मायावती ने ‘अनुभवहीन’ ईशान को जिम्मेदारी क्यों सौंपी:क्या चुनाव में लॉन्च करेंगी, BSP का उत्तराधिकारी कौन होगा
बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आकाश आनंद को बाहर किए जाने के बाद अब उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में अहम जिम्मेदारी दिए जाने से पार्टी के भविष्य को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी प्रमुख मायावती ने पहले आकाश को आगे बढ़ाकर नई पीढ़ी को नेतृत्व देने का संकेत दिया था, लेकिन बाद में उन्हें अपरिपक्व बताते हुए उनकी जिम्मेदारियां सीमित कर दी गईं। अब ईशान आनंद को अचानक 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी दिए जाने से पार्टी के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
तीन सवालों से समझिए मायावती की रणनीति:
ईशान आनंद को जिम्मेदारी मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उन्हें आगे चलकर उत्तर प्रदेश में भी कोई बड़ी भूमिका दी जाएगी। दूसरा सवाल यह है कि क्या मायावती उन्हें उत्तर प्रदेश की जनसभाओं के जरिए राजनीतिक मैदान में उतारेंगी। तीसरा और सबसे अहम सवाल यह है कि क्या उनके साथ पार्टी के भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई बड़ी पहल आगे बढ़ाई जाएगी।
19 राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली:
6 सितंबर को मायावती ने ईशान आनंद को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर देश के 19 राज्यों का मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया। इन राज्यों को दो सेक्टरों में बांटा गया है। पहले सेक्टर में 10 और दूसरे सेक्टर में 9 राज्य रखे गए हैं। दोनों सेक्टरों के लिए दो-दो प्रभारियों की भी नियुक्ति की गई है।
सेक्टर-1 की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और सुरेश राव को दी गई है, जबकि सेक्टर-2 के प्रभारी राजाराम और अतर सिंह राव बनाए गए हैं। ईशान आनंद को दोनों सेक्टरों के ऊपर मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। उनका काम इन 19 राज्यों में संगठन की स्थिति की समीक्षा करना होगा। इसकी रिपोर्ट वह पार्टी उपाध्यक्ष आनंद कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को देंगे।
इस फैसले से फिलहाल यह संकेत मिलता है कि ईशान को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे चुनावी रूप से महत्वपूर्ण राज्यों से अलग रखकर संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसे ईशान की क्षमता और संगठनात्मक समझ को परखने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। यदि वह पार्टी की अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं तो आगे उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की भी जिम्मेदारी मिलने की संभावना पर चर्चा हो सकती है।
जेन-जी वोटरों पर भी नजर:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी आंदोलन के बाद मायावती अपने सोशल मीडिया संदेशों और पार्टी बैठकों में लगातार जेन-जी और जेन-अल्फा की समस्याओं का उल्लेख कर रही हैं। वह इन युवा वर्गों के मुद्दों को उठाने की बात कह चुकी हैं और पार्टी पदाधिकारियों को भी उनकी समस्याओं पर ध्यान देने का निर्देश दिया है।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद कुल मतदाताओं की संख्या 13.39 करोड़ बताई गई है। इनमें 18 से 29 वर्ष की उम्र वाले जेन-जी मतदाताओं की संख्या 2.07 करोड़ बताई गई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 3.80 करोड़, सपा को 2.95 करोड़ और बसपा को 1.18 करोड़ वोट मिले थे। ऐसे में युवा मतदाताओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसी संदर्भ में 27 वर्षीय ईशान आनंद की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। आकाश आनंद के बाद ईशान को आगे बढ़ाने के फैसले को जेन-जी मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह का आकलन है कि मायावती आगे चलकर ईशान को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की जिम्मेदारी भी दे सकती हैं।
पहले संगठन में परखा जाएगा ईशान का प्रदर्शन:
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर विवेक कुमार के अनुसार, मायावती जब तक शारीरिक रूप से सक्रिय हैं, तब तक किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने की संभावना कम है। उनका कहना है कि कांशीराम ने भी इसी तरह पार्टी के नेतृत्व को आगे बढ़ाया था और बाद में मायावती को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया गया।
विवेक कुमार के अनुसार, मायावती पहले आकाश आनंद को कई बड़ी जिम्मेदारियां देकर उनकी क्षमता और धैर्य को परख चुकी हैं। अब ईशान आनंद को भी संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर उनकी राजनीतिक क्षमता को जांचने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
ईशान ने लंदन से एलएलबी की पढ़ाई की है और वह फिलहाल परिवार का कारोबार संभाल रहे थे। अब उन्हें संगठन से जुड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी राजनीतिक दक्षता और क्षमता को परखा जाएगा।
परिवारवाद के सवाल पर भी चर्चा:
वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम का आकलन इससे अलग है। उनके अनुसार, मायावती ने 3 सितंबर को पार्टी की बैठक में कांशीराम की तरह परिवारवाद को आगे नहीं बढ़ाने की बात कही थी। इसके कुछ ही दिन बाद ईशान आनंद को 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
सैयद कासिम का सवाल है कि ईशान की पार्टी में इससे पहले क्या बड़ी भूमिका रही है और उनकी अपनी राजनीतिक उपलब्धियां क्या हैं। उनके मुताबिक, मायावती के परिवार से संबंध के अलावा ईशान की राजनीतिक पहचान अभी विकसित होनी बाकी है। ऐसे में भविष्य में उत्तराधिकारी के चयन को लेकर परिवार की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आकाश से तुलना में ईशान के सामने चुनौती:
31 वर्षीय आकाश आनंद और 27 वर्षीय ईशान आनंद की तुलना भी शुरू हो गई है। सैयद कासिम के अनुसार, ईशान को अभी खुद को साबित करना है, जबकि आकाश ने भीड़ जुटाने वाले नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। उनके भाषणों में आक्रामकता और तथ्यों पर जोर दिखाई देता है। हाथरस की सादाबाद विधानसभा में हुई उनकी गतिविधियों का भी उन्होंने उदाहरण दिया।
आकाश की भाषण शैली बसपा समर्थकों के बीच पसंद किए जाने की बात कही जाती है और उसमें मायावती के पुराने राजनीतिक तेवरों की झलक दिखाई देती है। इसके विपरीत ईशान आनंद ने अभी तक किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित नहीं किया है। उन्हें फिलहाल चुनावी जिम्मेदारी के बजाय संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा का दायित्व दिया गया है। ऐसे में आने वाला समय यह तय करेगा कि ईशान आनंद संगठन के स्तर पर खुद को कितना साबित कर पाते हैं और मायावती की राजनीतिक रणनीति में उनकी भूमिका आगे कितनी बढ़ती है।
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