मिडिल-ईस्ट (Middle East) में जारी संघर्ष के बीच इजराइल (Israel) के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने अपनी मौत को लेकर फैली अफवाहों का खंडन किया है। गुरुवार देर रात आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह जीवित हैं और इस तरह की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही अटकलों पर विराम लगा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी स्थिति की जानकारी:
बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने अपने संबोधन में कहा कि बीते 20 दिनों के संघर्ष के बाद ईरान (Iran) की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने दावा किया कि अब ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन करने और बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने की क्षमता काफी हद तक समाप्त हो चुकी है। उनके अनुसार, इजराइल लगातार अपने सैन्य अभियानों के जरिए इन क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ईरान के ठिकानों पर हमलों का दावा:
नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल ने ईरान के 100 से अधिक मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है। इसके साथ ही हथियार निर्माण से जुड़ी कई फैक्ट्रियों को भी ध्वस्त करने का दावा किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल अब ईरान पर चारों ओर से दबाव बना रहा है, जिससे वह वैश्विक स्तर पर किसी प्रकार का दबाव या ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा।
युद्ध के प्रमुख लक्ष्य बताए:
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने युद्ध के तीन मुख्य उद्देश्यों का जिक्र किया। इसमें ईरान के न्यूक्लियर खतरे को समाप्त करना, बैलिस्टिक मिसाइलों के जोखिम को खत्म करना और ईरानी नागरिकों के लिए बेहतर हालात बनाना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अभियान जारी रहेगा।
अमेरिका की भूमिका पर बयान:
नेतन्याहू ने अमेरिका (America) की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ हमले इजराइल ने अकेले किए हैं। कतर (Qatar) के साउथ पार्स गैस फील्ड से जुड़े प्रोसेसिंग प्लांट पर हुए हमले को उन्होंने इजराइल की एकल कार्रवाई बताया और इसमें अमेरिका की भागीदारी से इनकार किया।
ट्रम्प के जंग में शामिल होने पर प्रतिक्रिया:
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उनका युद्ध में शामिल होना उनका स्वयं का निर्णय था। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बाहरी दबाव में आकर ऐसा निर्णय नहीं लिया गया, बल्कि यह परिस्थितियों के अनुसार लिया गया कदम था।
ईरान की प्रतिक्रिया और दावे:
दूसरी ओर, ईरान (Iran) की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एफ-35 फाइटर जेट को निशाना बनाकर उसे नुकसान पहुंचाया है। इस दावे के समर्थन में एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें हमले का दृश्य दिखाया गया है। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की पुष्टि:
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US Central Command) ने यह स्वीकार किया है कि एक एफ-35 फाइटर जेट को मिशन के दौरान इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। जानकारी के अनुसार यह विमान मिडिल-ईस्ट के किसी देश में सुरक्षित उतारा गया। हालांकि नुकसान की सीमा को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
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