सरकारी स्कूलों के सशक्तिकरण का रोडमैप तैयार, बजट में शिक्षा को मिली प्राथमिकता!

विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट में प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। लखनऊ (Lucknow) में पेश इस बजट में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा को नई मजबूती देने का संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। सरकार ने परिषदीय विद्यालयों के ढांचे को बेहतर बनाने, विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षकों के कल्याण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।

77,622 करोड़ से सशक्त होगा ढांचा:
बजट में बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) के लिए 77,622 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। यह राशि विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, शिक्षण गुणवत्ता में सुधार लाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को गति देने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है। शिक्षा विभाग के अनुसार इन प्रावधानों से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया जाएगा और संसाधनों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

छात्रों को निःशुल्क सुविधाएं:
कक्षा 1 से 8 तक परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को निःशुल्क यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूता-मोजा और स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक विद्यार्थी को समान अवसर मिले और शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हो।

हर जिले में मॉडल कम्पोजिट विद्यालय:
प्रदेश के सभी 75 जिलों में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस प्रकार कुल 150 विद्यालय आधुनिक संसाधनों से युक्त रूप में विकसित किए जाएंगे। इन विद्यालयों में डिजिटल कक्षाएं, उन्नत शैक्षणिक सामग्री और बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जनपद में एक मुख्यमंत्री अभ्युदय विद्यालय विकसित करने की भी योजना है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिल सके।

बालिका शिक्षा को विशेष बल:
जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya) उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए आवासीय विद्यालय स्थापित करने के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों की बालिकाओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, जिससे उनकी शिक्षा निरंतर जारी रह सके।

शिक्षकों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना:
परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और संविदा व मानदेय आधारित कार्मिकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए 358 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। इससे शिक्षा कर्मियों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी और वे बेहतर मनोबल के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।

प्राथमिक विद्यालय बनेंगे स्मार्ट स्कूल:
समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha Yojana) के अंतर्गत सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। डिजिटल बोर्ड, सूचना एवं संचार तकनीक उपकरण और आधुनिक शिक्षण सामग्री के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की तैयारी है। इसके साथ ही सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों के अनुरक्षण और सुदृढ़ीकरण के लिए भी 300 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि यह बजट केवल धनराशि का प्रावधान नहीं, बल्कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समान और संस्कारयुक्त शिक्षा पहुंचाने का स्पष्ट संकल्प है। उनके अनुसार शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है और यह बजट उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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