लखनऊ में बारिश थमी, फिर भी बाढ़ बरकरार; जानिए कहां से आया पानी
लखनऊ (Lucknow) में करीब सात दिन से बारिश नहीं हुई है और पूरे उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से मानसून की विदाई भी हो चुकी है। इसके बावजूद शहर के फैजुल्लागंज इलाके में बाढ़ के गंभीर हालात बने हुए हैं। करीब 40 हजार घर बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच सवाल है कि जब बारिश नहीं हो रही तो गोमती नदी में लगातार पानी कहां से आ रहा है और नदी में उफान की वजह क्या है। गोमती हिमालय से निकलने वाली पहाड़ी नदी नहीं है, बल्कि इसका उद्गम पीलीभीत (Pilibhit) जिले की गोमत ताल या फुलहर झील से होता है। मानसूनी बारिश का पानी ही इसके बहाव का प्रमुख आधार है।
पीलीभीत से गाजीपुर तक बहती है गोमती:
गोमती नदी पीलीभीत से निकलकर शाहजहांपुर (Shahjahanpur), हरदोई (Hardoi), सीतापुर (Sitapur) और लखनऊ से होकर करीब 960 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसके बाद गाजीपुर-वाराणसी (Ghazipur-Varanasi) सीमा पर कैथी गांव के पास यह गंगा नदी में मिल जाती है। गोमती की छह सहायक नदियां भी हैं। कठीना, सुखेता, छोहा और सरायन जैसी छोटी नदियां और जलधाराएं मैदानी इलाकों से गुजरते हुए गोमती के प्रवाह को बढ़ाती हैं।
मैदानी क्षेत्र से होकर बहने वाली नदी होने के कारण गोमती की गति अपेक्षाकृत धीमी रहती है। इसी वजह से नदी पर कोई बड़ा बांध नहीं बनाया गया है। लखनऊ में नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने और शहर में पेयजल की आपूर्ति के लिए गोमती बैराज बनाया गया है।
पीलीभीत, लखीमपुर और सीतापुर में हुई तेज बारिश:
बंगाल की खाड़ी से उठे डीप डिप्रेशन यानी गर्म और बेहद नम हवाओं के कारण 26 और 27 सितंबर को पीलीभीत, लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri), सीतापुर और हरदोई में अधिक बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, शाहजहांपुर में 26 सितंबर को 162.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह उस दिन होने वाली औसत बारिश से करीब 100 गुना अधिक थी।
इसी तरह पीलीभीत में 27 सितंबर को 56.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस तारीख को सामान्य बारिश केवल 2.2 मिलीमीटर रहती है। यानी वहां सामान्य से करीब 25 गुना अधिक बारिश हुई। इन जिलों से लखनऊ की दूरी और गोमती की भौगोलिक स्थिति के कारण वहां हुई बारिश का पानी तुरंत लखनऊ नहीं पहुंचा, बल्कि धीरे-धीरे नदी के रास्ते शहर की ओर बढ़ा।
धीमी रफ्तार और घुमावदार रास्ते से पहुंचा पानी:
सिंचाई विभाग (Irrigation Department) लखनऊ डिवीजन के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश के मुताबिक, गोमती नदी की ढलान काफी कम है। सामान्य दिनों में नदी की गति करीब एक किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। इसके अलावा नदी का रास्ता काफी घुमावदार है।
नक्शे पर दो स्थानों के बीच दूरी करीब 250 किलोमीटर दिखाई दे सकती है, लेकिन नदी के घुमावदार रास्ते के कारण पानी को 350 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। बाढ़ की स्थिति में पानी का दबाव बढ़ने के बावजूद नदी की गति करीब दो से तीन किलोमीटर प्रति घंटा ही रहती है। यही वजह है कि ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का पानी लखनऊ पहुंचने में करीब तीन दिन लगा और इसका असर 30 सितंबर तथा एक अक्टूबर तक दिखाई देने लगा।
अलग-अलग जिलों से अलग समय में पहुंचा पानी:
सीतापुर और हरदोई से लखनऊ की दूरी करीब 80 से 130 किलोमीटर है। इन क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी 36 से 48 घंटे यानी करीब डेढ़ से दो दिन में लखनऊ की सीमा बख्शी का तालाब और इटौंजा तक पहुंच गया।
शाहजहांपुर से लखनऊ की दूरी करीब 180 से 220 किलोमीटर है। वहां से पानी को लखनऊ पहुंचने में करीब तीन से चार दिन का समय लगा। वहीं पीलीभीत की दूरी 350 किलोमीटर से अधिक है। वहां के मैदानी क्षेत्रों और फुलहर झील से निकला पानी गोमती के घुमावदार रास्तों से होकर लखनऊ पहुंचने में करीब पांच से छह दिन लेता है।
नालों के जरिए रिहायशी इलाकों में पहुंचा नदी का पानी:
लखनऊ के गोमती बैराज स्थित कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन पर गोमती का जलस्तर करीब 105.7 मीटर रखा जाता है। इसी पानी को साफ करने के बाद राजधानी में पेयजल के रूप में आपूर्ति की जाती है। बारिश के मौसम में अचानक बढ़ने वाले जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए बैराज के 10 गेट भी बनाए गए हैं, ताकि शहर को बाढ़ से बचाया जा सके।
हालांकि, इस समय गोमती का जलस्तर करीब 108.14 मीटर बना हुआ है। सामान्य स्थिति में शहर का पानी नालों के रास्ते नदी में पहुंचता है, लेकिन जब नदी का जलस्तर नालों से ऊपर हो जाता है तो पानी के बहाव की दिशा बदल जाती है। ऐसे में नदी का पानी नालों के जरिए बैक-फ्लो होकर रिहायशी इलाकों में पहुंचने लगता है।
अतिक्रमण से प्रभावित हुई पानी सोखने की क्षमता:
शारदा नहर परियोजना (Sharda Canal Project) के मुख्य अभियंता प्रभाकर प्रसाद के मुताबिक, नदी के डूब क्षेत्र और आर्द्रभूमि पर हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण नदी की पानी सोखने की प्राकृतिक क्षमता प्रभावित हुई है। इससे बाढ़ के पानी के ठहराव और निकासी की स्थिति पर भी असर पड़ा है।
बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गोमती बैराज के पानी की निकासी वाले सभी 10 गेट पूरी तरह खोल दिए गए हैं। इसके अलावा गोमती में गिरने वाले 48 नालों को सील कर दिया गया है, ताकि नदी का पानी बैक-फ्लो होकर शहर के रिहायशी इलाकों में न पहुंचे। अधिकारियों के अनुसार, चार से पांच दिन में बाढ़ का पानी उतरने की उम्मीद है।
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