राहुल पर FIR का अपना आदेश हाईकोर्ट जज ने बदला:बिना नोटिस केस दर्ज करना सही नहीं माना; याचिकाकर्ता बोला- CJI से शिकायत करेंगे

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच (Lucknow Bench) ने सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से जुड़े एक अहम मामले में अपना पहले दिया गया आदेश बदल दिया है। यह मामला कथित दोहरी नागरिकता के आरोपों से संबंधित है। कोर्ट ने शनिवार को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर संशोधित आदेश जारी करते हुए इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ ला दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

सुनवाई और प्रारंभिक आदेश:
मामले की सुनवाई शुक्रवार (17 अप्रैल) को हुई थी, जिसमें याचिकाकर्ता सहित केंद्र सरकार (Central Government) और उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) के वकील भी उपस्थित थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों से यह पूछा था कि क्या राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की आवश्यकता है या नहीं। उस समय सभी वकीलों की ओर से नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं बताई गई थी। इसके बाद अदालत ने FIR दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया था।

आदेश में बदलाव की वजह:
हालांकि, आदेश टाइप होने से पहले न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी (Justice Subhash Vidyarthi) ने पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की। पुराने मामलों और कानूनी प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद यह पाया गया कि ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष को नोटिस जारी करना आवश्यक होता है। इसके बाद अदालत ने माना कि बिना नोटिस दिए FIR दर्ज करने का आदेश देना उचित नहीं होगा, और इसी आधार पर पहले दिए गए आदेश को संशोधित कर दिया गया।

अगली सुनवाई की तारीख:
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की है। अब इस सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी और क्या वास्तव में FIR दर्ज करने की आवश्यकता बनती है या नहीं।

याचिका और आरोप:
यह याचिका कर्नाटक (Karnataka) निवासी भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर (S. Vignesh Shishir) द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता (British Citizenship) भी रही है। इसी आधार पर विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) और पासपोर्ट अधिनियम (Passport Act) के तहत केस दर्ज करने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता की प्रतिक्रिया:
कोर्ट के संशोधित आदेश के बाद याचिकाकर्ता विग्नेश ने कहा है कि राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने के पहले आदेश को वापस लेने के खिलाफ वह भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) से शिकायत करेंगे।

पिछली कार्यवाही और जांच प्रक्रिया:
इससे पहले शुक्रवार को कोर्ट ने FIR दर्ज कर मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया था। वहीं, सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के फॉरेनर्स डिवीजन को संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। मंत्रालय ने सभी आवश्यक फाइलें अदालत में जमा की थीं।

याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि राहुल गांधी यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं और वहां चुनाव प्रक्रिया में भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड भी मौजूद हैं।

मामले का पिछला कानूनी इतिहास:
यह मामला पहले रायबरेली (Raebareli) स्थित विशेष MP-MLA कोर्ट में दायर किया गया था। बाद में इसे 17 दिसंबर, 2025 को हाईकोर्ट के आदेश पर लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद MP-MLA कोर्ट ने 28 जनवरी, 2026 को याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट का पूर्व निर्णय:
इससे पहले 2019 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भी राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि केवल किसी दस्तावेज या कंपनी के उल्लेख के आधार पर नागरिकता तय नहीं की जा सकती।


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