यूपी के 10 शहरों में कोहरा, दिवाली पर ठिठुरन बढ़ेगी:सड़कों में 10 मीटर दूर देखना मुश्किल; नोएडा-गाजियाबाद की हवा खराब
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। सुबह और शाम के समय हल्की ठिठुरन महसूस होने लगी है, वहीं प्रदेश के कई जिलों में कोहरे का असर भी दिखाई देने लगा है। गुरुवार सुबह लखनऊ (Lucknow), संभल (Sambhal), श्रावस्ती (Shravasti) और देवरिया (Deoria) समेत करीब 10 शहरों में कोहरा छाया रहा। श्रावस्ती में दृश्यता 10 मीटर से भी कम रह गई, जिससे सड़कों पर कुछ दूरी तक देख पाना मुश्किल हो गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दिवाली वाले सप्ताह में प्रदेश में ठंड और बढ़ने के आसार हैं। दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एनसीआर (NCR) क्षेत्र में वायु प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार पहुंच गया है, जबकि गाजियाबाद, हापुड़ और बागपत की हवा भी रेड जोन में दर्ज की गई है।
दिवाली वाले सप्ताह में और बढ़ेगी ठिठुरन:
वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक, दिवाली वाले सप्ताह में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। सुबह के समय कोहरा बना रह सकता है, जबकि सुबह और शाम की ठंडक में भी इजाफा होगा। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण आने वाले दिनों में प्रदेश के लोगों को ठंड का अधिक एहसास हो सकता है।
गुरुवार सुबह कई जिलों में कोहरे की चादर दिखाई दी। श्रावस्ती में दृश्यता 10 मीटर से भी कम होने के कारण सड़क पर आवागमन करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कोहरे के इस प्रभाव को देखते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
एनसीआर के चार जिलों में प्रदूषण का गंभीर असर, ग्रेप-2 लागू:
दिवाली से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एनसीआर से जुड़े जिलों में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक हो गई है। नोएडा में एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया है। वहीं गाजियाबाद, हापुड़ और बागपत की हवा भी रेड जोन में दर्ज की गई है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-2) लागू किया गया है।
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नगर निगम की ओर से सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने के साथ धूल उड़ने वाले स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा डीजल से चलने वाले जनरेटरों पर पाबंदी लगाई गई है। होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट के तंदूर में कोयला और लकड़ी जलाने पर भी रोक लगाई गई है। तारकोल से सड़क निर्माण जैसे प्रदूषण बढ़ाने वाले कार्यों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रयागराज में दिन और हरदोई में रात सबसे ठंडी:
4 नवंबर को दर्ज तापमान के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अधिकतम तापमान प्रयागराज में 32.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बहराइच 32.4 डिग्री के साथ दूसरे और वाराणसी 32.2 डिग्री सेल्सियस के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
वहीं न्यूनतम तापमान के मामले में हरदोई सबसे ठंडा जिला रहा। यहां रात का पारा 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मुजफ्फरनगर और इटावा में न्यूनतम तापमान 15 डिग्री रहा, जबकि बरेली और कानपुर में रात का तापमान 15.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
सीएम योगी ने फसल नुकसान पर तत्काल मुआवजे के दिए निर्देश:
उत्तर प्रदेश में 29 से 31 अक्टूबर तक अर्नब तूफान के कारण हुई लगातार बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से स्वयं फील्ड में जाकर फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराने को कहा है। साथ ही प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसानों के हित में विशेष पैकेज लाने की भी बात कही है, ताकि बारिश से प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई में सावधानी जरूरी:
नवंबर में बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। खासकर पूर्वांचल में गेहूं, चना, मटर और सरसों की बुवाई करते समय खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।
निचले खेतों में पानी जमा होने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। जिन खेतों में बारिश के कारण पहले से पर्याप्त नमी मौजूद है, वहां अनावश्यक सिंचाई करने से बचना चाहिए। किसानों को मौसम की स्थिति और मिट्टी में मौजूद नमी का आकलन करने के बाद ही बुवाई और सिंचाई का निर्णय लेना चाहिए।
ठंड और कोहरे में इन फसलों की करें विशेष निगरानी:
- गेहूं: शुरुआती बढ़वार के दौरान खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें। साथ ही जलभराव की स्थिति न बनने दें।
- सरसों: लगातार कोहरा और नमी रहने से सफेद रतुआ तथा अन्य फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में फसल की नियमित निगरानी करें।
- आलू: झुलसा रोग की आशंका को देखते हुए पत्तियों की जांच करते रहें। रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें।
- मटर और चना: अधिक नमी और जलभराव से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें।
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