पीएम मोदी-पुतिन की भारत मंडपम में मीटिंग जारी:भारत खरीद सकता है रडार में पकड़ न आने वाला विमान, एयरस्ट्राइक में गेमचेंजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में बैठक शुरू हो गई है। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को रक्षा सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक में बड़ी रक्षा डील पर चर्चा संभव है। इसमें भारत के रडार की पकड़ में आसानी से न आने वाले सुखोई-57 लड़ाकू विमान खरीदने का मुद्दा भी शामिल हो सकता है। रूस ने सुखोई-57 के निर्माण और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश की है।
बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन का गले लगाकर स्वागत किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना तिरुक्कुरल की किताब भी भेंट की। पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए गुरुवार देर रात दिल्ली पहुंचे थे।
सुखोई-57 पर भारत और रूस में चर्चा संभव:
भारत और रूस के बीच बैठक में सुखोई-57 लड़ाकू विमान को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। रूस की ओर से इस विमान के निर्माण के साथ जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश की गई है। सुखोई-57 को उन्नत स्टेल्थ लड़ाकू विमान बताया गया है, जिसकी विशेषता रडार की पकड़ से बचने की क्षमता है।
इस विमान को लेकर होने वाला संभावित रक्षा समझौता दोनों देशों के रक्षा सहयोग के लिहाज से अहम हो सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी क्षमता दूसरे देश के क्षेत्र में जाकर हवाई हमला करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तिरुक्कुरल की किताब पुतिन को भेंट:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल की किताब भेंट की। तिरुक्कुरल तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना है। इसमें करीब 1,330 दोहे शामिल हैं, जिनमें अच्छे जीवन, नैतिकता, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जुड़े विचार बताए गए हैं।
तिरुक्कुरल को तमिल साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाओं में शामिल किया जाता है और इसका कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। प्रधानमंत्री की ओर से पुतिन को यह पुस्तक भेंट किए जाने को भारत की प्राचीन तमिल संस्कृति और ज्ञान परंपरा को दुनिया के सामने रखने के संदेश के तौर पर देखा जा सकता है।
S-400 और ब्रह्मोस-NG पर भी बातचीत संभव:
मोदी और पुतिन की बैठक में सुखोई-57 के अलावा S-400 की बाकी खेप और उन्नत ब्रह्मोस-NG से जुड़े रक्षा सहयोग के मुद्दों पर भी चर्चा संभव है। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े विषय बैठक में अहम रह सकते हैं।
इसके साथ ही वर्ष 2030 तक भारत और रूस के बीच कारोबार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी बातचीत संभव है। उद्योग, रेलवे, स्टील और सुरंग निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं।
कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर:
भारत और रूस के बीच बातचीत में भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठ सकता है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कुशल कामगारों और उर्वरक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा संभव है।
इस तरह मोदी और पुतिन की बैठक में रक्षा सहयोग के साथ-साथ व्यापार और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने से जुड़े कई मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।
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