अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। करीब 9 हजार सैनिकों के साथ अमेरिका अपना युद्धपोत थियोडोर रूजवेल्ट भी क्षेत्र में भेज रहा है। फिलहाल यूएसएस जॉर्ज डब्ल्यू बुश और यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन पहले से वहां मौजूद हैं। रूजवेल्ट की तैनाती के बाद अक्टूबर के अंत तक मध्य पूर्व में तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत हो जाएंगे।
अमेरिकी सेना को ट्रम्प के आदेश का इंतजार:
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ईरान पर नए हमलों की चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर हमले की बात कही थी। इससे पहले उन्होंने ईरान के संघर्षविराम प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया था।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, नवंबर के अंत तक ईरान के आसपास अमेरिका के तीन युद्धपोत और दो मरीन इकाइयां तैनात हो सकती हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने कहा है कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश देते हैं तो अमेरिकी सेना इसके लिए तैयार है।
ट्रम्प ने ईरान का संघर्षविराम प्रस्ताव ठुकराया:
ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने ईरान के हालिया संघर्षविराम प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश की थी, लेकिन ट्रम्प के मुताबिक यह प्रस्ताव अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा था कि 3 नवंबर के चुनाव के बाद ईरान पर बमबारी बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कहा था कि यदि वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं।
अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना उसके सैन्य अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। दूसरी ओर, ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए रखा था सात दिन का प्रस्ताव:
ईरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और धन पर लगी रोक हटाने तथा अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है।
उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी संघर्षविराम के लिए हुए समझौता ज्ञापन जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमले किए जाने के बाद वह समझौता टूट गया था।
28 फरवरी से चल रहा अमेरिका-ईरान संघर्ष:
अमेरिका और इजराइल (Israel) ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है।
अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व में सैन्य तैनाती बढ़ाए जाने और ईरान के संघर्षविराम प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव का मुद्दा फिर चर्चा में है। इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की पेशकश की थी, जबकि अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी चिंताएं और मांगें रखी गई हैं।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
#Tag: #USIran #IranWar #MiddleEast #DonaldTrump