रिपोर्टर: अंकित दुबे
विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर मानव सेवा समिति द्वारा एक विशेष सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें औढारी सिखड़ी स्थित एस.के. रूंगटा स्पेशल स्कूल (S.K. Roongta Special School) के सौजन्य से दर्जनों दिव्यांगजन को कृत्रिम पैर लगाए गए। कार्यक्रम ने न सिर्फ लाभार्थियों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार किया, बल्कि समाज को दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और आत्मनिर्भरता के महत्व का संदेश भी दिया। कार्यक्रम का संचालन समिति के प्रबंधक रमेश यादव की देखरेख में हुआ, जिसमें दिव्यांगजन और उनके परिवारजनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

विश्व दिव्यांग दिवस का उद्देश्य समझाया गया:
कार्यक्रम के दौरान मौजूद बच्चों और दिव्यांगजनों को विश्व दिव्यांग दिवस के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। यह समझाया गया कि यह दिवस क्यों मनाया जाता है, इसका मूल उद्देश्य क्या है और समाज के हर वर्ग को दिव्यांगजनों के अधिकारों व सम्मान को लेकर जागरूक होना क्यों जरूरी है। आयोजन में उपस्थित लोगों ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
समिति द्वारा किए जा रहे प्रयास:
कार्यक्रम का संचालन देख रहे प्रबंधक रमेश यादव ने बताया कि मानव सेवा समिति अब तक लगभग 150 लोगों को हाथ और पैर लगा चुकी है। उन्होंने कहा कि इन सेवा कार्यक्रमों से दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कई लोगों ने कृत्रिम अंग लगने के बाद अपनी दिनचर्या को पहले की तरह शुरू किया है और वे अब अधिक आत्मविश्वास के साथ जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समिति की ओर से सेवा गतिविधियाँ आगामी समय में भी इसी तरह निरंतर जारी रहेंगी।
लाभार्थियों में उत्साह और खुशी:
कार्यक्रम में आए कई दिव्यांगजन कृत्रिम पैर लगने के बाद बेहद खुश नजर आए। कुछ लाभार्थियों ने बताया कि नए पैर लगने से उन्हें चलने-फिरने में काफी आसानी हो रही है। लंबे समय से शारीरिक कठिनाइयों का सामना कर रहे कुछ लोग भावुक भी हो उठे, क्योंकि उन्हें एक बार फिर आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। वहीं, मौके पर मौजूद परिवारजन भी मानव सेवा समिति के इस प्रयास की सराहना करते दिखाई दिए।
समाज के लिए प्रेरक पहल:
यह कार्यक्रम समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत भी बनकर उभरा। दिव्यांगजनों की मदद के लिए इस प्रकार की सेवा गतिविधियाँ न सिर्फ उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती हैं, बल्कि समाज को भी यह संदेश देती हैं कि संवेदनशीलता और सहयोग ही एक बेहतर और समावेशी समाज की पहचान है। मानव सेवा समिति के इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित किया कि सेवा ही सच्चा धर्म है और हर छोटे प्रयास से किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
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