रिपोर्टर: अनुज कुमार
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सत्ता के रवैये को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में सरकार की कार्रवाई जातीय आधार पर प्रभावित दिखाई देती है। उनका कहना है कि यदि धनंजय सिंह का मामला किसी अन्य सामाजिक वर्ग से जुड़ा होता तो अब तक सख्त से सख्त कार्रवाई की जा चुकी होती, लेकिन सजातीय होने के कारण सरकार का रुख नरम नजर आ रहा है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सत्ता तथा विपक्ष के बीच बयानबाजी का दौर और तीखा हो गया है।
सरकार पर पक्षपात का आरोप:
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रवक्ता अमीक जामेई ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कानून के नाम पर समानता की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में यह सिद्धांत लागू नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि धनंजय सिंह के मामले में जिस तरह की ढिलाई दिखाई दे रही है, वह सरकार के कथित निष्पक्ष रवैये पर सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि अगर यही मामला किसी ब्राह्मण या मुस्लिम समाज से जुड़े व्यक्ति का होता, तो सरकार अब तक कठोर कदम उठा चुकी होती।
कानून व्यवस्था पर उठे सवाल:
अमीक जामेई ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के करीबी या सजातीय लोगों के मामलों में जांच और कार्रवाई की रफ्तार धीमी कर दी जाती है, जबकि अन्य वर्गों के मामलों में तत्काल सख्ती दिखाई जाती है। उन्होंने इसे न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया और कहा कि इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज:
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी लगातार यह मुद्दा उठा रही है कि सरकार चयनात्मक कार्रवाई कर रही है। अमीक जामेई ने कहा कि लोकतंत्र में कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ उसके सामाजिक या राजनीतिक संबंधों के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है।
योगी सरकार पर सीधा हमला:
सपा प्रवक्ता ने योगी सरकार (Yogi Government) पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार वास्तव में निष्पक्ष है, तो उसे हर मामले में एक जैसा रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना होगा कि कानून का उद्देश्य केवल डर पैदा करना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करना है। अमीक जामेई ने दावा किया कि जनता अब ऐसे दोहरे मापदंडों को समझने लगी है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिलेगा।
विपक्ष की रणनीति:
समाजवादी पार्टी का मानना है कि ऐसे मुद्दों को उठाकर सरकार की कार्यप्रणाली को जनता के सामने लाना जरूरी है। अमीक जामेई ने कहा कि पार्टी आगे भी ऐसे मामलों को मजबूती से उठाएगी और सड़क से सदन तक सवाल पूछे जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार ने समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो विपक्ष इसे जनआंदोलन का रूप देगा।
राजनीतिक माहौल गरमाया:
इस बयान से प्रदेश की राजनीति में गर्माहट बढ़ गई है। एक ओर सत्तारूढ़ दल पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार समर्थक इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता सकते हैं। फिलहाल, अमीक जामेई के बयान ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और समान न्याय के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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