श्रीकृष्ण जन्मभूमि में हर महीने 1 करोड़ चढ़ावा:हर दिन एक दानपात्र खुलता है; डिंपल बोलीं- अयोध्या की तरह जांच हो

अयोध्या (Ayodhya) में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद मथुरा (Mathura) स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Shri Krishna Janmabhoomi) के चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था चर्चा में है। इसी बीच मंदिर प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों ने दावा किया है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि में आने वाला चढ़ावा पूरी तरह सुरक्षित है और दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार यहां हर महीने औसतन एक करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है, जिसकी गिनती से लेकर बैंक में जमा होने तक प्रत्येक चरण की निगरानी की जाती है।

हर महीने करीब एक करोड़ रुपये का चढ़ावा:

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान (Shri Krishna Janmasthan Seva Sansthan) के जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह (Vijay Bahadur Singh) के अनुसार मंदिर में हर महीने औसतन एक करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है। इस राशि का उपयोग मंदिर के रखरखाव, सजावट, कर्मचारियों के वेतन और अन्य व्यवस्थाओं में किया जाता है। मंदिर में दान तीन माध्यमों से प्राप्त होता है। श्रद्धालु परिसर में रखे दानपात्रों में नकद राशि और आभूषण अर्पित करते हैं, कार्यालय में रसीद के माध्यम से दान जमा करते हैं तथा पिछले लगभग दो वर्षों से ऑनलाइन माध्यम से भी दान स्वीकार किया जा रहा है।

दानपात्र से बैंक तक निगरानी की व्यवस्था:

मंदिर प्रशासन का कहना है कि दान की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। परिसर में रखे गए दानपात्रों की चाबियां मंदिर कार्यालय में सुरक्षित रखी जाती हैं। प्रतिदिन एक दानपात्र खोला जाता है और पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाती है। दानपात्र से निकली धनराशि को विशेष कक्ष में ले जाकर सुरक्षित रखा जाता है। नोटों की गड्डियां तैयार कर उन्हें सीलबंद बक्सों में रखा जाता है और बाद में मंदिर परिसर में स्थित ट्रेजरी में जमा कर दिया जाता है।

सात कैमरों की निगरानी में रहती है ट्रेजरी:

मंदिर प्रशासन के अनुसार ट्रेजरी की निगरानी सात सीसीटीवी कैमरों से की जाती है। अगले दिन स्टेट बैंक (State Bank) की मुख्य शाखा के कर्मचारी मंदिर पहुंचते हैं और पदाधिकारियों की मौजूदगी में सीलबंद बक्सों को खोलकर मशीनों के माध्यम से राशि की गिनती करते हैं। इसके बाद रजिस्टर में प्रविष्टि कर धनराशि को बैंक खाते में जमा कराया जाता है। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड और निगरानी के साथ संपन्न होती है।

गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष नियम:

मंदिर प्रबंधन के मुताबिक चढ़ावे की गिनती में शामिल कर्मचारियों के लिए विशेष नियम निर्धारित किए गए हैं। उन्हें बिना जेब वाले वस्त्र उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे। यदि कोई कर्मचारी गिनती के दौरान कक्ष से बाहर जाता है तो उसकी जांच की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दान प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया है।

सोना-चांदी और अन्य धातुओं का होता है मूल्यांकन:

दानपात्रों से प्राप्त सोना, चांदी और अन्य धातुओं को अलग से दर्ज कर सुरक्षित रखा जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार इनकी जानकारी अलग रजिस्टर में दर्ज की जाती है और समय-समय पर उनका मूल्यांकन कराया जाता है। इसके अतिरिक्त दान प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वर्ष में चार बार ऑडिट भी कराया जाता है।

दो संस्थाएं संभालती हैं मंदिर की व्यवस्था:

श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट (Shri Krishna Janmabhoomi Trust) मंदिर परिसर की भूमि और उससे जुड़े मामलों का संचालन करता है। वहीं श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान मंदिर के दैनिक प्रबंधन, देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी निभाता है। दोनों संस्थाएं अपनी-अपनी भूमिका के अनुसार मंदिर व्यवस्था का संचालन करती हैं।

चढ़ावे को लेकर लगाए गए आरोप और प्रतिक्रिया:

श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास (Shri Krishna Janmabhoomi Sangharsh Nyas) के अध्यक्ष दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी बाबा (Dinesh Sharma ‘Falahari’) ने मंदिर के चढ़ावे की प्रक्रिया को लेकर कुछ आरोप लगाए हैं तथा मामले की जांच की मांग की है। वहीं मंदिर प्रबंधन से जुड़े संस्थान ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कानूनी कार्रवाई की है। आरोपों और दावों की सत्यता का निर्धारण संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

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