लखनऊ (Lucknow) के अलीगंज क्षेत्र में दो मंजिला इमारत में लगी भीषण आग की घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, वह अवैध निर्माण की श्रेणी में थी। बताया गया कि वर्ष 2016 में इस भवन को गिराने का आदेश जारी किया गया था, हालांकि बाद में वह आदेश निरस्त कर दिया गया था। अब इस मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई है।
7 जुलाई को गिराई जाएगी इमारत:
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने बुधवार को संबंधित भवन पर नोटिस चस्पा कर दिया। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार (Prathamesh Kumar) ने बताया कि 7 जुलाई को भवन को ध्वस्त किया जाएगा। यह भवन रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (Rameshwaram Institute of Technology and Management) के संचालक वीरेंद्र शुक्ला (Virendra Shukla) का बताया गया है। प्रशासन का कहना है कि नियमानुसार आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।
चार आरोपी गिरफ्तार, कई अधिकारियों पर कार्रवाई:
इस मामले में पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करते हुए वीरेंद्र शुक्ला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। एलडीए के छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि 18 अधिकारियों के खिलाफ शासन को नोटिस भेजा गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदारियों और प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है।
एसआईटी और फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य:
हादसे की जांच के लिए गठित एसआईटी (SIT) और फोरेंसिक टीम मंगलवार को घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने भवन का विस्तृत निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए। एसआईटी में आईपीएस (IPS) प्रवीण कुमार (Praveen Kumar) और आईएएस (IAS) अमृत अभिजात (Amrit Abhijat) शामिल हैं। जांच दल घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण सामग्री अपने साथ ले गया, जिनका परीक्षण किया जाएगा।
भवन में संचालित हो रही थीं कई गतिविधियां:
जानकारी के अनुसार, जिस इमारत में आग लगी थी, उसमें विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। भवन के बेसमेंट, भूतल और प्रथम तल पर पेट शॉप और क्लीनिक संचालित थे। वहीं दूसरे तल पर लर्निंग स्पेस (Learning Space) नामक लाइब्रेरी और कोचिंग सुविधा के साथ हेड हॉपर स्टूडियो (Head Hopper Studio) संचालित हो रहा था, जहां त्रिआयामी कला निर्माण और गेमिंग से संबंधित कार्य किए जाते थे।
पीड़ित परिवारों ने बढ़ी सहायता की मांग की:
हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव (Aditya Srivastava) के परिजन बुधवार को घटनास्थल पहुंचे। इस दौरान उनके भाई शिशिर श्रीवास्तव (Shishir Srivastava) ने बताया कि उनके ममेरे भाई भुवन श्रीवास्तव (Bhuvan Srivastava) रस्सी के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाने में सफल रहे, लेकिन घटना के बाद वह गहरे सदमे में हैं। परिजनों ने प्रभावित परिवारों को अधिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
कोचिंग संस्थानों पर भी शुरू हुई कार्रवाई:
अग्निकांड के बाद प्रशासन ने शहर में संचालित विभिन्न कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच शुरू कर दी है। इसी क्रम में हजरतगंज (Hazratganj) स्थित एलन (Allen) और मोशन ग्राफिक (Motion Graphic) कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। बताया गया कि इन संस्थानों के नक्शे निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे और अग्नि सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं भी पर्याप्त नहीं थीं।
पूरे शहर में चलेगा विशेष जांच अभियान:
एलडीए ने संकेत दिए हैं कि अब शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, होटल, नर्सिंग होम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की व्यापक जांच की जाएगी। अलीगंज (Aliganj) की घटना के बाद कई संस्थानों ने स्वयं अपने बोर्ड हटाने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन का उद्देश्य सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अधिकारियों के साथ बैठक कर इस घटना की समीक्षा की। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सीख बताते हुए कहा कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने पूरे प्रदेश में मिशन मोड में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने, अस्पतालों, नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, मॉल और सरकारी भवनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
फायर सेफ्टी को लेकर कई फैसले:
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए। व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए। आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक सुनिश्चित की जाए और बेसमेंट का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्य के लिए ही हो। साथ ही आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया समय को और बेहतर बनाने तथा अग्निशमन विभाग को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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