ना एम्बुलेंस, ना बेड, ना बैकुंठधाम और तड़पते रहें न्यायदाता!

ज़फ़र इक़बाल/अभिनेंद्र की कलम से

एम्बुलेंस चाहिए- नहीं मिलेगी। बेड चाहिए-नहीं मिलेगी डेड बॉडी के लिये गाड़ी चाहिए-नहीं मिलेगी। बैकुंठधाम पर बाउंड्री बन तो रही है,और क्या चाहिए?

सोशल मीडिया पर लगातार आंकड़े बताए जाते हैं कि वहां पर एंबुलेंस की कमी है। वहां पर मरीज तड़प रहा है। कोरोना बहुत भयावह है। कोरोना से कितने लोग मर गए हैं। लोगों की सांस फूल रही है। कोरोना का लक्षण पता नहीं चल रहा है और मौत हो जा रही है। डरिए डरिए कोरोना है। खूब डरिए खूब रोना है। यही तो करोना है।

सोशल मीडिया हो या टीवी की मीडिया, ऐसा लगता है कि जागरूक करने वाली बातें केवल 30% और डराने वाली बातें 70%। बातों और खबरों को परोसने का तरीका ऐसा है कि लोग जागरूक कम होते हैं और हदस ज्यादा जाते हैं।

किसी को कम लक्षण है लेकिन पॉकेट में नोट है, फोन पर प्रभावशाली व्यक्ति है तो फिर अस्पताल में भीड़ तो लगनी है।

लेकिन चाहे प्रभावशाली व्यक्ति हो या हो कोई गरीब। जब मौत सर पर मंडरा रही है तो अब उसका खराब हो चुका है नसीब।।

डरावनी खबरों ने अस्पताल को मेला बना दिया और अनचाही मौत से कईयों का सामना करा दिया। यदि इन बातों से किसी को ठेस पहुंचे तो मैं उससे क्षमा चाहता हूं लेकिन उम्मीद करता हूं कि सकारात्मक रूप से आम जनमानस को कोरोना के प्रति वह जागरूक करें।

अब मामला एक न्यायदाता का है यानी जज का, वह भी जिला जज का, जी हां पूर्व जिला जज का। मामला लखनऊ के गोमती नगर में विनम्र खंड के निवासी पूर्व जिला जज रमेश चंद्रा का है।

दो दिन पहले पूर्व जज साहब कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। उनकी पत्नी 64 वर्षीय मधु चंद्रा भी संक्रमित थीं। पूर्व जिला जज ने डीएम से लेकर सीएमओ व कोविड-19 कंट्रोल रूम समेत अन्य अधिकारियों को पचासों फोन कर डाले। लेकिन क्या उनके साथ, जिन्होंने न जाने कितने असहायों को न्याय दिया होगा। वही हुआ जिसकी उम्मीद इस सिस्टम से की भी जा सकती है। हर जगह से अभी तभी व्यवस्था कराने व एम्बुलेंस भेजने का सिर्फ झूठा आश्वासन मिलता रहा और वो तड़पते रहे।

बृहस्पतिवार को सुबह करीब आठ बजे उनकी पत्नी मधु चंद्रा ने दम तोड़ दिया और अब खबर लिखने तक यही जानकारी आ रहीं है कि उनकी लाश उठाने तक के लिए कोई नहीं जा रहा है।

एक फिर निवेदन है कि कोरोना से डरिए नही जागरूक बनिए। मास्क पहिनिये, सेनेटाइजर का प्रयोग कीजिए, डॉक्टर की सलाह लीजिए, सरकार की गाइडलाइन का पालन कीजिए और इस समय तो चुनावी रैली में बिल्कुल न जाइए, वहां बहुत भीड़ है।

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