रिपोर्टर: अमित कुमार
उत्तर प्रदेश के बलिया (Ballia) जिले के सिकंदरपुर (Sikanderpur) कस्बे में भू-माफियाओं के बड़े खेल का खुलासा होने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि सरकारी तंत्र से साठगांठ कर पोखरी की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया और बाद में वहां प्लॉटिंग कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। मामला सामने आते ही जिलाधिकारी (District Magistrate) की सख्त कार्रवाई से पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है।

यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित पक्ष ने तहसील दिवस के दौरान जिलाधिकारी को दस्तावेजों के साथ शिकायत सौंपी। शिकायत के आधार पर प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया और मौके पर चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी भूमि पर फर्जी तरीके से कब्जे का आरोप:
शिकायत में कहा गया है कि सिकंदरपुर कस्बे में स्थित गाटा संख्या 50/1, बंदोबस्त वर्ष 1345 फसली की खतौनी में पोखरी के रूप में दर्ज है। पीड़ितों का दावा है कि यह जमीन लंबे समय से पोखरी के रूप में ही मौजूद थी। आरोप है कि कुछ भू-माफियाओं ने सरकारी तंत्र की मिलीभगत से इस भूमि पर फर्जी तरीके से नाम चढ़वाया और पोखरी को पाटकर अवैध प्लॉटिंग शुरू कर दी।
सफेदपोश के रिश्तेदार की भूमिका पर सवाल:
मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि एक सफेदपोश व्यक्ति के भाई के साथ मिलकर इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया। सरकारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से न केवल जमीन पर कब्जा किया गया, बल्कि तेजी से निर्माण कार्य भी कराया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायत न की जाती तो पूरी पोखरी जमीन प्लॉटिंग में तब्दील हो जाती।
तहसील दिवस में उठा मामला:
पीड़ित गणेश सोनी सहित अन्य ग्रामीणों ने तहसील दिवस के दौरान जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह (Mangala Prasad Singh) को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत के साथ खतौनी और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने पहले भी एसडीएम (SDM) समेत कई अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
डीएम ने अपनाया सख्त रुख:
तहसील दिवस में मामला सामने आते ही जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर ही संबंधित एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल को फटकार लगाई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अवैध निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके बाद अधिशासी अधिकारी और लेखपाल को मौके पर भेजकर निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगा दी गई।
जांच के आदेश, सात दिन की समयसीमा:
जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश देते हुए सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से भू-माफियाओं और संबंधित लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
स्थानीय लोगों में संतोष:
डीएम की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि पोखरी जैसी सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे पर्यावरण और जल संरक्षण को भी नुकसान पहुंचता है। लोगों ने उम्मीद जताई है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और पोखरी की जमीन को सुरक्षित रखा जाएगा।
प्रशासनिक तंत्र पर भी उठे सवाल:
इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय तक शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना और अचानक डीएम के हस्तक्षेप के बाद मामला सामने आना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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