दरोगा की तानाशाही, मानवाधिकार में शिकायत दर्ज

विश्वजीत मिश्रा की रिपोर्ट

वाराणसी। कोरोना संक्रमण से आम जनमानस बेहाल, सबको मास्क लगाने और 2 गज की दूरी का पालन करने को कहा जा रहा है, जो जरूरी भी है, लेकिन एक कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच कहीं लॉकडाउन तो कहीं नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया गया है और दूसरी तरफ बंगाल चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष अलग ही संदेश देश को दे रहें हैं। बात केवल बंगाल की नही वाराणसी के भी एक दरोगा जी बंगाल चुनाव के नेताओं से प्रभावित हो गए और खुद के मास्क को नेम प्लेट पर लटका लिया और दूसरे को इस नियम का पालन न करने पर डंडा से प्रहार कर दिया। अब फोटो में दिख रहा डंडा सरकारी है या नही ये भी चर्चा का विषय है।

वाराणसी के रीवा घाट पर अस्सी पुलिस चौकी के दरोगा द्वारा आमजन को लाठी मार कर खदेड़े जाने की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की गई है। दीवानी कचहरी के फौजदारी के अधविक्ता अंशुमान त्रिपाठी ने मंगलवार को बताया कि उनकी शिकायत मानवाधिकार आयोग ने दर्ज कर ली है।

अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी के अनुसार, उन्होंने मंगलवार को एक दैनिक समाचार पत्र में समाचार पढ़ा कि,अस्सी पुलिस चौकी पर तैनात दरोगा गौरव उपाध्याय सोमवार को गंगा घाट पर खुद कोविड-19 की गाइडलाइन का उल्लंघन कर अपना मास्क अपनी नेमप्लेट पर लगा कर घूम रहे थे। इसके साथ ही घाट पर शाम चार बजे के बाद आवाजाही प्रतिबंधित होने के बाद भी घूम रहे लोगों को वह लाठी से पीट कर खदेड़ रहे थे। इस तरह का कृत्य करके दरोगा ने आमजन के मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन किया है। इसलिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करा कर मांग की गई है कि दरोगा गौरव उपाध्याय के खिलाफ मानवाधिकारों के हनन के आरोप में उचित और ठोस कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही सरेराह दरोगा की पिटाई से जिन लोगों के मानवाधिकारों का हनन हुआ है उन्हें प्रतिकर दिलाया जाए।

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