भारत में सड़क हादसों में घायल लोगों को तेजी से अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से एक नई पहल चर्चा में है। सड़क सुरक्षा को लेकर लंबे समय से अभियान चला रहे हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार (Raghvendra Kumar) ने दावा किया है कि आने वाले समय में सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को मात्र एक रुपये में हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। इस योजना को उन्होंने “संजीवनी बूटी मिशन” नाम दिया है। इस पहल का पायलट प्रोजेक्ट वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
तीन हेलीकॉप्टर के साथ शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट:
हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार (Raghvendra Kumar) के अनुसार इस मिशन की शुरुआत तीन हेलीकॉप्टर एंबुलेंस के साथ की जाएगी। उन्होंने बताया कि सड़क हादसों में घायल लोगों को गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुंचाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। उनका कहना है कि समय पर इलाज मिलने से हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि एक हेलीकॉप्टर का एक वर्ष का लीज खर्च करीब 7 करोड़ रुपये है, जिसमें फ्यूल और स्टाफ का खर्च भी शामिल रहेगा। इस हिसाब से तीन हेलीकॉप्टर के लिए सालाना लगभग 21 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

एक रुपये सर्विस शुल्क का प्रस्ताव:
राघवेंद्र कुमार (Raghvendra Kumar) ने इस योजना के लिए एक विशेष फंडिंग मॉडल भी तैयार किया है। उनके अनुसार यदि एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन से सिर्फ एक रुपये का सर्विस शुल्क लिया जाए, तो हर महीने करीब 3 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। इस तरह सालभर में लगभग 36 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि बची हुई धनराशि से अस्पतालों और एक्सप्रेसवे के सर्विस रोड पर कार एंबुलेंस की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।
Air India और अधिकारियों के साथ हुई बैठक:
हाल ही में हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार (Raghvendra Kumar) ने गुरुग्राम (Gurugram) स्थित वाटिका (Vatika) में एयर इंडिया (Air India) और टाटा (Tata) समूह के अधिकारियों के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर बैठक की। इस दौरान एयर इंडिया (Air India) के सीईओ कैंपबेल विल्सन (Campbell Wilson) ने उन्हें सम्मानित भी किया। बैठक में राघवेंद्र कुमार ने अपने विजन को “H3 फॉर्मूला” के जरिए प्रस्तुत किया, जिसका अर्थ हेलीकॉप्टर, हाईवे और हॉस्पिटल बताया गया। उन्होंने इस योजना का ब्लूप्रिंट एक हेलमेट पर भी तैयार किया था।
विदेशी कंपनियों और अस्पतालों की रुचि:
इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ विदेशी कंपनियों ने भी अपने प्रस्ताव भेजे हैं। वहीं दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) से जुड़े एक्सप्रेसवे के आसपास स्थित कई अस्पताल अपने यहां हेलीपैड बनाने की तैयारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस मिशन को लेकर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) से भी जल्द मुलाकात की जा सकती है। इस अभियान में भारतीय सेना (Indian Army) के सहयोग की भी बात कही गई है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों की बड़ी चुनौती:
यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर बीते वर्षों में कई बड़े सड़क हादसे सामने आए हैं, जिनमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इनमें पुलिस और भारतीय सेना (Indian Army) के जवान भी शामिल बताए गए हैं। सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। केंद्र सरकार का भी मानना है कि यदि घायल व्यक्ति को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है।
हेलमेट मैन का सड़क सुरक्षा अभियान:
राघवेंद्र कुमार (Raghvendra Kumar) पिछले 12 वर्षों से सड़क सुरक्षा को लेकर अभियान चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में नोएडा एक्सप्रेसवे (Noida Expressway) पर उनके मित्र कृष्णा (Krishna) की हेलमेट न पहनने के कारण सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसी घटना के बाद उन्होंने सड़क सुरक्षा जागरूकता का अभियान शुरू किया। अब तक वे भारत के 22 राज्यों में जाकर 75 हजार से अधिक हेलमेट बांट चुके हैं। उनका कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम किए बिना भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में पूरी तरह आगे नहीं बढ़ सकता।
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