उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए दो नए राजकीय विश्वविद्यालयों की स्थापना का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय (Yogendra Upadhyay) ने सदन में उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया, जिसे पारित कर दिया गया। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों से प्रदेश में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा मिलेगी।

भदोही में काशी नरेश महाविद्यालय होगा विश्वविद्यालय:
प्रस्ताव के अनुसार भदोही (Bhadohi) जिले स्थित काशी नरेश स्नातकोत्तर महाविद्यालय को उन्नत कर विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाएगा। इस निर्णय से वर्तमान में संबद्ध 23 महाविद्यालयों को सीधा लाभ मिलेगा। हजारों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे और स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार होगा।
सरकार का मानना है कि विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने से न केवल पाठ्यक्रमों का विस्तार होगा, बल्कि शोध गतिविधियों और नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे क्षेत्रीय विद्यार्थियों को बड़े शहरों की ओर पलायन करने की आवश्यकता कम होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने जिले में ही उपलब्ध हो सकेगी।
शाहजहाँपुर में स्वामी सुखदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना:
दूसरे प्रस्ताव के तहत शाहजहाँपुर (Shahjahanpur) में मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट की शैक्षिक इकाइयों को उन्नत कर स्वामी सुखदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इस विश्वविद्यालय से 60 क्षेत्रीय महाविद्यालयों को संबद्धता मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय (Yogendra Upadhyay) ने सदन में कहा कि यह कदम प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक उच्च शिक्षा पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय बनने से शैक्षणिक ढांचे को मजबूती मिलेगी और विद्यार्थियों को विविध विषयों में अध्ययन का अवसर मिलेगा।
हर जिले में विश्वविद्यालय का लक्ष्य:
सरकार ने वर्ष 2017 के बाद से उच्च शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रत्येक जिले तक विश्वविद्यालय पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गुणवत्ता सुधार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अनुसंधान को बढ़ावा और कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
इन सुधारों के तहत पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण, डिजिटल संसाधनों के विस्तार और उद्योगों से समन्वय स्थापित करने जैसे कदमों पर भी बल दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन पहलों से प्रदेश के युवाओं को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
उच्च शिक्षा में नए अवसरों की उम्मीद:
दोनों विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित क्षेत्रों में शैक्षणिक वातावरण को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को अब विश्वविद्यालय स्तर की सुविधाएं, शोध के अवसर और शैक्षणिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
सरकार का कहना है कि यह पहल प्रदेश के समग्र विकास और युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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