मथुरा (Mathura) जनपद के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से नमाज पढ़वाने और धार्मिक दबाव बनाए जाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। आरोपों के आधार पर की गई प्रारंभिक जांच में गंभीर तथ्य सामने आए, जिसके बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित हेडमास्टर को निलंबित कर दिया है। यह मामला मांटा थाना क्षेत्र के नौहझील प्राइमरी स्कूल से जुड़ा हुआ है, जहां पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों ने आपत्ति जताई थी।
बच्चों के परिजनों के अनुसार विद्यालय में पढ़ाई के दौरान कथित तौर पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। बच्चों के माध्यम से जब यह बात अभिभावकों तक पहुंची, तो उन्होंने स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामला प्रशासन और शिक्षा विभाग के संज्ञान में आया।
शिकायत के बाद शुरू हुई विभागीय कार्रवाई:
भाजपा (BJP) के बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान ने इस मामले की शिकायत बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्कूल के हेडमास्टर बच्चों को एक विशेष धार्मिक गतिविधि में शामिल होने के लिए प्रेरित करते थे। शिकायत मिलने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के संकेत मिले, जिसके बाद हेडमास्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
जांच के लिए बनी दो सदस्यीय समिति:
बेसिक शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह स्कूल में हुए घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपे। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की गतिविधि संविधान और शिक्षा से जुड़े नियमों के अनुरूप हो।
अभिभावकों की चिंता और बच्चों की स्थिति:
अभिभावकों का कहना है कि बच्चे मानसिक रूप से असहज हो गए थे। कथित तौर पर बच्चों को धार्मिक तुलना के माध्यम से प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिससे उनके मन में भ्रम और डर पैदा हुआ। जब बच्चों ने यह बात घर पर साझा की, तब अभिभावकों ने एकजुट होकर शिकायत करने का फैसला लिया। उनका कहना है कि स्कूल का माहौल शिक्षा के लिए होना चाहिए, न कि किसी भी प्रकार के वैचारिक दबाव के लिए।

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की पृष्ठभूमि:
बताया गया कि इस प्राथमिक विद्यालय में विभिन्न समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में विद्यालय प्रशासन पर यह जिम्मेदारी बनती है कि सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार हो और शिक्षा का माहौल पूरी तरह से तटस्थ बना रहे। इसी आधार पर शिकायतकर्ताओं ने कार्रवाई की मांग की थी।
प्रशासन का रुख और आगे की प्रक्रिया:
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में सभी आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कठोर कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल विद्यालय में शिक्षण कार्य को सामान्य रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
शिक्षा व्यवस्था में संवेदनशीलता की आवश्यकता:
यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि स्कूलों में बच्चों के मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए अत्यंत संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में किसी भी तरह की अनुचित गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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