Lucknow (लखनऊ) में बाबा साहब का मिशन इकाई के तत्वावधान में छत्रपति शाहूजी महाराज की सामाजिक न्याय क्रांति के 124 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रविवार को Charan Singh Auditorium (चरण सिंह ऑडिटोरियम), Sahkarita Bhawan (सहकारिता भवन) में एक दिवसीय प्रांतीय बौद्ध धम्म अधिवेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) के सभी 75 जनपदों से आए पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अधिवेशन का उद्देश्य सामाजिक न्याय, शिक्षा, संगठन और बौद्ध धम्म के मानवीय मूल्यों को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाना रहा।
मुख्य अतिथि ने सामाजिक परिवर्तन पर दिया जोर:
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि Rashtriya Bauddh Mahasabha (राष्ट्रीय बौद्ध महासभा) के संस्थापक एवं पूर्व विधायक Dharm Prakash Bharti Bauddh (धर्म प्रकाश भारती बौद्ध) ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय बौद्ध महासभा पिछले लगभग 20 वर्षों से पूरे देश में सामाजिक परिवर्तन, बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार तथा बहुजन महापुरुषों के विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं से संगठन से जुड़कर समाज निर्माण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
महापुरुषों के विचारों को अपनाने का आह्वान:
अपने संबोधन में Dharm Prakash Bharti Bauddh (धर्म प्रकाश भारती बौद्ध) ने कहा कि Chhatrapati Shahuji Maharaj (छत्रपति शाहूजी महाराज), Dr. Bhimrao Ambedkar (डॉ. भीमराव आंबेडकर) तथा अन्य बहुजन महापुरुषों के विचारों और आदर्शों को अपनाकर ही सामाजिक समता, न्याय, बंधुत्व और मानवता पर आधारित समाज की स्थापना संभव है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए शिक्षा और संगठन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
सामाजिक न्याय और संगठन विस्तार पर हुई चर्चा:
अधिवेशन के दौरान सामाजिक न्याय, शिक्षा, संगठन विस्तार तथा बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाने, शिक्षा को मजबूत करने और संगठन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। इस दौरान विभिन्न जनपदों से आए प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए।
जनभागीदारी बढ़ाने पर रहा विशेष फोकस:
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बहुजन महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना, सामाजिक परिवर्तन की दिशा में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना तथा बौद्ध धम्म के मानवीय मूल्यों का प्रसार करना रहा। अधिवेशन में उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प भी व्यक्त किया।
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