यूपी की महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! मिलेंगे 50 हजार रुपये, चुनाव से पहले आएगी पहली किस्त
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधने के लिए योगी सरकार एक बड़ी आर्थिक सहायता योजना लागू करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत महिलाओं को कुल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की तैयारी है। योजना को लेकर सरकार के स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। प्रस्ताव के मुताबिक चुनाव से पहले महिलाओं को 20 हजार रुपये की पहली किस्त दी जा सकती है। इसके बाद भाजपा की सरकार बनने पर 10-10 हजार रुपये की तीन और किस्तें देने का विचार है।
बताया जा रहा है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ उन्हें स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ना है। इसके लिए महिला कल्याण विभाग के माध्यम से योजना प्रस्तावित की जा सकती है। हालांकि, अभी यह योजना विचार के स्तर पर है और इसके अंतिम स्वरूप को लेकर मंथन जारी है।
महिला वोटबैंक पर सरकार की नजर:
योगी सरकार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। इसी बीच महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता से जुड़ी योजना पर विचार किया जा रहा है। सरकार की सोच है कि महिलाओं को सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
प्रस्तावित योजना में महिलाओं को 50 हजार रुपये तक की सहायता देने पर विचार किया जा रहा है। चुनाव से पहले 20 हजार रुपये की पहली किस्त देने और चुनाव के बाद सरकार बनने की स्थिति में 10-10 हजार रुपये की तीन किस्तें देने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।
गरीब और कमजोर परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता:
योजना के संभावित लाभार्थियों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों की महिलाओं के साथ गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को भी योजना में शामिल किया जा सकता है।
प्रस्ताव के अनुसार ऐसे परिवारों की महिलाओं को पात्रता के दायरे में लाने पर विचार हो सकता है, जिनकी सालाना आय 12 लाख रुपये से अधिक नहीं है। हालांकि, योजना की पात्रता और अन्य शर्तों को लेकर अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर होना बाकी है।
बिहार के मॉडल से मिली योजना की दिशा:
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और एनडीए को बड़ी जीत मिली थी। वहां चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भेजी गई थी। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित योजना को भी इसी तरह की पहल से जोड़कर देखा जा रहा है।
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना लागू की थी। इसका उद्देश्य हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार से जोड़ना था। चुनाव से पहले हर परिवार की एक महिला को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई थी। रोजगार शुरू होने के बाद उसके काम का आकलन किए जाने और आगे काम बढ़ाने के लिए अधिकतम दो लाख रुपये तक की सहायता देने की व्यवस्था बताई गई थी।
बिहार में 25 लाख महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए थे। इसके लिए करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए गए। विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया। राजनीतिक विश्लेषकों ने इस जीत में महिलाओं के समर्थन और आर्थिक सहायता की योजना को महत्वपूर्ण माना।
महिलाओं को गेमचेंजर मान रही भाजपा:
सरकार से जुड़े लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं के लिए नकद आर्थिक सहायता की योजना विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं का उदाहरण सामने रखते हुए उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की योजना पर विचार किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्रनाथ भट्ट का मानना है कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का चुनावी लाभ मिला। उनके अनुसार यदि उत्तर प्रदेश में भी इस तरह की योजना लागू होती है तो इसका असर चुनाव पर पड़ सकता है। प्रदेश में बड़ी संख्या में महिला मतदाता हैं, ऐसे में महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता मिलने का चुनावी प्रभाव होने की संभावना जताई जा रही है।
यूपी में महिलाओं के समर्थन पर दांव:
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली बड़ी जीत के बाद उत्तर प्रदेश में भी महिला मतदाताओं की भूमिका को अहम माना जा रहा है। भाजपा के नेता, सरकार के मंत्री और राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि महिलाओं का समर्थन चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
इसी वजह से मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना, महाराष्ट्र की सीएम माझी बहन लड़की और हरियाणा की दीनदयाल लाडो लक्ष्मी जैसी योजनाओं के बाद उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं और बेटियों को केंद्र में रखकर योजना तैयार करने पर विचार हो रहा है।
मिशन 2027 की चुनौती बढ़ी:
हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में भाजपा-एनडीए की जीत के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने और भाजपा सरकार के लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। इसके बावजूद बिहार में आए चुनावी नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश में भी बड़ी जीत हासिल करने को लेकर दबाव बढ़ा है।
विधानसभा चुनाव का आगाज जनवरी 2027 के पहले सप्ताह तक होने की बात कही गई है। ऐसे में महिलाओं से जुड़ी योजना को जल्द आगे बढ़ाने की तैयारी के रूप में इसे देखा जा रहा है।
स्वरोजगार से पहले से जुड़ी हैं लाखों महिलाएं:
उत्तर प्रदेश में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन चल रहा है। इसके तहत 10-10 महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का काम किया जाता है। समूहों को सरकार की ओर से सब्सिडी पर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में इस समय 8,99,398 परिवारों की 98,76,389 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। ऐसे में प्रस्तावित आर्थिक सहायता योजना को महिलाओं के स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ने की दिशा में एक और पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा के पीडीए की काट की कोशिश:
भाजपा के नेताओं का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को बड़ी आर्थिक सहायता देने की योजना समाजवादी पार्टी के पीडीए मुद्दे की काट बन सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए मुद्दे का प्रभाव देखने को मिला था। उस चुनाव में भाजपा की सीटें 64 से घटकर 34 रह गई थीं।
लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी स्थिति को लेकर अपनी बात रखी थी। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा महिला मतदाताओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करती नजर आ रही है।
एक महिला से परिवार तक पहुंचने की रणनीति:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिवार की एक महिला को आर्थिक सहायता मिलने का असर पूरे परिवार के राजनीतिक रुझान पर पड़ सकता है। इसी सोच के आधार पर महिला मतदाताओं को सीधे आर्थिक लाभ देने वाली योजनाओं को चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में महिला मतदाता हैं। ऐसे में प्रस्तावित 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता योजना यदि लागू होती है तो महिला मतदाताओं के बीच इसका प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल सरकार के स्तर पर योजना को लेकर मंथन जारी है और इसके अंतिम स्वरूप का इंतजार है।
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