बलिया: निषाद पार्टी के प्रचार हटाने के आरोपों से बढ़ी सियासी हलचल

रिपोर्टर: अमित कुमार

बलिया (Ballia) जनपद की बाँसडीह विधानसभा में निषाद पार्टी के प्रचार-प्रसार को लेकर विवाद सामने आया है। कुछ स्थानों पर पार्टी का नाम और नेतृत्व से जुड़ी पहचान को मिटाए जाने के आरोप के बाद निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के प्रचार के तहत लिखे गए नाम और चिन्हों को जानबूझकर हटाया गया, जिससे पार्टी समर्थकों में नाराजगी फैल गई है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

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प्रचार सामग्री हटाए जाने का आरोप:
जानकारी के अनुसार बाँसडीह विधानसभा क्षेत्र में निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी का नाम और संगठन से जुड़ी पहचान सार्वजनिक स्थानों पर लिखी गई थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने इन लिखे हुए नामों को मिटा दिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल प्रचार सामग्री हटाने का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी की मौजूदगी को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसी कारण से कार्यकर्ताओं में असंतोष और रोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

कार्यकर्ताओं में नाराजगी का माहौल:
निषाद पार्टी के कार्यकर्ता अजय शंकर पांडेय उर्फ कनक ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी के प्रचार अभियान के तहत वे घर-घर जाकर बड़े पैमाने पर कैलेंडर वितरित कर रहे हैं। इन कैलेंडरों में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद, निषाद राज और भगवान राम की तस्वीरें शामिल हैं। इसके साथ-साथ पार्टी के नाम को विभिन्न स्थानों पर लिखकर प्रचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे समय में पार्टी का नाम मिटाया जाना कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने का प्रयास है।

विधानसभा क्षेत्र को लेकर सवाल:
अजय शंकर पांडेय ने सवाल उठाते हुए कहा कि बाँसडीह विधानसभा वही क्षेत्र है, जहां से निषाद पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए हैं। ऐसे में इसी विधानसभा में पार्टी के प्रचार को मिटाने का प्रयास समझ से परे है। उनका कहना है कि जब पार्टी को जनता का समर्थन मिला है और प्रतिनिधित्व भी है, तो फिर प्रचार को लेकर इस तरह की गतिविधियां क्यों की जा रही हैं, यह गंभीर सवाल खड़ा करता है।

आचार संहिता न होने का तर्क:
कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि वर्तमान समय में न तो कोई चुनाव घोषित है और न ही आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद पार्टी के प्रचार को हटाना या मिटाना उचित नहीं ठहराया जा सकता। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को अपने विचार और संगठन का प्रचार करने का अधिकार है। ऐसे में निषाद पार्टी के प्रचार को निशाना बनाना अनुचित है।

कार्रवाई की मांग:
इस पूरे मामले को लेकर कार्यकर्ता अजय शंकर पांडेय ने कहा कि वे इस विषय की जानकारी सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद तक पहुंचाएंगे। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह विवाद और गहराता जा सकता है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा:
बाँसडीह विधानसभा में निषाद पार्टी के प्रचार को लेकर उठे इस विवाद ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा को तेज कर दिया है। कार्यकर्ताओं का आक्रोश यह संकेत देता है कि मामला केवल प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और प्रभाव से भी जुड़ा हुआ है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस पर क्या रुख अपनाता है और आगे क्या कार्रवाई होती है।

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