गाजीपुर (Ghazipur) में मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) के चचेरे भाई मंसूर अंसारी (Mansoor Ansari) को बड़ी राहत मिली है। हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने उनकी कुर्क की गई दुकानों को रिलीज करने का आदेश दिया है। इसके बाद मंसूर अंसारी ने जिलाधिकारी (District Magistrate) से मुलाकात कर आदेश के अनुपालन की मांग की। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जिलाधिकारी से मिलकर की कार्रवाई की मांग:
हाई कोर्ट के आदेश के बाद मंसूर अंसारी (Mansoor Ansari) बृहस्पतिवार को गाजीपुर (Ghazipur) स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने जिलाधिकारी (District Magistrate) से मुलाकात कर कुर्क की गई दुकानों को जल्द से जल्द रिलीज करने का आग्रह किया। मंसूर अंसारी ने बताया कि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हाई कोर्ट ने दिया दुकानों को रिलीज करने का आदेश:
इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने अपने आदेश में जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि मंसूर अंसारी की 18 दुकानों को तत्काल प्रभाव से रिलीज किया जाए। यह आदेश उन दुकानों को लेकर दिया गया है जिन्हें वर्ष 2023 में प्रशासन ने कुर्क किया था। अदालत के इस फैसले को मंसूर अंसारी के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
2023 में गैंगस्टर एक्ट के तहत हुई थी कुर्की:
जिला प्रशासन ने फरवरी 2023 में गाजीपुर (Ghazipur) के मुहम्मदाबाद (Mohammadabad) क्षेत्र में स्थित मंसूर अंसारी की 18 दुकानों को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क किया था। प्रशासन का आरोप था कि इन दुकानों के निर्माण में मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) का अवैध धन लगा हुआ है। इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए दुकानों को जब्त किया गया था।
पुश्तैनी जमीन पर बने होने का दावा:
मंसूर अंसारी (Mansoor Ansari) ने अपने पक्ष में कहा कि ये सभी दुकानें उनकी पुश्तैनी जमीन पर बनाई गई थीं। उन्होंने यह भी बताया कि दुकानों के निर्माण के लिए उन्होंने अपनी जमीन का एक हिस्सा पारस गुप्ता (Paras Gupta) को बेचकर धन जुटाया था। उनके अनुसार, प्रशासन द्वारा लगाए गए आरोपों को साबित नहीं किया जा सका, जिसके चलते उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
पहले निचली अदालत से नहीं मिली थी राहत:
मंसूर अंसारी ने बताया कि कुर्की के बाद उन्होंने पहले गाजीपुर (Ghazipur) की निचली अदालत में गुहार लगाई थी, लेकिन वहां उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) का रुख किया, जहां से उन्हें सकारात्मक फैसला मिला। इस फैसले के बाद अब दुकानों के फिर से संचालन की उम्मीद जताई जा रही है।
आगे की कार्रवाई पर प्रशासन का रुख:
जिलाधिकारी (District Magistrate) से मुलाकात के बाद मंसूर अंसारी को यह भरोसा मिला है कि कोर्ट के आदेश का परीक्षण करने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन कितनी जल्दी इस आदेश को लागू करता है और दुकानों को औपचारिक रूप से रिलीज किया जाता है।
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गाज़ीपुर ब्यूरो: हसीन अंसारी