April 2021

ना एम्बुलेंस, ना बेड, ना बैकुंठधाम और तड़पते रहें न्यायदाता!

ज़फ़र इक़बाल/अभिनेंद्र की कलम से एम्बुलेंस चाहिए- नहीं मिलेगी। बेड चाहिए-नहीं मिलेगी डेड बॉडी के लिये गाड़ी चाहिए-नहीं…