Muzaffarnagar (मुजफ्फरनगर) की अदालत ने 16 साल पुराने चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो मुख्य दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में पूर्व प्रधान Pramod Chaudhary (प्रमोद चौधरी) भी शामिल हैं, जो Additional SP Anuj Chaudhary (एडिशनल एसपी अनुज चौधरी) के ममेरे भाई बताए जाते हैं। यह मामला वर्ष 2010 में Titavi (तितावी) क्षेत्र के Madi (माड़ी) गांव में प्रधानी चुनाव के दौरान हुई हत्या से जुड़ा है। अदालत ने इस मामले को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
16 साल पुराने मामले में आया फैसला:
यह मामला 24 अगस्त 2010 का है, जब ग्राम Madi (माड़ी) निवासी Rajveer Singh (राजवीर सिंह) प्रधानी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। इसी को लेकर चुनावी रंजिश पैदा हुई। आरोप है कि घटना वाले दिन सुबह खेत की ओर जाते समय पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और गोली मारकर हत्या कर दी। अदालत में चली लंबी सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई।
कोर्ट ने लोकतंत्र की अहमियत पर की टिप्पणी:
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश Ravi Kumar Diwakar (रवि कुमार दिवाकर) ने फैसले के दौरान कहा कि ग्राम पंचायत लोकतंत्र की पहली सीढ़ी होती है और यहां मतदाता के वोट तथा बैलेट की गरिमा सर्वोपरि है। अदालत ने कहा कि चुनावी रंजिश में हत्या जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर सीधा हमला हैं। इसी आधार पर अदालत ने इस प्रकरण को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में मानते हुए कठोर सजा सुनाई।
परिजनों ने फैसले का किया स्वागत:
मृतक Rajveer Singh (राजवीर सिंह) के परिजनों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें 16 वर्ष बाद न्याय मिला है। परिवार का कहना है कि लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद यह फैसला आया है। गांव के कई लोगों ने भी अदालत के निर्णय को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही बनी अहम आधार:
घटना के दौरान खेतों की ओर जा रहे दो ग्रामीणों ने पूरी वारदात देखने का दावा किया था। उनके अनुसार आरोपियों ने पहले मृतक के साथ अभद्रता की और फिर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। वारदात के बाद हमलावरों ने प्रत्यक्षदर्शियों पर भी फायरिंग की और धमकी देकर मौके से फरार हो गए। दहशत के कारण दोनों गवाह देर तक गन्ने के खेत में छिपे रहे। बाद में उनके सामने आने पर मामले में आरोपियों के नाम स्पष्ट हुए।
दो आरोपियों की हो चुकी थी मुठभेड़ में मौत:
जांच के दौरान पुलिस को वारदात में शामिल दो अन्य शूटरों के बारे में भी जानकारी मिली थी। बाद में 17-18 जनवरी 2011 की रात Shahpur (शाहपुर) थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद उनके विरुद्ध चल रही कार्रवाई समाप्त कर दी गई। पुलिस जांच के दौरान यह भी सामने आया कि हत्या पुरानी रंजिश के कारण की गई थी।
मेडिकल रिपोर्ट ने मजबूत किए साक्ष्य:
पोस्टमार्टम करने वाले Dr. Sanjay Bhatnagar (डॉ. संजय भटनागर) की रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कुल सात गोली लगने के निशान दर्ज किए गए। रिपोर्ट में चेहरे, गर्दन और छाती पर बेहद नजदीक से गोली चलाए जाने की पुष्टि हुई। अदालत ने माना कि मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं, जिसके आधार पर Pramod Chaudhary (प्रमोद चौधरी) और Sahdev alias Pappu (सहदेव उर्फ पप्पू) को दोषी ठहराया गया।
सबूत गायब होने पर भी अदालत सख्त:
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि घटनास्थल से बरामद 32 बोर के चार खोखा कारतूस थाना मालखाने से गायब हो गए थे। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने पुलिस से मिलीभगत कर महत्वपूर्ण साक्ष्य हटवाए। मामले के विवेचक ने भी अदालत में स्वीकार किया कि कारतूस मालखाने से उपलब्ध नहीं हैं। अदालत ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए विस्तृत कार्रवाई के निर्देश दिए।
SSP को कार्रवाई के निर्देश:
अदालत ने Muzaffarnagar Police (मुजफ्फरनगर पुलिस) के SSP (एसएसपी) को निर्देश दिया है कि मालखाने से सबूत गायब होने के मामले में जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही जिन पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आए, उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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