर समझाया गया है। क्रॉस-वोटिंग, किसी दल या विधायक के समर्थन में बदलाव तथा संभावित राजनीतिक समीकरण से जुड़े हिस्से केवल उपलब्ध रिपोर्टों, चर्चाओं और संभावित परिस्थितियों पर आधारित विश्लेषण हैं। इन्हें किसी विधायक या दल के वास्तविक मतदान निर्णय की पुष्टि के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम परिणाम मतदान के दिन विधायकों के वास्तविक मतदान और निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार ही निर्धारित होगा।
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