उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस (Congress) के कुछ नेता बसपा (BSP) प्रमुख मायावती (Mayawati) से मुलाकात करने उनके आवास पहुंच गए। हालांकि यह मुलाकात नहीं हो सकी और नेताओं को गेट से ही लौटना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेताओं की यह कोशिश राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।
गेट से लौटे कांग्रेस नेता:
19 मई को लखनऊ (Lucknow) स्थित कांग्रेस मुख्यालय में अनुसूचित जाति विभाग की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के बाद कांग्रेस अनुसूचित जाति (SC) विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम (Rajendra Pal Gautam), बाराबंकी (Barabanki) से सांसद तनुज पुनिया (Tanuj Punia) समेत अन्य नेता मायावती (Mayawati) के आवास पहुंच गए। वहां सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से मायावती के निजी सचिव मेवालाल गौतम (Mewalal Gautam) से संपर्क कर मुलाकात का समय मांगा गया।
सूत्रों के अनुसार करीब 10 मिनट तक इंतजार करने के बाद अंदर से संदेश आया कि मायावती फिलहाल व्यस्त हैं और मुलाकात संभव नहीं हो पाएगी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कराया और वापस लौट गए। इस दौरान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं।
गठबंधन की अटकलों ने पकड़ा जोर:
कांग्रेस नेताओं के मायावती (Mayawati) से मिलने की कोशिश के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party – SP) से अलग होकर बसपा (BSP) के साथ गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। इसी दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भी रायबरेली (Raebareli) दौरे पर थे, जिसके बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस नेताओं का यह दौरा किसी राजनीतिक संदेश से जुड़ा हो सकता है।
दोनों नेताओं का बसपा से जुड़ाव:
मायावती से मिलने पहुंचे नेताओं का राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में रही। राजेंद्र पाल गौतम (Rajendra Pal Gautam) पहले बसपा (BSP) से जुड़े रहे हैं। बाद में वे आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party – AAP) और फिर कांग्रेस (Congress) में शामिल हुए। वहीं सांसद तनुज पुनिया (Tanuj Punia), कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया (PL Punia) के बेटे हैं। पीएल पुनिया उस समय मायावती सरकार में प्रमुख सचिव रह चुके हैं, जब मायावती मुख्यमंत्री थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन पुराने संबंधों के कारण इस मुलाकात की कोशिश को सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा है। इसे संभावित राजनीतिक रणनीति और गठबंधन की दिशा में एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा और कांग्रेस के रिश्तों पर चर्चा:
राजनीतिक चर्चाओं के बीच समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के हालिया बयान भी चर्चा में हैं। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कहा था कि सीटों का बंटवारा जीत की संभावना के आधार पर किया जाएगा। इसे लेकर कांग्रेस (Congress) के भीतर भी असंतोष की चर्चा सामने आने लगी।
सहारनपुर (Saharanpur) से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Imran Masood) ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सीटें ही नहीं मिलेंगी तो जीत कैसे होगी। उन्होंने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के चुनावी परिणामों का जिक्र करते हुए रणनीतिक चुनावी तालमेल की जरूरत बताई। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी का नाम नहीं लिया।
कांग्रेस ने किया डैमेज कंट्रोल:
मायावती (Mayawati) से मुलाकात न हो पाने और बढ़ती राजनीतिक चर्चाओं के बाद कांग्रेस (Congress) की ओर से सफाई भी सामने आई। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय (Ajay Rai) ने कहा कि यह नेताओं का व्यक्तिगत कार्यक्रम था और पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक निर्देश नहीं दिया गया था। वहीं राजेंद्र पाल गौतम (Rajendra Pal Gautam) और तनुज पुनिया (Tanuj Punia) ने भी इसे सामान्य मुलाकात और हालचाल पूछने की कोशिश बताया।
सपा की बढ़ी सतर्कता:
इस पूरे घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी (SP) भी सतर्क नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के कुछ घटनाक्रमों के बाद सपा नेतृत्व कांग्रेस की गतिविधियों पर करीब से नजर बनाए हुए है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर अपनी बात रखी, जिसे राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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