कांग्रेस को उसकी जमीनी हकीकत बताएंगे अखिलेश:राहुल को सौंपेंगे 387 सीटों की रिपोर्ट, सिर्फ 12 सीटों पर बची थी जमानत
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और कांग्रेस (Congress) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। कांग्रेस की ओर से गठबंधन में 200 सीटों की मांग किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के पिछले चुनावी प्रदर्शन का आकलन कराने के लिए एक रिपोर्ट तैयार कराई है। इस रिपोर्ट में 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। सपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में उन 73 सीटों का जिक्र है, जहां कांग्रेस ने पांच हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। पार्टी का आकलन है कि इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस की सीटों की मांग पर विचार किया जाना चाहिए।
2022 में 399 सीटों पर चुनाव लड़कर मिले थे 2.33 प्रतिशत वोट:
सपा की ओर से तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 399 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। पार्टी को पूरे प्रदेश में 21.51 लाख वोट मिले थे, जो कुल मतों का महज 2.33 प्रतिशत था। कांग्रेस केवल 12 सीटों पर ही अपनी जमानत बचा सकी थी, जबकि 387 सीटों पर उसके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।
रिपोर्ट में कुल 73 सीटों को चार श्रेणियों में बांटकर कांग्रेस के प्रदर्शन का आकलन किया गया है। बताया गया है कि पार्टी ने इन्हीं सीटों पर पांच हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। इनमें भी कांग्रेस केवल चार सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। उस समय प्रदेश अध्यक्ष रहे अजय कुमार लल्लू और प्रदेश अध्यक्ष रह चुके अजय राय जैसे नेता भी अपने क्षेत्रों में तीसरे स्थान पर रहे थे।
73 सीटों में 14 पर सपा का कब्जा, दावेदारी पर पेच:
सपा की रिपोर्ट में शामिल 73 सीटों में से 14 पर 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इनमें से दो विधायक मौजूदा समय में पार्टी छोड़कर भाजपा के खेमे में जा चुके हैं। ऐसे में इन सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी को लेकर सपा के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौती हो सकती है।
पार्टी के लिए अपने मौजूदा विधायकों की सीटें छोड़ना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि इन 14 सीटों में से अधिकतर को कांग्रेस के खाते में देने की संभावना कम मानी जा रही है। इनमें रायबरेली और अमेठी की दो सीटें भी शामिल हैं, जहां सपा के विधायक पाला बदलकर भाजपा में जा चुके हैं। इन सीटों पर गठबंधन के तहत किसी तरह का समझौता हो सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने सपा को जो सीटों की सूची सौंपी है, उसमें रायबरेली, अमेठी और सहारनपुर की सभी 15 सीटों पर दावा जताया गया है। कांग्रेस की ओर से इन सीटों पर अपनी दावेदारी से पीछे नहीं हटने की बात कही गई है।
कांग्रेस केवल छह सीटों पर दिखा पाई थी मजबूत प्रदर्शन:
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कुछ ही सीटों पर बेहतर रहा था। पार्टी ने छह सीटों पर मुकाबले में अपनी मजबूत मौजूदगी दिखाई थी। इनमें रामपुर खास से आराधना मिश्रा मोना और महाराजगंज जिले की फरेंदा विधानसभा सीट से वीरेंद्र चौधरी ने जीत हासिल की थी।
मौजूदा समय में आराधना मिश्रा मोना कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष हैं, जबकि वीरेंद्र चौधरी कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता हैं। रामपुर खास में मोना को करीब 50 प्रतिशत और फरेंदा में वीरेंद्र चौधरी को लगभग 40 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों विजयी प्रत्याशियों को 84 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे। इन दोनों सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे।
चार सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी कांग्रेस:
सपा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल चार सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। इनमें जगदीशपुर सीट पर ही मुकाबला काफी करीबी रहा, जबकि बाकी सीटों पर हार का अंतर बड़ा था।
मथुरा सीट पर भाजपा प्रत्याशी को 1.58 लाख से अधिक वोट मिले थे। यहां कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, लेकिन उसके प्रत्याशी को करीब 49 हजार वोट ही मिल सके। इस तरह दोनों के बीच एक लाख से अधिक मतों का अंतर रहा। खेरागढ़ में भाजपा प्रत्याशी ने लगभग 36 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। किदवईनगर में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच करीब 38 हजार मतों का अंतर था। वहीं, जगदीशपुर में भाजपा प्रत्याशी को कांग्रेस उम्मीदवार से केवल 13 हजार अधिक वोट मिले थे।
लोकसभा चुनाव में 85 में से 39 सीटों पर मिली बढ़त:
समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन का भी विश्लेषण कराया है। उस चुनाव में कांग्रेस 17 लोकसभा सीटों पर मैदान में उतरी थी और उसे छह सीटों पर जीत मिली थी। इन 17 लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत विधानसभा की कुल 85 सीटें आती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस इनमें से केवल 39 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल कर सकी थी। इन 39 सीटों में भी 12 से अधिक सीटें समाजवादी पार्टी के कब्जे में थीं।
सपा का दावा है कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस को मिली बढ़त के पीछे उसका अपना वोट बैंक और संगठनात्मक आधार था। इसी वजह से पार्टी कांग्रेस से 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर सीटों की मांग कर रही है।
विशेषज्ञ बोले- गठबंधन टूटा तो कांग्रेस को होगा नुकसान:
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार का मानना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की ओर से 200 सीटों की मांग के पीछे ठोस आधार दिखाई नहीं देता। उनके मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी सफलता का पूरा श्रेय अकेले नहीं ले सकती।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़कर छह सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 62 सीटों पर चुनाव लड़कर 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा की सीटें पांच से बढ़कर 37 हो गईं, जिससे उसका प्रदर्शन कांग्रेस के मुकाबले बेहतर रहा।
राजेंद्र कुमार के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का संगठन कमजोर है और उसे मिली सीटों पर समाजवादी पार्टी के मजबूत कैडर तथा जमीनी पकड़ की भी भूमिका रही। उन्होंने प्रयागराज सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां से कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले उज्ज्वल रमण सिंह पहले समाजवादी पार्टी में थे। उनके पिता रेवती रमण सिंह भी सपा के बड़े नेता रहे हैं।
उनका कहना है कि अखिलेश यादव को प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों और अलग-अलग सीटों पर कांग्रेस की वास्तविक ताकत का अंदाजा है। ऐसे में जमीनी स्थिति को ध्यान में रखे बिना अधिक सीटों की मांग करना गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। राजेंद्र कुमार का मानना है कि यदि सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ता है और सपा-कांग्रेस का गठबंधन टूटता है, तो इसका सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है।
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