प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें संस्करण का उद्घाटन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया का भारत पर भरोसा भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के संयंत्रों से निकलने वाली सेमीकंडक्टर चिप अब देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंचने लगी हैं।
प्रधानमंत्री ने सितंबर में जारी तिमाही सकल घरेलू उत्पाद रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण दौर में भी भारत ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। इसी दौरान जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की संप्रभु रेटिंग में सुधार किया, जो करीब 35 साल बाद हुआ है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तकनीकी क्षमता पर जोर:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र ऐसा नहीं है कि केवल कारखाना लगाने के बाद काम पूरा हो जाए। इस क्षेत्र में तकनीकी क्षमता तैयार करने में दशकों लगते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने चिप डिजाइन, निर्माण, उपकरण निर्माण और परीक्षण क्षमता पर एक साथ काम किया है और इसमें सफलता हासिल की है।
उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए देश में तकनीक, अनुसंधान और निर्माण क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया।
सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण शुरू:
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण शुरू किया है। पहले चरण की कुल राशि करीब 70,400 करोड़ रुपये थी, जबकि दूसरे चरण के लिए 1.18 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए लगातार निवेश और तकनीकी क्षमता का विकास जरूरी है। इसके साथ ही देश में सेमीकंडक्टर से जुड़े पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए नई तकनीक पर जोर:
प्रधानमंत्री ने कहा कि कंपाउंड सेमीकंडक्टर के निर्माण से लेकर सिलिकॉन फोटोनिक्स को भी पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल करना जरूरी है। उनके मुताबिक, ये तकनीकें कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सक्षम बनाने वाले बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल के बीच चिप निर्माण से जुड़ी तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर फोकस:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दे रहा है और इसके लिए कई सुधार किए गए हैं। उन्होंने उपकरण कंपनियों के नेताओं से भारत में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जब भारत जैसा देश किसी बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में सफलता हासिल करता है तो इससे पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलती है। मौजूदा समय में आपूर्ति श्रृंखला को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में इसका महत्व और बढ़ जाता है।
विदेशी कंपनियों के लिए सहयोग के रास्ते खुले:
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय स्टार्टअप, डिजाइन कंपनियों और प्रवासी भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाली संस्थाओं के साथ सहयोग कर सकती हैं। सरकार नीति, वित्तीय सहायता और नियामकीय ढांचे के स्तर पर जरूरी कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए उद्योगों और तकनीकी संस्थानों के बीच सहयोग भी महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा सुरक्षा को भी बताया जरूरी:
प्रधानमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए बनाई जा रही चिप का इस्तेमाल कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा केंद्रों में किया जा रहा है। इन केंद्रों में हजारों उच्च क्षमता वाले प्रोसेसर एक साथ बड़ी मात्रा में आंकड़ों का प्रसंस्करण करते हैं। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के साथ ऊर्जा से जुड़ी जरूरतों पर भी ध्यान देने की बात कही।
युवाओं और उद्योगों से अनुसंधान बढ़ाने की अपील:
प्रधानमंत्री ने भारत में अनुसंधान कर रहे युवाओं से आगे आने और विदेशों में अनुसंधान कर रहे युवाओं से भारत में उन्नत तकनीक के विकास से जुड़ने की अपील की। उन्होंने उद्योग जगत के प्रमुखों से भी भारत में अनुसंधान और विकास को बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि इससे उद्योगों को लाभ मिलेगा और देश की युवा शक्ति को भी मजबूती मिलेगी।
भारत में चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा पर जोर:
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में फैबलेस कंपनियों की संख्या बढ़नी चाहिए और चिप से जुड़ी बौद्धिक संपदा भी देश में तैयार होनी चाहिए। उन्होंने कंपाउंड सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन फोटोनिक्स के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने ‘टेप-आउट’ की प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए बताया कि डिजाइन पूरा होने के बाद चिप को उत्पादन के लिए भेजने को टेप-आउट कहा जाता है। लेकिन इसके बाद काम खत्म नहीं होता। अगली और बेहतर चिप बनाने का काम उसी दिन शुरू हो जाता है।
600 से ज्यादा कंपनियां और 40 से अधिक देशों की भागीदारी:
17 से 19 सितंबर तक आयोजित होने वाले सेमीकॉन इंडिया 2026 की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण’ है। इसमें सेमीकंडक्टर कंपनियों के अलावा निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, शिक्षाविद और छात्र शामिल होंगे।
कार्यक्रम में ‘सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स’ विशेष आकर्षण होगा। इसमें चिप बनने से लेकर तैयार इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली तक की पूरी प्रक्रिया दिखाई जाएगी।
इस बार 600 से ज्यादा प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी कार्यक्रम में भाग लेंगे। एएसएमएल (ASML), एप्लाइड मैटेरियल्स (Applied Materials), टेराडाइन (Teradyne), इन्फिनियन (Infineon), एनएक्सपी (NXP), टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics), माइक्रॉन (Micron), लैम रिसर्च (Lam Research), सीजी पावर (CG Power), एडवांटेस्ट (Advantest) और टोक्यो इलेक्ट्रॉन (Tokyo Electron) जैसी कंपनियां निवेश, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और कारोबारी साझेदारी से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगी।
प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह देश मंडप होंगे। इसके अलावा कई भारतीय राज्यों के मंडप भी लगाए जाएंगे।
देश में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी:
सरकार के मुताबिक, देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अब तक 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से पहले चरण में मंजूर तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
केंद्र सरकार ने सेमीकॉन 2.0 को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाना है।
चिप डिजाइन के क्षेत्र में भी बढ़ रहा काम:
सरकार के मुताबिक, 400 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों और 105 स्टार्टअप को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी ईडीए उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
इसके अलावा 24 स्टार्टअप को डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव यानी डीएलआई योजना के तहत मंजूरी मिली है। इसके माध्यम से देश में चिप डिजाइन और इससे जुड़ी तकनीक पर काम करने वाले स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सेमीकंडक्टर भारत के लिए क्यों जरूरी:
सेमीकंडक्टर की बढ़ती जरूरत को देखते हुए भारत चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली तक अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य चिप की आपूर्ति के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना और देश में इस क्षेत्र से जुड़े कारोबार तथा तकनीक को बढ़ावा देना है।
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