एक्सप्लेनर: नौसेना से जुड़ा 80% स्वदेशी तकनीक से बना INS निपुण, हिंद महासागर में कैसे बढ़ाएगा भारत का दबदबा?

भारतीय नौसेना के बेड़े में 31 अगस्त 2026 को एक नई और महत्वपूर्ण क्षमता जुड़ गई। स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) आईएनएस निपुण को मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में आयोजित औपचारिक समारोह में भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया। इस पोत के शामिल होने से गहरे समुद्र में गोताखोरी, पनडुब्बी बचाव और समुद्री अभियानों से जुड़ी नौसेना की क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आईएनएस निपुण को विशेष रूप से गहरे समुद्र में लंबे समय तक चलने वाले जटिल अभियानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी गति के बजाय समुद्र में लंबे समय तक टिके रहकर चुनौतीपूर्ण अभियानों को पूरा करने की क्षमता बताई गई है।

निस्तार-क्लास का स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट पोत:

आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना का निस्तार-क्लास का डाइविंग सपोर्ट जहाज है। इसका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम की ओर से किया गया है। इसे 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। इसके बाद पोत के परीक्षण और नौसेना में शामिल किए जाने की अंतिम तैयारियां पूरी की जा रही थीं।

आईएनएस निपुण का निर्माण भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत घरेलू जहाज निर्माण क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पोत में करीब 75 से 80 प्रतिशत तक स्वदेशी कल-पुर्जों और प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। इसका डिजाइन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के वर्गीकरण नियमों के तहत किया गया है।

‘निपुण’ संस्कृत का शब्द है, जिसका अर्थ किसी कठिन कार्य में बेहद कुशल या पारंगत होना है। पोत को दी गई क्षमताओं को देखते हुए इसका नाम इसकी भूमिका को भी दर्शाता है।

गहरे समुद्र में लगातार काम करने की क्षमता:

आईएनएस निपुण की प्रमुख क्षमताओं में सैचुरेशन डाइविंग सिस्टम शामिल है। गहरे समुद्र में सामान्य गोताखोरी के दौरान शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। बार-बार गहराई से ऊपर आने-जाने पर गोताखोरों को डीकंप्रेशन सिकनेस यानी ‘द बेंड्स’ जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

इससे बचाव के लिए पोत पर गोताखोरों के रहने के लिए विशेष दबावयुक्त चेंबर बनाया गया है। इस चेंबर के भीतर समुद्र की गहराई के अनुरूप दबाव बनाए रखा जा सकता है। इससे गोताखोर कई दिनों या हफ्तों तक गहराई में लगातार मरम्मत, खोज और अन्य जटिल कार्यों के लिए तैयार रह सकते हैं। पोत पर हीलियम-ऑक्सीजन यानी हीलियॉक्स मिश्रित गैस के वातावरण में गोताखोरों को तैयार करने की सुविधा भी बताई गई है।

पनडुब्बी बचाव में निभाएगा मुख्य जहाज की भूमिका:

समुद्र की गहराई में किसी पनडुब्बी के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में आईएनएस निपुण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। यह गहन जलमग्नता बचाव वाहन (DSRV) के लिए मुख्य जहाज यानी मदर शिप के रूप में काम करेगा।

डीएसआरवी की मदद से समुद्र के नीचे फंसे नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम किया जा सकता है। निपुण से डीएसआरवी को लॉन्च और नियंत्रित किया जाएगा, जिससे पनडुब्बी बचाव अभियानों के संचालन में सहायता मिलेगी।

डायनेमिक पोजिशनिंग से एक जगह स्थिर रहेगा पोत:

गहरे पानी में गोताखोरी या बचाव अभियान के दौरान जहाज का निर्धारित स्थान पर स्थिर रहना बेहद जरूरी होता है। आईएनएस निपुण में आधुनिक कंप्यूटर, उपग्रह आधारित नौवहन, सेंसर और विशेष थ्रस्टर्स से युक्त डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम लगाया गया है।

इस प्रणाली की मदद से लहरों और हवा के प्रभाव के बावजूद पोत को एक ही स्थान पर स्थिर रखने में सहायता मिलती है। इससे गहरे समुद्र में चलने वाले जटिल अभियानों के दौरान काम को अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।

रोबोट के जरिए गहरे समुद्र की निगरानी:

आईएनएस निपुण रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) प्रणाली से भी लैस है। गहरे समुद्र में जहां गोताखोरों के लिए जोखिम अधिक हो सकता है, वहां इन दूर से नियंत्रित वाहनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैमरों और अन्य उपकरणों से लैस ये रोबोट समुद्र की गहराई में भेजे जा सकते हैं और वहां की तस्वीरें तथा जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। इससे गहरे पानी में गोताखोरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्य करने में मदद मिलती है।

अस्पताल और चिकित्सा सुविधाओं से लैस है निपुण:

गहरे समुद्र में अभियानों के दौरान दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति की संभावना को देखते हुए पोत पर चिकित्सा सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। आईएनएस निपुण में आठ बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और टेलीमेडिसिन जैसी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

पनडुब्बी बचाव अभियान के दौरान सुरक्षित निकाले गए नौसैनिकों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने में ये सुविधाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसके अलावा आपातकालीन परिवहन और राहत कार्यों के लिए पोत पर एक समर्पित हेलीकॉप्टर डेक भी मौजूद है।

पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तट पर बढ़ेगी क्षमता:

भारत के लिए आईएनएस निपुण का महत्व उसके दोनों समुद्री तटों से भी जुड़ा है। इस श्रेणी का पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार जुलाई 2025 में कमीशन किया गया था और इसे विशाखापत्तनम में पूर्वी समुद्री तट पर तैनात किया गया है।

अब आईएनएस निपुण के मुंबई में कमीशन होने से पश्चिमी समुद्री तट पर भी इस श्रेणी की क्षमता उपलब्ध होगी। इस तरह पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री तटों पर डाइविंग सपोर्ट और पनडुब्बी बचाव से जुड़ी नौसैनिक क्षमता को मजबूत आधार मिलेगा।

आईएनएस निपुण का नौसेना में शामिल होना स्वदेशी जहाज निर्माण और गहरे समुद्र में विशेष अभियानों के लिए भारत की क्षमता को आगे बढ़ाने वाला कदम है। इसकी सैचुरेशन डाइविंग, पनडुब्बी बचाव, डायनेमिक पोजिशनिंग, दूर से संचालित वाहनों और चिकित्सा सुविधाओं जैसी क्षमताएं इसे नौसेना के विशेष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण पोत बनाती हैं।

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