लखनऊ: उद्घाटन से पहले सूखी ग्रीन कॉरिडोर की हरियाली: सजावट पर खर्च हुए लाखों रुपये

लखनऊ में गोमतीनगर से निशातगंज होते हुए हनुमान सेतु तक तैयार किया जा रहा ग्रीन कॉरिडोर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से बनाई जा रही एक अहम परियोजना माना जा रहा है। हालांकि इसके उद्घाटन से पहले ही कॉरिडोर की साज-सज्जा और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सड़क के बीच बने डिवाइडर को हरा-भरा और आकर्षक बनाने के लिए बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए थे, जिन पर लाखों रुपये खर्च किए गए। लेकिन अब स्थिति यह है कि इन पौधों में से अधिकांश सूख चुके हैं, जिससे परियोजना की देखरेख पर चर्चा शुरू हो गई है।

ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य:
गोमतीनगर (Gomti Nagar) से निशातगंज (Nishatganj) होते हुए हनुमान सेतु (Hanuman Setu) तक बनने वाला यह ग्रीन कॉरिडोर शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना शहर के व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
करीब 4 से 5 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को आधुनिक सड़क संरचना और हरियाली के साथ विकसित किया गया है। दावा किया जा रहा है कि इसके शुरू होने के बाद गोमतीनगर से हनुमान सेतु तक का सफर महज लगभग पांच मिनट में तय किया जा सकेगा, जिससे लोगों का समय बचेगा और यातायात भी व्यवस्थित होगा।

सड़क डिवाइडर पर लगाए गए थे पौधे:
कॉरिडोर को आकर्षक बनाने के लिए सड़क के बीच बने डिवाइडर में बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए थे। इन पौधों को लगाने का उद्देश्य मार्ग को हरित रूप देना और पर्यावरण को बेहतर बनाना था। इसके लिए लाखों रुपये खर्च किए गए थे।
लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधे लगाए जाने के बाद उनकी नियमित देखभाल नहीं की गई। कई स्थानों पर पौधे पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे डिवाइडर की हरियाली लगभग समाप्त हो गई है।

देखभाल और सिंचाई व्यवस्था पर सवाल:
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पौधों को लगाने के बाद उनकी सिंचाई और रखरखाव की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप अधिकांश पौधे समय से पहले ही सूख गए।
लोगों का मानना है कि यदि पौधों की नियमित देखभाल की जाती, तो कॉरिडोर की सुंदरता और हरियाली बरकरार रह सकती थी। अब सूखे पौधों के कारण परियोजना की साज-सज्जा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लाखों लोगों को मिलने का दावा फायदा:
इस ग्रीन कॉरिडोर से शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों के लोगों को लाभ मिलने का दावा किया जा रहा है। गोमतीनगर (Gomti Nagar), विभूतिखंड (Vibhuti Khand), विराटखंड (Virat Khand), विनयखंड (Vinay Khand), निशातगंज (Nishatganj), डालीगंज (Daliganj), हजरतगंज (Hazratganj) और हनुमान सेतु (Hanuman Setu) क्षेत्र के निवासियों को इससे सीधे तौर पर राहत मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि इस मार्ग के शुरू होने के बाद प्रतिदिन एक लाख से अधिक लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होने के साथ-साथ समय की भी बचत होगी।

जल्द हो सकता है लोकार्पण:
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। बची हुई औपचारिकताओं और अंतिम तैयारियों को पूरा किया जा रहा है।
निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त होने के बाद जल्द ही इसका लोकार्पण किए जाने की तैयारी चल रही है। हालांकि इसके पहले ही सूख चुके पौधों को लेकर उठे सवालों ने परियोजना की साज-सज्जा और रखरखाव को चर्चा का विषय बना दिया है।


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