1 करोड़ रिश्वत मामले में सस्पेंड IAS अभिषेक प्रकाश बहाल, योगी ने साल पहले किया था निलंबित

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने सस्पेंडेड IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश (Abhishek Prakash) को लगभग एक साल बाद बहाल कर दिया है। आरोप था कि उन्होंने अपने करीबी बाबू निकांत जैन (Nikant Jain) के जरिए सोलर इंडस्ट्री प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता (Vishwajeet Dutta) से 1 करोड़ रुपए का कमीशन मांगा था। कमीशन न मिलने पर प्रोजेक्ट की फाइल रोक दी गई थी। इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने STF से जांच कराई थी।

शिकायत और STF जांच:
बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता ने सीधे मुख्यमंत्री (Chief Minister, CM) योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद, सीएम ने मामले की जांच के लिए STF (Special Task Force) को सौंपी। जांच के दौरान STF ने बाबू निकांत जैन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में निकांत जैन ने स्वीकार किया कि वह अभिषेक प्रकाश के कहने पर रिश्वत मांग रहा था।

लखनऊ हाईकोर्ट में मामला:
निकांत जैन ने गिरफ्तारी के खिलाफ लखनऊ (Lucknow) हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके साथ ही, 10 फरवरी को लखनऊ हाईकोर्ट में बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता ने अपनी शिकायत से मुकरते हुए कहा कि शिकायत गलतफहमी के चलते दर्ज कराई गई थी। इसके बाद कोर्ट ने मामले को रद्द कर दिया। कोर्ट के निर्णय के बाद से अभिषेक प्रकाश की बहाली के कयास तेज हो गए थे।

अभिषेक प्रकाश की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति:
सूत्रों के अनुसार, अभिषेक प्रकाश यूपी के दो सबसे ताकतवर IAS अधिकारियों के करीबी हैं, जिनमें एक सेवानिवृत्त और एक मौजूदा अधिकारी हैं। इसलिए अब उन्हें जल्द ही प्राइम पोस्टिंग मिलने की संभावना जताई जा रही है।

प्रोजेक्ट और कमीशन का मामला:
पिछले साल, इन्वेस्टर विश्वजीत दत्ता ने सीएम योगी से शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उनका ग्रुप SEAL सोलर P6 प्राइवेट लिमिटेड (SEAL Solar P6 Private Limited) उत्तर प्रदेश में सोलर सेल और सोलर ऊर्जा से संबंधित कल-पुर्जे बनाने की यूनिट स्थापित करना चाहता था। इसके लिए उन्होंने इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) के ऑफिस में और ऑनलाइन आवेदन किया।

मूल्यांकन समिति की बैठक में आवेदन पत्र रखा गया। एक सीनियर IAS अधिकारी ने निकांत जैन का नंबर दिया और कहा कि उनसे बात कर लें, फाइल तुरंत पास हो जाएगी। जैन ने 5% कमीशन (करीब 1 करोड़ रुपए) मांगा। कमीशन देने से मना करने पर उन्होंने कहा कि फाइल चाहे जितना प्रयास करें, यहीं रुकेगी।

STF की कार्रवाई और अभिषेक की सस्पेंशन:
सीएम योगी ने मामले की जांच STF को सौंपी। 20 मार्च, 2025 को STF ने निकांत जैन को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ लखनऊ के गोमती नगर (Gomti Nagar, Lucknow) थाने में केस दर्ज किया गया। पूछताछ में जैन ने कमीशन मांगने की बात कबूल की। इसके बाद अभिषेक प्रकाश को औद्योगिक विकास विभाग (Department of Industrial Development) के सचिव और इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) के CEO के पद से सस्पेंड कर दिया गया। कार्रवाई के बाद से अभिषेक प्रकाश सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

भविष्य की संभावनाएं:
कोर्ट द्वारा मामले को रद्द किए जाने और जांच पूरी होने के बाद, अभिषेक प्रकाश की बहाली हुई है। उनके करीबी संबंधों के कारण माना जा रहा है कि उन्हें जल्द ही प्राइम पोस्टिंग मिल सकती है।

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