वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शुक्रवार को छात्रों ने स्पेशल बैक पेपर के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा केवल पांचवें और छठवें सेमेस्टर के लिए स्पेशल बैक परीक्षा का शेड्यूल जारी होते ही छात्र नाराज हो गए। गुस्साए छात्रों ने परीक्षा कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और दफ्तर में तालाबंदी कर दी। उनकी मांग है कि या तो यह व्यवस्था सभी सेमेस्टर के लिए लागू की जाए या फिर इसे पूरी तरह निरस्त किया जाए।
छात्रों ने लगाया पक्षपात का आरोप
प्रदर्शन कर रहे एलएलएम चौथे सेमेस्टर के छात्र गौरव कुमार पटेल ने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने कहा कि छह महीने पहले हुए बैक पेपर का रिजल्ट अब तक जारी नहीं हुआ है, फिर भी विश्वविद्यालय अचानक स्पेशल बैक करा रहा है। गौरव ने यह भी आरोप लगाया कि यह फैसला ABVP के एक छात्र को पास कराने के लिए लिया गया है, जबकि वास्तव में जरूरत सभी छात्रों की है।
“पहली बार देख रहे स्पेशल बैक”
छात्र शशांक शेखर सिंह ने कहा कि वह 2015 से विश्वविद्यालय से जुड़े हैं और इस तरह का स्पेशल बैक पहली बार हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारी दलालों के साथ मिलकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। शशांक ने यह भी मांग रखी कि जब तक पिछले बैक पेपर का परिणाम घोषित नहीं होता, तब तक स्पेशल बैक परीक्षा नहीं कराई जानी चाहिए।
विश्वविद्यालय का पक्ष
वहीं, इस विवाद पर विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर डॉ. केके सिंह ने सफाई दी। उन्होंने बताया कि पांचवें और छठवें सेमेस्टर के कई छात्रों को बेहद कम अंक मिले हैं, जिसकी वजह से वे पीजी में दाखिला नहीं ले पा रहे थे। ऐसे में परीक्षा समिति ने छात्रहित को देखते हुए स्पेशल बैक परीक्षा का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि कुछ छात्र इसे गलत समझकर विरोध कर रहे हैं, लेकिन यह कदम बड़ी संख्या में छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।
इस पूरे विवाद ने काशी विद्यापीठ परिसर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। फिलहाल छात्र धरने पर डटे हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन भी अपने फैसले पर कायम है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच टकराव का यह मामला किस रूप में सुलझता है।
काशी विद्यापीठ में छात्रों का हंगामा, स्पेशल बैक परीक्षा पर बवाल