रिपोर्ट: सऊद अंसारी
लखनऊ (Lucknow) के सहारा शहर (Sahara Shahar) परिसर में सहारा इंडिया (Sahara India) के कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी है। बकाया वेतन (Outstanding Salary) और पीएफ (PF) भुगतान की मांग को लेकर कर्मचारी धरने पर डटे हुए हैं, जिसके कारण परिसर की बिजली-पानी (Electricity and water supply) की आपूर्ति भी लगातार तीन दिनों से बंद है। इस स्थिति ने न केवल कर्मचारियों को बल्कि परिसर में रह रहे मवेशियों (Cattle) को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। चारा (Fodder) खत्म हो जाने के कारण, कई मवेशी अब सहारा शहर (Sahara Shahar) की सड़कों और अन्य स्थानों पर बेसहारा (Helpless) होकर भटकने को मजबूर हैं, जो परिसर के भीतर गंभीर मानवीय और पशु कल्याण संकट को दर्शाता है।
प्रबंधन पर परिसर में आकर बात करने का दबाव:
कर्मचारियों ने सहारा इंडिया (Sahara India) के प्रबंधन (Management) पर बातचीत के लिए परिसर (Campus) में आने का दबाव बनाया है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन ने शुक्रवार (Friday) को उन्हें एसीपी कार्यालय (ACP Office) में बुलाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने वहां जाने से इनकार (Refused) कर दिया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का यह स्पष्ट रुख है कि प्रबंधन के लोगों को बातचीत के लिए प्रदर्शन स्थल (Protest Site) पर ही आना होगा। इस दबाव के चलते प्रबंधन आखिरकार सहारा शहर (Sahara Shahar) के लोगों से बातचीत (Negotiation) करने को तैयार (Ready) हो गया है। इस बैठक में कर्मचारियों के चार से पाँच (Four to five) लोगों का एक प्रतिनिधि मंडल (Representative Delegation) शामिल होगा, जो अपनी मांगों को प्रबंधन के सामने मजबूती से रखेगा।
30 साल की सेवा, 10 साल से भारी परेशानी:
एक कर्मचारी ने मीडिया (Media) को बताया कि वे पिछले 30 साल से अधिक समय से सहारा इंडिया (Sahara India) में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन पिछले 10 सालों से उनकी स्थिति अत्यंत खराब हो गई है। कर्मचारियों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि उन्हें नियमित रूप से वेतन (Regular Salary) नहीं मिल रहा है, जिससे उनके परिवारों (Families) को जीवन-यापन (Livelihood) में बहुत दिक्कत (Difficulty) हो रही है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि सहारा इंडिया (Sahara India) ने 2014 के बाद से उनका पीएफ (PF) यानी भविष्य निधि (Provident Fund) भी जमा नहीं किया है। एक अन्य कर्मचारी ने आरोप लगाया कि 1995 से नौकरी कर रहे हैं और 2014 तक स्थिति ठीक थी, लेकिन उसके बाद सब कुछ खराब हो गया। कर्मचारियों की सामूहिक मांग है कि उनका बकाया तुरंत (Immediately) चुकाया जाए और उनका हिसाब (Settlement) कर दिया जाए। संतोष कुमार (Santosh Kumar) नामक एक कर्मचारी ने मांग की कि उनका बकाया वेतन (Arrears of Salary) दिया जाए, साथ ही पीएफ (PF) और अन्य सभी मदों (Heads) का पैसा भी दिया जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) तक उनकी मांग पहुँचाने का आग्रह भी किया।
एक साल में तीन-चार बार वेतन, जीवन संकट में:
कर्मचारियों के सामने वित्तीय संकट (Financial Crisis) की भयावहता उनके बयानों से स्पष्ट होती है। एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उन्हें पूरे साल भर (Whole Year) में केवल तीन से चार बार (Three to four times) ही वेतन मिल रहा है। 30 साल से अधिक की सेवा देने के बाद अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे कहां जाएं और क्या करें। एक अन्य कर्मचारी, जो 1 अप्रैल 2011 से रेस्टोरेंट (Restaurant) में काम कर रहे थे, ने बताया कि 2012 से उनका वेतन भुगतान कभी नियमित (Regular) नहीं रहा और पीएफ (PF) तथा अन्य फंडों (Funds) का पैसा भी उन्हें नहीं मिल रहा है। इस अनियमित भुगतान (Irregular Payment) के चलते कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई (Children’s Education) छूट गई है, कई कर्मचारियों की बेटियों की शादी (Daughter’s Marriage) नहीं हो पा रही है, और बीमार माँ (Sick Mother) का इलाज भी पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है।
शांतिपूर्ण हिसाब की मांग, कोई शिकायत नहीं:
कर्मचारियों की ओर से यह बार-बार दोहराया जा रहा है कि उनकी केवल एक ही बुनियादी मांग (Basic Demand) है: उनका पूरा पेमेंट (Full Payment) दे दिया जाए। वे किसी तरह के ब्याज (Interest) की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल संस्था की ओर से उनका शांतिपूर्वक (Peacefully) हिसाब (Settlement) कर दिया जाए। एक कर्मचारी ने कहा कि उन्हें मैनेजमेंट (Management) से कोई शिकायत (No Complaint) नहीं है; वे बस अपना पैसा लेकर घर (Home) जाना चाहते हैं, ताकि वे अपना और अपने परिवार का जीवन यापन (Sustain their lives) कर सकें। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सहारा इंडिया (Sahara India) समूह के कर्मचारियों के आर्थिक भविष्य (Economic Future) पर अनिश्चितता का एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।