सिंधु जल समझौते को लेकर भारत ने हेग स्थित Permanent Court of Arbitration (स्थायी मध्यस्थता अदालत) के निर्देश को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को जारी रखने से जुड़ा निर्देश दिया था, जिसे भारत ने सोमवार को पूरी तरह नामंजूर कर दिया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पहलगाम (पहलगाम) में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने वर्ष 2025 में इस समझौते को स्थगित कर दिया था और देश का यह निर्णय अभी भी प्रभावी है। वहीं, पाकिस्तान (पाकिस्तान) ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है।
भारत ने अदालत के निर्देश को किया खारिज:
भारत ने Permanent Court of Arbitration (स्थायी मध्यस्थता अदालत) के उस आदेश को मानने से इनकार किया है, जिसमें सिंधु जल समझौते को जारी रखने की बात कही गई है। विदेश मंत्रालय की ओर से साफ किया गया कि वर्ष 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का निर्णय लिया था। भारत के अनुसार यह फैसला फिलहाल लागू है।
इस मामले में भारत ने अदालत के निर्देश पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए समझौते को लेकर अपने निर्णय में किसी बदलाव का संकेत नहीं दिया है।
पनबिजली परियोजना को लेकर अदालत का निर्देश:
अदालत ने सोमवार को कहा कि भारत को कश्मीर (कश्मीर) में चल रही एक पनबिजली परियोजना के कार्य को सीमित रखना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने सिंधु जल समझौते का पालन करने की बात कही। अदालत के अनुसार यह समझौता पूरी तरह प्रभावी है और भारत के पास इसे समाप्त या निलंबित करने के लिए कोई वैध या उचित आधार नहीं है।
परियोजनाओं पर तटस्थ विशेषज्ञ करेंगे फैसला:
हिमालयी क्षेत्र में निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाएं सिंधु जल समझौते की शर्तों के अनुरूप हैं या नहीं, इसका निर्धारण तटस्थ विशेषज्ञ करेंगे। इन विशेषज्ञों की नियुक्ति World Bank (विश्व बैंक) द्वारा की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार तटस्थ विशेषज्ञ जुलाई 2027 तक अपना निर्णय देंगे।
इस तरह सिंधु जल समझौते और कश्मीर में चल रही पनबिजली परियोजनाओं को लेकर आगे की स्थिति तटस्थ विशेषज्ञों के निर्णय से भी जुड़ी हुई है। फिलहाल भारत ने अदालत के निर्देश को स्वीकार करने से इनकार करते हुए वर्ष 2025 में समझौते को स्थगित करने के अपने निर्णय को प्रभावी बताया है।
पाकिस्तान ने फैसले का किया स्वागत:
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। सिंधु जल समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच जारी मतभेदों के बीच अदालत का यह निर्देश सामने आया है। भारत ने जहां इसे स्वीकार करने से इनकार किया है, वहीं पाकिस्तान ने फैसले का समर्थन किया है।
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