उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में स्कूली बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाने वाले वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर परिवहन विभाग की जांच में गंभीर स्थिति सामने आई है। विभाग की ओर से चलाए गए सघन जांच अभियान में प्रदेशभर में कुल 6,066 स्कूली वाहन अनफिट पाए गए। इन वाहनों का इस्तेमाल बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए किया जा रहा था। सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित स्कूल प्रबंधनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
परिवहन विभाग की कार्रवाई से स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन को लेकर स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों की जिम्मेदारी एक बार फिर सामने आई है। विभाग ने जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर चालान और सीज करने जैसी कार्रवाई भी की है।
6,066 स्कूली वाहन जांच में मिले अनफिट:
परिवहन विभाग के विशेष जांच अभियान के दौरान प्रदेशभर में बड़ी संख्या में स्कूली वाहनों की जांच की गई। जांच में कुल 6,066 वाहन ऐसे मिले जो निर्धारित मानकों के अनुरूप फिट नहीं पाए गए।
इन वाहनों का उपयोग स्कूली बच्चों के परिवहन में किया जा रहा था। सुरक्षा से जुड़े मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों को लेकर विभाग ने संबंधित स्कूल प्रबंधनों को नोटिस जारी किए हैं। स्कूलों से इस संबंध में जवाब मांगा गया है।
1,072 वाहनों के चालान, 356 किए गए सीज:
जांच अभियान के दौरान परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिलने पर विभाग ने कार्रवाई भी की। अधिकारियों ने 1,072 स्कूली वाहनों के चालान काटे।
वहीं, नियमों की गंभीर अनदेखी पाए जाने पर 356 वाहनों को मौके पर ही सीज कर दिया गया। विभाग की इस कार्रवाई से उन वाहन संचालकों और स्कूल प्रबंधनों में हलचल है, जो बच्चों के परिवहन में ऐसे वाहनों का इस्तेमाल कर रहे थे जो जांच में निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
प्रदेश में 82 हजार से अधिक स्कूली वाहन:
13 अगस्त तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कुल 19,680 स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों के नाम पर 74,337 वाहन पंजीकृत हैं।
इसके अलावा 8,022 वाहन अलग-अलग स्कूलों से अनुबंधित हैं। इस तरह प्रदेश में कुल 82,259 वाहन स्कूली बच्चों के परिवहन में लगाए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में स्कूली वाहनों के संचालन को देखते हुए इनके फिटनेस और चालकों के सत्यापन को बच्चों की सुरक्षा से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है।
27 हजार से अधिक चालकों का पुलिस सत्यापन:
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग की ओर से चालकों के पुलिस चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया भी कराई जा रही है। अब तक 27,066 चालकों का पुलिस चरित्र सत्यापन कराया जा चुका है।
विभाग का उद्देश्य स्कूली वाहनों में बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए वाहन की फिटनेस के साथ चालक के सत्यापन और स्वास्थ्य जांच पर भी जोर दिया गया है।
चालकों का पुलिस सत्यापन और मेडिकल जांच जरूरी:
अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने बताया कि विशेष जांच अभियान का उद्देश्य स्कूली वाहनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप फिट रखना है। इसके साथ ही वाहन चालकों का उचित सत्यापन सुनिश्चित करना भी अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
परिवहन विभाग ने सभी निजी और सरकारी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि उनके यहां संचालित बस और वैन के चालकों का अनिवार्य रूप से पुलिस चरित्र सत्यापन कराया जाए। इसके अलावा चालकों का नियमित चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया जाना जरूरी बताया गया है।
स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर जोर:
परिवहन विभाग की जांच में बड़ी संख्या में स्कूली वाहनों के अनफिट मिलने के बाद स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों के परिवहन में लगाए गए वाहनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना और चालकों का सत्यापन कराना स्कूलों के लिए जरूरी है।
विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ स्कूली बच्चों की यात्रा को सुरक्षित बनाना है। फिलहाल जांच अभियान में सामने आए 6,066 अनफिट वाहनों और की गई कार्रवाई ने प्रदेश में स्कूली परिवहन व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
#Tags: #SchoolVehicles #UttarPradesh #TransportDepartment #StudentSafety #SchoolBus #VehicleFitness
