गाजीपुर (Ghazipur): राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (Rashtriya Shaikshik Mahasangh) गाजीपुर के तत्वाधान में आज पीजी कॉलेज (PG College) गाजीपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय (Pandit Deendayal Upadhyay) की पुण्यतिथि मनाई गई। कार्यक्रम में पं० दीनदयाल जी के विचारों और उनके एकात्म मानवतावाद (Integral Humanism) पर विशेष चर्चा हुई।
कार्यक्रम का आयोजन और अध्यक्षता:
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थापक सदस्य एवं पूर्व प्रदेश मंत्री डॉ० लहजू सिंह कुशवाहा (Dr. Lahju Singh Kushwaha) ने की, जबकि संचालन जिला अध्यक्ष डॉ० राजेश सिंह सूर्यवंशी (Dr. Rajesh Singh Suryavanshi) ने संभाला। इस दौरान उपस्थित अतिथियों और शिक्षक वर्ग ने पं० दीनदयाल के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर दिया।
प्राचार्य का संबोधन:
पीजी कॉलेज गाजीपुर के प्राचार्य और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (Rashtriya Shaikshik Mahasangh) गाजीपुर के तीनों संवर्ग के प्रभारी प्रोफेसर (Dr.) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय (Raghvendra Kumar Pandey) ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर पाण्डेय ने कहा कि पं० दीनदयाल जी का अन्त्योदय (Antyodaya) का विचार, समाज के अंतिम पैदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान करना और ‘हर हाथ को कम और हर खेत को पानी’ की नीति आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने इसे समाज और शिक्षा के क्षेत्र में मार्गदर्शन देने वाला बताया।
उपस्थित शिक्षक और अतिथियों की सहभागिता:
कार्यक्रम में रामाशीष शर्मा (Ramashish Sharma), हिमांशु (Himanshu), चंद्रकांत तिवारी (Chandrakant Tiwari), चंद्रदीप (Chandradeep), अरुण राय (Arun Rai), विपिन सिंह (Vipin Singh), राम नक्षत्र (Ram Nakshatra), आयुष (Ayush), अवधेश सिंह (Avadhesh Singh), शैलेन्द्र (Shailendra), इंदु शेखर (Indu Shekhar), सुशील पाण्डेय (Sushil Pandey), प्रफुल्ल (Prafull), रमा (Rama), डा० शैलेन्द्र सिंह (Dr. Shailendra Singh), प्रोफेसर रवि शंकर सिंह (Prof. Ravi Shankar Singh) और डा० अरविन्द उपाध्याय (Dr. Arvind Upadhyay) सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने पं० दीनदयाल के विचारों को विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरक बताया।
पं. दीनदयाल का विचार और शिक्षा में प्रासंगिकता:
प्रोफेसर पाण्डेय ने बताया कि पं० दीनदयाल का एकात्म मानवतावाद केवल राजनीतिक दृष्टिकोण नहीं बल्कि समाज और शिक्षा के क्षेत्र में भी मार्गदर्शक है। उनका यह मानना था कि विकास केवल संपत्ति और संसाधन वितरण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम वर्ग तक लाभ पहुँचाना ही सच्चा विकास है। यही विचार आज के शिक्षा और युवा सशक्तिकरण के प्रयासों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है।
शिक्षा और समाज में संदेश:
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को यह संदेश दिया कि पं० दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को केवल याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे व्यवहार में उतारकर समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान में योगदान देना आवश्यक है। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक और अतिथि सभी ने इस दृष्टिकोण को अपनाने का संकल्प लिया।
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