बसपा से बाहर होंगे आकाश? चुनाव से पहले दोराहे पर पार्टी
बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल बने हुए हैं। हालांकि फिलहाल आकाश आनंद, बसपा सुप्रीमो Mayawati (मायावती) के सोशल मीडिया पर जारी बयानों को फॉलो कर अपनी निष्ठा जाहिर कर रहे हैं। उनके ससुर Ashok Siddharth (अशोक सिद्धार्थ) भी मायावती की नाराजगी को कम करने की कोशिश में इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
पार्टी से बाहर करने पर नहीं बनी सहमति:
बहुजन समाज पार्टी ने हाल ही में संगठन में एक और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए दो युवा चेहरों Mohit Anand (मोहित आनंद) और Nitin Singh (नितिन सिंह) को नेशनल कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ की तुलना में आकाश आनंद को लेकर पार्टी नेतृत्व का रुख अभी अपेक्षाकृत लचीला है। इसी वजह से आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने को लेकर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।
हालांकि आकाश आनंद से उनकी सभी जिम्मेदारियां वापस ली जा चुकी हैं, लेकिन उन्हें संगठन को मजबूत करने से पूरी तरह अलग नहीं किया गया है। पार्टी में उनके भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय बसपा सुप्रीमो मायावती को ही करना है।
वरिष्ठ पदाधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल:
आकाश आनंद को लेकर पार्टी के भीतर चल रही चर्चा के बीच यह बात भी सामने आई है कि उन्होंने संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उनके खिलाफ लामबंदी किए जाने की चर्चा हुई। वहीं, उनके छोटे भाई Ishan Anand (ईशान आनंद) को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर स्थिति को संभालने और संगठन में संतुलन बनाने की कोशिश की गई।
चुनावी तैयारियों के बीच बढ़ी खींचतान:
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बसपा में सामने आ रही पारिवारिक और संगठनात्मक खींचतान को लेकर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। आकाश आनंद की जनसभाओं की मांग पार्टी के कई प्रत्याशियों की ओर से की जा रही थी। सितंबर में पूर्वांचल में उनकी कई जनसभाओं का कार्यक्रम भी तय हो चुका था।
अब आकाश आनंद के समर्थक सोशल मीडिया पर उनकी वापसी की मांग कर रहे हैं। समर्थकों की ओर से पार्टी के कुछ पदाधिकारियों को आकाश आनंद के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि ये आरोप समर्थकों की ओर से लगाए जा रहे हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
युवा चेहरों को संगठन में मिली जिम्मेदारी:
बसपा ने संगठन में युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की दिशा में भी बदलाव किए हैं। नेशनल कोआर्डिनेटर बनाए गए मोहित आनंद मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन का काम देखते हैं। वहीं नितिन सिंह को पिछले वर्ष आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के साथ पार्टी से बाहर कर दिया गया था। बाद में नितिन सिंह की पार्टी में वापसी हुई।
इसके बाद नितिन सिंह को हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में संगठन के कामकाज की जिम्मेदारी दी गई थी। अब उन्हें नेशनल कोआर्डिनेटर बनाया गया है। हालांकि मायावती के फैसले के मुताबिक दोनों नेताओं को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से दूर रखा जाएगा।
आकाश आनंद के सामने अब क्या रास्ता:
राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद आकाश आनंद की सक्रिय राजनीतिक भूमिका सीमित जरूर हुई है, लेकिन फिलहाल उनके पार्टी से बाहर होने की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में उनके सामने बसपा के भीतर अपनी राजनीतिक भूमिका को दोबारा मजबूत करने की चुनौती है।
आकाश आनंद के समर्थकों की सोशल मीडिया पर सक्रियता और उनकी वापसी की मांग के बीच अब सबकी नजर मायावती के अगले फैसले पर है। चुनाव से पहले बसपा संगठन में लगातार हो रहे बदलाव और आकाश आनंद को लेकर नेतृत्व के रुख से संकेत मिलता है कि उनके राजनीतिक भविष्य पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। ऐसे में आने वाले समय में आकाश आनंद की भूमिका और पार्टी के भीतर उनकी स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है।
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