यूपी के श्रावस्ती जिले में पुलिस ने नेपाल से लड़कियों की तस्करी करने वाले बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में दो तस्करों को गिरफ्तार कर चार नेपाली लड़कियों को सुरक्षित बचाया गया। पुलिस और सीमा सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क थीं, इसी वजह से तस्करों की योजना नाकाम हो गई। यह कार्रवाई 31 जनवरी की रात हुई, जिसका खुलासा पुलिस ने रविवार को किया।
खुफिया सूचना के बाद बिछाया गया जाल:
नेपाल-भारत सीमा क्षेत्र में मानव तस्करी की आशंका को लेकर पहले से सतर्कता बरती जा रही थी। इसी क्रम में पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के बीच बॉर्डर कोऑर्डिनेशन को मजबूत किया गया था। 31 जनवरी को हुई बैठक में नेपाल-भारत बॉर्डर पर सक्रिय तस्करी गिरोहों के खिलाफ रणनीति बनाई गई। बैठक में सिरसिया थाना के सब-इंस्पेक्टर दीपक गिरि भी मौजूद थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक चार नेपाली लड़कियों को जंगल के रास्ते मोटरसाइकिल से भारत ला रहे हैं।
जंगल के रास्ते लाई जा रहीं थीं लड़कियां:
सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना देर किए संबंधित विभागों और स्वयंसेवी संगठनों को अलर्ट किया। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और एक गैर सरकारी संगठन (NGO) को भी सतर्क किया गया। इसके बाद तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई गई और सीमा क्षेत्र में संदिग्ध रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी गई।
घेराबंदी देख भागने लगे तस्कर:
पुलिस टीम ने गुज्जर गौरी सीमा क्षेत्र के भचकाही गांव के आगे जंगल मार्ग पर घेराबंदी की। कुछ ही देर में दो मोटरसाइकिलों पर सवार दो युवक चार नेपाली लड़कियों के साथ आते दिखाई दिए। पुलिस को देखकर आरोपी घबरा गए और बाइक छोड़कर भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन घेराबंदी के चलते वे सफल नहीं हो सके। पुलिस ने मौके पर ही दोनों को दबोच लिया और लड़कियों को सुरक्षित निकाल लिया।
नौकरी का झांसा देकर की जा रही थी तस्करी:
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा में काम दिलाने का लालच देकर भारत ला रहे थे। आगे उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेलने की तैयारी थी। पुलिस के अनुसार, रेस्क्यू के वक्त लड़कियां बेहद डरी हुई थीं और जोर-जोर से रोने लगीं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
महिला सिपाहियों ने की काउंसिलिंग:
रेस्क्यू टीम में शामिल महिला सिपाहियों ने लड़कियों की काउंसिलिंग की और उन्हें शांत कराया। भरोसा मिलने के बाद लड़कियों ने पूरी घटना विस्तार से बताई। पुलिस ने बताया कि काउंसिलिंग के बाद ही तस्करी के पूरे तरीके और नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आ सकीं।
पहले भी हो चुका है तस्करी का खुलासा:
24 जनवरी को दैनिक भास्कर ने भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों में कम उम्र की नेपाली लड़कियों की तस्करी से जुड़ी जांच रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि किस तरह नेपाल के छोटे गांवों से लड़कियों को यूपी के रास्ते देश के बड़े शहरों और खाड़ी देशों तक पहुंचाया जाता है। मौजूदा कार्रवाई को उसी कड़ी में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
आरोपियों की पहचान और बरामदगी:
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरिराम यादव और रामरूप के रूप में हुई है। दोनों श्रावस्ती जिले के थाना सिरसिया क्षेत्र के बभनी कुकुरभुकवा गांव के निवासी हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी नेपाल सीमा से मानव तस्करी का संगठित नेटवर्क चला रहे थे। उनके पास से दो मोटरसाइकिल, एक आधार कार्ड और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी:
पुलिस ने मानव तस्करी से जुड़ी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सके।
पीड़िताओं को सुरक्षित सौंपा गया:
रेस्क्यू की गई लड़कियों को फिलहाल एक NGO के हवाले किया गया है। आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सुरक्षित उनके घर भेजने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही उनके बयान दर्ज किए जाएंगे, जिससे तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों का खुलासा हो सके।
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