गाजीपुर में सर सैयद अहमद खान की 209वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
गाजीपुर (Ghazipur) के एमएएच इंटर कॉलेज (MAH Inter College) परिसर स्थित सर सैयद हॉल में 17 अक्टूबर 2026 को शिक्षाविद, दार्शनिक, आध्यात्मिक चिंतक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संपन्न महापुरुष सर सैयद अहमद खान की 209वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वर्तमान भारतीय परिवेश में उनके विचारों की प्रासंगिकता, शिक्षा के महत्व, सामाजिक सुधार और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा देने में उनके योगदान पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके जीवन-दर्शन को प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के प्रसार और समाज में जागरूकता लाने के लिए सर सैयद अहमद खान के प्रयास आज भी प्रेरणादायक हैं।

कुरान शरीफ की तिलावत से कार्यक्रम की शुरुआत:
कार्यक्रम का शुभारंभ कक्षा 11 के विद्यार्थियों अलीमुल्लाह और मोहम्मद जैद द्वारा पवित्र ग्रंथ कुरान शरीफ की तिलावत से किया गया। इसके बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहम्मद खालिद अमीर ने उपस्थित अतिथियों का परिचय कराया। माल्यार्पण की रस्म पूरी होने के बाद कॉलेज के प्रबंधक हाजी मोहम्मद वारिस हसन खान ने मुख्य अतिथियों को विद्यालय का स्मृति चिह्न भेंट किया।
मुख्य अतिथि साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मण यादव के स्वागत में प्रवक्ता शम्स तबरेज खान ने अभिनंदन पत्र पढ़ा। इसमें अतिथि के व्यक्तित्व और योगदान का उल्लेख करते हुए कहा गया कि समय उन्हीं लोगों को याद रखता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का रास्ता बनाते हैं।
शिक्षा को सामाजिक बदलाव का आधार बताया:
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मण यादव ने अपने संबोधन में सर सैयद अहमद खान को दूरदर्शी विचारक बताया। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने शिक्षा को समाज की प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम माना। उनका विश्वास था कि जब लोग शिक्षित होंगे, तब अज्ञानता दूर होगी, बेहतर विचार विकसित होंगे और समाज गलत परंपराओं को छोड़कर सत्य तथा ज्ञान की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। सर सैयद ने आने वाली पीढ़ियों को कुरीतियों से दूर रहने का मार्ग दिखाया और अज्ञानता को अनेक सामाजिक बुराइयों की जड़ बताया। वक्ताओं ने उनके विचारों को वर्तमान समय में भी उपयोगी बताया।

हिंदू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीयता पर चर्चा:
मुख्य अतिथि ने सर सैयद अहमद खान के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की खूबसूरती यहां के विभिन्न समुदायों के बीच प्रेम, सौहार्द और आपसी सहयोग में निहित है। उनके विचारों के माध्यम से सामाजिक एकता और साझा संस्कृति के महत्व को सामने रखा गया।
वक्ताओं ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत उसकी विविधता और आपसी सद्भाव में समाहित है। देश में ज्ञान, शिक्षा और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। सर सैयद अहमद खान को सच्चा राष्ट्रवादी और देशभक्त बताते हुए उनके शैक्षिक योगदान को याद किया गया।
गाजीपुर से अलीगढ़ तक शिक्षा के प्रसार में योगदान:
मिर्जा गालिब पुरस्कार से सम्मानित डॉ. ओबैदुर्रहमान ने उर्दू के प्रसिद्ध कवि अल्लामा इकबाल के शेर के माध्यम से सर सैयद अहमद खान के व्यक्तित्व और योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि सर सैयद दूरदर्शी सोच रखने वाले महान व्यक्ति थे, जिन्होंने शिक्षा के प्रसार को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया।
डॉ. ओबैदुर्रहमान ने बताया कि सर सैयद ने वर्ष 1864 में गाजीपुर में साइंटिफिक सोसाइटी की स्थापना की थी। इसके लिए लोगों को सहयोग देने के लिए प्रेरित किया गया और विक्टोरिया स्कूल की स्थापना भी कराई गई। शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के उद्देश्य से उन्होंने इंग्लैंड की यात्रा की और वहां की शैक्षिक प्रणाली का अध्ययन किया।
उन्होंने गणित, विज्ञान और रसायन विज्ञान जैसे विषयों को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने पर जोर दिया। विभिन्न विषयों की पुस्तकों का अनुवाद कराने का प्रयास भी किया गया, ताकि आधुनिक ज्ञान को विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सके।
बाद में उनका स्थानांतरण गाजीपुर से अलीगढ़ हो गया। वर्ष 1875 में उन्होंने एमएओ कॉलेज की स्थापना की, जो आगे चलकर वर्ष 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University) बना। वक्ताओं ने इस संस्थान को आधुनिक शिक्षा के प्रसार की दिशा में उनके प्रयासों का महत्वपूर्ण परिणाम बताया।
साहित्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां:
कार्यक्रम में एमएएच इंटर कॉलेज के पूर्व छात्र और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में प्रोफेसर रहे राही मासूम रजा के साहित्यिक योगदान का भी उल्लेख किया गया। गाजीपुर के प्रसिद्ध शायर बादशाह राही ने अपनी शायरी के माध्यम से सर सैयद अहमद खान की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहम्मद खालिद अमीर ने कहा कि सर सैयद दूरदर्शी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज की तकदीर बदलने का प्रयास किया और आधुनिक शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण संस्थागत पहल की। उनके अनुसार, सर सैयद के प्रयासों से स्थापित शैक्षिक परंपरा आज भी विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
इस दौरान उर्दू के प्रसिद्ध शायर असरार-उल-हक मजाज लखनवी द्वारा वर्ष 1933 में लिखे गए तराने को विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त कर हुआ समापन:
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के प्रबंधक हाजी मोहम्मद वारिस हसन खान ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संयुक्त संचालन सैयद हुसैन अब्बास जैदी, मोहम्मद जमील खान और डॉ. लईक ने किया।
इस अवसर पर कॉलेज के अध्यक्ष मजहर हुसैन, उपाध्यक्ष शहनवाज हुसैन खान, उपप्रबंधक तनवीर अहमद खान, पूर्व विधायक खुर्शीद अहमद, चिकित्सक डॉ. वसीम अशरफ सिद्दीकी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक, साहित्यकार और अन्य लोग मौजूद रहे। आयोजन का समापन अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ हुआ।
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गाज़ीपुर ब्यूरो: हसीन अंसारी