राजनीतिक दलों के नकद चंदे पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, आयकर अधिनियम की किस धारा पर उठे सवाल?

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को आयकर अधिनियम के उस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसके तहत राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से कम का गुमनाम नकद चंदा प्राप्त करने की अनुमति है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ कर सकती है। याचिका में राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नकद चंदे से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता खेम सिंह भाटी का तर्क है कि गुमनाम नकद चंदे की व्यवस्था चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्रभावित करती है। उनका कहना है कि जब चंदे के स्रोत की जानकारी सामने नहीं आती, तो मतदाताओं को राजनीतिक दलों को मिलने वाले धन के स्रोत और दानदाताओं के उद्देश्यों के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाती।

आयकर अधिनियम की धारा 13ए को चुनौती:

याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के खंड (डी) की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने इस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की है।

याचिका में यह निर्देश देने की मांग की गई है कि राजनीतिक दलों को किसी भी राशि का भुगतान करने वाले व्यक्ति का नाम और उससे संबंधित अन्य सभी विवरण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता के अनुसार, राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी भी राशि को नकद के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता पर जोर:

याचिका का मुख्य आधार राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि गुमनाम नकद चंदे की व्यवस्था के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि राजनीतिक दलों को धन किस स्रोत से प्राप्त हुआ है।

याचिका में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके तहत किसी भी राशि का भुगतान करने वाले व्यक्ति की पहचान और अन्य विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सके।

चुनावी बॉन्ड मामले के फैसले का हवाला:

याचिकाकर्ता ने अपनी दलीलों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले का भी उल्लेख किया है, जिसमें चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया गया था। याचिका में इसी फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

याचिका में राजनीतिक दलों को मिलने वाले धन से संबंधित जानकारी मतदाताओं के लिए उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए राजनीतिक चंदे के स्रोत से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक दलों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की मांग:

याचिकाकर्ता ने निर्वाचन आयोग से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की ओर से दाखिल किए जाने वाले फॉर्म 24ए में चंदे से संबंधित दिए गए विवरणों की जांच कराने की मांग भी की है। याचिका में राजनीतिक दलों की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली दान संबंधी जानकारी की जांच के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

इसके अलावा उन राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, जो दानदाताओं के पते और स्थायी खाता संख्या समेत पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराते हैं। याचिका में इस तरह की जानकारी को राजनीतिक चंदे की पारदर्शी व्यवस्था के लिए जरूरी बताया गया है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई:

इस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ मामले पर सुनवाई कर सकती है। याचिका में 2,000 रुपये से कम के गुमनाम नकद चंदे से जुड़े आयकर अधिनियम के प्रावधान को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से राजनीतिक चंदे के स्रोत की जानकारी सार्वजनिक करने, नकद चंदे पर रोक लगाने और राजनीतिक दलों के वित्तीय विवरणों की जांच से जुड़े निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

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