ब्यूरो डेस्क। कोरोना वायरस से रोकथाम हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कड़ा फैसला लिया कि पूरा देश 21 दिन के लिए लॉकडाउन रहेगा। पीएम मोदी के इस फैसले से कई खबरें आयीं कि लाखों की संख्या में देहाड़ी मजदूर और गरीब बड़े शहरो से अपने घरों की और जाने लगे हैं। ट्रांसपोर्ट की कोई सुविधा नहीं, वो भूखे प्यासे हैं। चूँकि उम्मीद है कि बुद्धिजीवी वर्ग ये समझ सकता है कि उनके अंदर जागरूकता की कितनी कमी होगी और कहीं न कहीं सरकार की व्यवस्था में कमी रह गई। लेकिन फिर भी ये समझना जरुरी है और हम अपील भी करते हैं कि यदि कोरोना महामारी को हराना है तो घरों में रहना है और सोशल डिस्टेंस मेंटेन करना है।
#MannKiBaat begins with an important message by PM @narendramodi. pic.twitter.com/ZmrgbPpNN6
— PMO India (@PMOIndia) March 29, 2020
ऐसी नागरिकों को परेशान देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से क्षमा माँगा, उन्होंने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में कहा कि “सबसे पहले मैं सभी देशवासियों से क्षमा मांगता हूँ। और मेरी आत्मा कहती है की आप मुझे जरुर क्षमा करेंगे क्योंकि कुछ ऐसे निर्णय लेने पड़े हैं जिसकी वजह से आपको कई तरह की कठिनाईयां उठानी पड़ रही हैं।”
भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को सामने आया था। कोरोना वायरस का ये पहला मामला दक्षिण भारतीय राज्य केरल से सामने आया था। भारत में इस वायरस का पहला शिकार 20 साल की एक युवती थी। कोरोना पॉजिटिव पाए जाने से पहले 25 जनवरी 2020 को ही वह चीन के वुहान शहर से वापस लौटी थी, जहां से इस खतरनाक वायरस की शुरूआत हुई है। युवती तीन साल से वुहान में चिकित्सा की पढ़ाई कर रही है। वुहान में 31 दिसंबर 2019 को कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया था।
One positive case of Novel Coronavirus has been found, in Kerala. The student was studying at Wuhan University in China. The patient is stable and is being closely monitored. #coronavirus pic.twitter.com/fDlME0UdRR
— ANI (@ANI) January 30, 2020
जब 30 जनवरी को देश में पहला कोरोना पॉजिटिव केस आ चूका था तो जरा सोचिये उस समय हमारे देश में क्या महत्वपूर्ण खबर चल रही थी। WHO यानि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने सभी देशों को सलाह दिया था कि ये वायरस को रोकना जरुरी है, ये इंसान से इंसान में फैलता है।
The increased number of new #coronavirus in 🇨🇳 & internationally is concerning. @DrTedros decided to reconvene the Emergency Committee to advise him whether the outbreak represents Public Health Emergency of International Concern & to seek their advice on how to keep the 🌍 safe. pic.twitter.com/m3nxsJdqgw
— World Health Organization (WHO) (@WHO) January 29, 2020
WHO यानि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने कई बार सभी देशों को चेताया। इसमें भारत महत्वपूर्ण इसीलिए है, क्योंकि भारत में 30 जनवरी 2020 को पहला केस सामने आया था, और जब ये जानकारी सामने आ चुकी थी कि ये वायरस यदि किसी इंसान को अपने पकड़ में ले चूका है तो उस इंसान से दूसरे इंसान में आसानी से कुछ सेकंड में जा सकता है और पूरी तरह से मोटी भाषा में छुआ छूट की बीमारी है, तो फिर भारत में बिना सुरक्षा व्यवस्था के लोग कैसे आ गए और भारत क्या कर रहा था?
30 जनवरी से 29 फरवरी तक तमाम अख़बारों और न्यूज़ चैनल्स की हेड लाइन क्या थी ? अगर आप थोड़ा चेक करने की कोशिश करेंगे तो पता चलेगा कि नागरिकता संसोधन कानून, दिल्ली चुनाव और दिल्ली दंगा जैसे खबरें टॉप पर थी। जबकि 10 मार्च को देश में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या लगभग 44 पहुँच चुकी थी। लेकिन उस समय भी मध्य प्रदेश की राजनितिक गर्माहट से सोशल मीडिया, न्यूज़ चैनल और अखबार भरे हुए थे। इस बीच तमाम नेताओं और सोशल मीडिया के धुरधरों की तरफ कोरोना की चर्चाएं शायद ही नज़र आयीं।
भारत सरकार के पास तमाम एजेंसीज हैं, व्यवस्था है, एक्सपर्ट हैं तो फिर कैसे देश में कोरोना वायरस ने पैर पसार लिया? क्या सरकारी तंत्र और बुद्धिजीविओं की लापरवाही से आज देश में कोरोना ने पैर पसार लिया।
क्या समय रहते एयरपोर्ट को पर स्क्रीनिंग नहीं की गई? यदि ये वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है तो इसे समय रहते रोका क्यों नहीं गया? क्यों संक्रमित लोगों को अपने घर जाने दिया गया? क्या कुछ प्रवासी भारतियों के लिए देश के करोङो नागरिकों की सुरक्षा के साथ लापरवाही हुई ?
कुछ बुद्दिजीवी कहते हैं “ये पता नहीं था कि ये इस तरह से फ़ैल जायेगा” . ये जबाब लापरवाही से भरा हुआ है। हम सरकार पर भरोसा क्यों करते हैं ? सरकार के पास इतने तंत्र हैं कि ऐसे जबाब नहीं दिए जा सकते।
खैर इस वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन जरुरी है। और इसका पालन तमाम नागरिकों को करना भी होगा, तभी वो इस वायरस से बच सकते हैं।
आज हमारे देश में गरीबों और काम पढ़े लिखे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है और इन्ही की मासूमियत से ये नेता चुनाव में वोट लेते हैं। इनको बसों में बैठाकर रैलियों में लाया जाता है। आज ये गरीब भूख और प्यास से मरने को मजबूर हैं, इन्हे नहीं पता कि कोरोना वायरस से वाकई में क्या नुकसान है। क्या इन्हे समय रहते जागरूक नहीं किया जा सकता था? जिस युद्ध स्तर आज सरकार के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं, क्या ऐसे कार्यक्रम जनवरी से नहीं चलाये जा सकते थे?
आज चीन ने अपने वुहान शहर को कैद करके इसपर कंट्रोल कर लिया है। ये पुरे चीन में नहीं फ़ैल पाया। फिर भारत में एयरपोर्ट पर ही इसे क्यों नहीं रोका गया ? ऐसे कड़े निर्णय को समय रहते क्यों नहीं लिया गया?
वैसे हमारे देश में सबसे ज्यादा महत्त्व राजनीति को दिया जाता है। जनता नेता को भगवान् मान लेती है , चाहे वो नेता क्रिमिनल ही क्यों न हो।
अब तक जो हुआ, उसे फिलहाल छोड़ दीजिये और अंत हम आपसे यही निवेदन करते हैं। आज जरुरत है हमें घरों में रहने की , सफाई से रहने की , सोशल डिस्टेंस बनाकर रहने की ,तभी हम कोरोना वायरस को हरा सकते हैं। जय हिन्द।

