Video:गाजीपुर: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के इस्तीफे पर ममता बनर्जी की टिप्पणी पर ये क्या बोल गए संजय निषाद?

रिपोर्टर: हसीन अंसारी

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद (Sanjay Nishad) शनिवार को गाजीपुर (Ghazipur) पहुंचे, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के इस्तीफे, बिहार की राजनीति, अंतरराष्ट्रीय हालात और ऊर्जा संकट जैसे कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी आवश्यकताएं और समस्याएं होती हैं, इसलिए किसी के इस्तीफे जैसे व्यक्तिगत फैसलों पर अनावश्यक टिप्पणी करना उचित नहीं है।

पश्चिम बंगाल के मुद्दे पर प्रतिक्रिया:
मीडिया द्वारा पश्चिम बंगाल (West Bengal) के राज्यपाल के इस्तीफे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल पूछे जाने पर संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने कहा कि किसी के इस्तीफे पर टिप्पणी करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने हालात और जरूरतों के अनुसार निर्णय लेता है। ऐसे मामलों में तर्क-वितर्क करने से कोई विशेष लाभ नहीं होता। मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में संयम और संतुलित बयान देना जरूरी होता है।

बिहार की राजनीति पर कही यह बात:
बिहार (Bihar) में लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के बाद अब नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के युग की समाप्ति के सवाल पर संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने कहा कि वर्तमान समय में किसी एक नेता का नहीं बल्कि जनता का युग है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है और वही तय करती है कि किसे नेतृत्व का अवसर दिया जाए।
इस संदर्भ में उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन (T. N. Seshan) का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब आम लोग चुनाव आयोग की भूमिका को ज्यादा नहीं जानते थे, लेकिन टी.एन. शेषन के कार्यकाल के बाद लोगों को चुनाव आयोग की शक्ति और महत्व का एहसास हुआ।

राजनीति और वोट की ताकत पर जोर:
संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में लोगों में राजनीति और लोकतंत्र को लेकर जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब आम जनता वोट की ताकत को समझने लगी है।
उनके अनुसार आज की राजनीति में जनता की भूमिका सबसे अहम है। इसलिए यह कहना अधिक उचित है कि यह समय किसी एक नेता का नहीं बल्कि जनता के निर्णयों का समय है। जनता जिस दिशा में फैसला करेगी, वही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रभावी होगा।

ईरान-इजरायल युद्ध पर चिंता व्यक्त:
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने ईरान (Iran) और इजरायल (Israel) के बीच चल रहे संघर्ष पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जहां भी धर्म के नाम पर कट्टरता बढ़ती है, वहां विनाश की स्थिति बन जाती है।
मंत्री ने कहा कि विश्व के सभी देशों और समाजों को ऐसे हालात से बचने के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध और टकराव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी पड़ता है।

तेल संकट और ऊर्जा विकल्प पर विचार:
ईरान-इजरायल तनाव के बाद तेल संकट और अमेरिका (United States) द्वारा भारत (India) को रूस (Russia) से तेल खरीदने की छूट दिए जाने से जुड़े सवाल पर संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने कहा कि भारत के संबंध दुनिया के कई देशों के साथ हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले समय में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि भविष्य में तेल पर निर्भरता कम करते हुए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना जरूरी होगा।


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