नोएडा (Noida) में श्रमिक आंदोलन को भड़काने के मामले में फरार चल रहे आदित्य आनंद (Aditya Anand) को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने तमिलनाडु (Tamil Nadu) से गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि आरोपी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसकी तलाश में नोएडा पुलिस (Noida Police) की छह टीमें लगातार कई राज्यों में दबिश दे रही थीं।
श्रमिक आंदोलन में उकसावे का आरोप:
जांच के अनुसार, आदित्य आनंद ने रूपेश राय (Rupesh Rai) और मनीषा (Manisha) के साथ मिलकर श्रमिकों को भड़काने की साजिश रची थी। इन तीनों ने 9 और 10 अप्रैल को कई व्हाट्सएप (WhatsApp) ग्रुप बनाए और श्रमिकों को एकत्र कर आंदोलन को उग्र बनाने का काम किया। थाना फेस-2 (Phase-2 Police Station) में इस मामले में केस दर्ज किया गया था और गौतमबुद्धनगर कोर्ट (Gautam Buddh Nagar Court) ने आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था।
डिजिटल साजिश और विदेशी लिंक का दावा:
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X, पूर्व Twitter) पर सक्रिय दो हैंडल @Proudindiannavi और @Mir_Ilyas_INC पाकिस्तान (Pakistan) से संचालित किए जा रहे थे। इन खातों से लगातार भ्रामक और भड़काऊ सामग्री पोस्ट की जा रही थी, जिससे गौतमबुद्धनगर में कानून-व्यवस्था (Law and Order) बिगाड़ने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह (Laxmi Singh) के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क वीपीएन (VPN) के जरिए संचालित हो रहा था ताकि वास्तविक लोकेशन छिपाई जा सके।
तकनीकी जांच में बड़े खुलासे:
जांच में यह भी सामने आया है कि यह डिजिटल नेटवर्क पिछले तीन महीनों से सक्रिय था। इससे जुड़े कई आईपी एड्रेस पाकिस्तान से जुड़े पाए गए हैं। अब पुलिस इस पूरे मामले का बैक डेटा खंगालकर डिजिटल साजिश की परतें खोलने में जुटी हुई है।
रेलवे स्टेशन से गिरफ्तारी:
आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन (Tiruchirappalli Railway Station) से गिरफ्तार किया गया। पुलिस टीमों ने उसे पकड़ने के लिए कई राज्यों में लगातार छापेमारी की और सर्विलांस की मदद ली। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और आंदोलन के दौरान नोएडा में सक्रिय रूप से मौजूद था। आरोपी ने कथित रूप से QR कोड के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए और प्रदर्शनकारियों को उनसे जोड़ा।
श्रमिक आंदोलन का विस्तार और हिंसा:
नोएडा में 9 अप्रैल से शुरू हुआ यह श्रमिक आंदोलन धीरे-धीरे कई औद्योगिक क्षेत्रों में फैल गया। 13 अप्रैल को हालात बिगड़ने पर हिंसा भड़क उठी, जिसमें भीड़ ने ईंट-पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं कीं। पुलिस ने अब तक 63 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
फेज-2 से शुरू हुआ प्रदर्शन सेक्टर-57, सेक्टर-40, सेक्टर-60, सेक्टर-85, सेक्टर-1, सेक्टर-15 और सेक्टर-62 तक फैल गया था। प्रदर्शनकारियों ने कई फैक्ट्रियों और दफ्तरों में तोड़फोड़ की और डिक्सन कंपनी (Dixon Company) के गेट को भी क्षतिग्रस्त किया।
पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था:
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पीएसी (PAC) की तैनाती की गई। लगभग 200 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया और 60 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। ड्रोन और सीसीटीवी (CCTV) के माध्यम से निगरानी की गई। करीब 15 कंपनियों की पीएसी और 26 वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए।
सरकारी प्रतिक्रिया और सैलरी बढ़ोतरी:
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। सरकार ने कहा था कि औद्योगिक अशांति फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि श्रमिकों के हित सुरक्षित रखे जाएंगे। इसके बाद सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दरों में 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा की, जो 1 अप्रैल से लागू कर दी गई।
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