उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में बाढ़ के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश के बाद बांधों और बैराज से छोड़े गए पानी के कारण प्रदेश की 10 नदियां उफान पर हैं। पिछले आठ दिनों से बारिश नहीं होने के बावजूद लखनऊ (Lucknow) और सीतापुर (Sitapur) समेत 11 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। कई इलाकों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार सातवें दिन तेजी से बढ़ रहा है। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार घरों में चार से पांच फीट तक पानी भर गया है। इससे करीब तीन लाख लोगों के प्रभावित होने की बात कही गई है। बाढ़ के कारण हजारों लोगों ने अपने घर छोड़ दिए हैं। प्रभावित इलाकों की सड़कों पर नाव चल रही हैं।
गोमती रिवर फ्रंट के किनारे स्थित हनुमंत धाम, लेटे हुए हनुमान मंदिर और चंद्रिका देवी मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। वहीं बलिया (Ballia) और गोंडा (Gonda) में भी दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिरकर टापू जैसे हो गए हैं।
फैजुल्लागंज में सबसे ज्यादा असर:
लखनऊ का फैजुल्लागंज इलाका बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। कृष्ण लोक कॉलोनी से लेकर नंदपुरम तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इलाके में कई घरों के आसपास और सड़कों पर पानी भरा हुआ है। पानी का स्तर बढ़ने से बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से आसपास के इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है। बाढ़ के पानी ने धार्मिक स्थलों और रिहायशी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। सड़कों पर नाव चलने की स्थिति से प्रभावित इलाकों में जलभराव की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना:
लखनऊ में बाढ़ के हालात को लेकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सरकार को घेरा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि मुख्यमंत्री की निकासी का समय आ गया, लेकिन लखनऊ में अपने घर के पास के क्षेत्र में ही जलभराव की निकासी नहीं हो पाई।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि जिसने कभी घर बनाया और बसाया हो, वही परिवार के लिए घर के महत्व को समझ सकता है। उन्होंने लखनऊ में लगातार गंभीर होते बाढ़ के हालात का उल्लेख करते हुए फैजुल्लागंज को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बताया।
बारिश रुकने के बाद भी क्यों बढ़ रहा पानी:
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश थमने के बावजूद नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। इसका एक कारण ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का पानी नीचे की ओर आना बताया गया है। नेपाल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के ऊपरी जिलों में हुई तेज बारिश का पानी नदियों के जरिए मैदानी इलाकों तक पहुंच रहा है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर बारिश रुकने के बाद भी नदियों में पानी बढ़ता रहता है।
लखनऊ, लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri), पीलीभीत (Pilibhit), बहराइच (Bahraich), श्रावस्ती (Shravasti), सीतापुर, गोंडा और बाराबंकी (Barabanki) जैसे जिलों में इसका असर ज्यादा बताया गया है। इन इलाकों में नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
बैराज और बांधों से छोड़ा जा रहा पानी:
ऊपरी इलाकों में भारी बारिश होने पर बैराज और जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है। यह पानी कुछ समय बाद उत्तर प्रदेश की नदियों तक पहुंचता है और उनके जलस्तर में बढ़ोतरी होती है।
इसका असर मैदानी जिलों में भी दिखाई देता है। अयोध्या (Ayodhya) और गोरखपुर (Gorakhpur) जैसे जिलों में नदियों के बढ़ते जलस्तर का प्रभाव देखा जा रहा है। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के पीछे भी ऊपरी इलाकों से आने वाले पानी और बैराजों से छोड़े गए पानी को एक कारण बताया गया है।
बलिया और गोंडा के गांव भी प्रभावित:
लखनऊ के अलावा बलिया और गोंडा में भी बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। यहां दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। पानी चारों तरफ भर जाने से इन गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और कई जगहों पर ग्रामीण इलाकों की स्थिति टापू जैसी हो गई है।
उत्तर प्रदेश में 10 नदियों के उफान पर होने और 11 जिलों के बाढ़ से प्रभावित होने के बीच मैदानी इलाकों में जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है। बारिश थमने के बाद भी ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी और बांध-बैराज से छोड़े गए पानी के कारण नदियों में बढ़ोतरी बनी हुई है।
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