उत्तर प्रदेश में न्याय व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और साक्ष्य आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। Lucknow (लखनऊ) में Prison Administration and Reform Services (कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं) तथा Uttar Pradesh State Forensic Science Institute (उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान) के बीच शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल से कारागार प्रशासन में आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रशिक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।

समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर:
एमओयू पर PC Meena (पीसी मीना), महानिदेशक Prison Administration and Reform Services (कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं) तथा Dr. GK Goswami (डॉ. जीके गोस्वामी), निदेशक Uttar Pradesh State Forensic Science Institute (उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान) ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कारागार प्रशासन को अधिक सक्षम बनाना है।
फॉरेंसिक क्षमताओं के विस्तार पर जोर:
इस अवसर पर Dr. GK Goswami (डॉ. जीके गोस्वामी) ने कहा कि Chief Minister Yogi Adityanath (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) की मंशा के अनुरूप प्रदेश में फॉरेंसिक क्षमताओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैज्ञानिक साक्ष्यों का महत्व पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। फॉरेंसिक विज्ञान न केवल निर्दोष लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए भी यह सबसे मजबूत और विश्वसनीय माध्यम बनकर उभरा है।
संयुक्त प्रशिक्षण और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा:
समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनुसंधान गतिविधियां, कार्यशालाएं, विशेषज्ञ व्याख्यान, इंटर्नशिप, पाठ्यक्रम विकास और विभिन्न शोध परियोजनाओं पर मिलकर कार्य करेंगे। इस सहयोग के माध्यम से कारागार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की वैज्ञानिक समझ, तकनीकी दक्षता और कार्य क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देकर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

कारागार प्रशासन को मिलेगी नई दिशा:
PC Meena (पीसी मीना) ने कहा कि यह एमओयू दोनों संस्थानों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। उनके अनुसार इस समझौते से कारागार प्रशासन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा और अनुसंधान आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को नई दिशा प्राप्त होगी, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों के कौशल विकास, नवाचार और क्षमता निर्माण को भी गति मिलेगी।
न्याय प्रणाली होगी अधिक प्रभावी और पारदर्शी:
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि Uttar Pradesh State Forensic Science Institute (उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान) के सहयोग से कारागार अधिकारियों की कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। इससे वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा साक्ष्य आधारित बनाने में सहायता मिलेगी। यह पहल न्यायिक और कारागार व्यवस्था में आधुनिक तकनीकों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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