गाजीपुर के स्कूल का हैरान करने वाला नजारा…
रिपोर्टर : हसीन अंसारी
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार की ओर से प्राथमिक विद्यालयों के साथ-साथ प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब प्रदेश महिला आयोग (Uttar Pradesh State Commission for Women) की उपाध्यक्ष चारू शर्मा गाजीपुर (Ghazipur) के दौरे पर पहुंचीं। उन्होंने कोतवाली क्षेत्र के फॉक्सगंज प्राथमिक विद्यालय (Primary School Foksaganj) का निरीक्षण किया, जहां शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई।
निरीक्षण के दौरान उजागर हुई खामियां:
चारू शर्मा जब विद्यालय परिसर में पहुंचीं तो उन्होंने पाया कि विद्यालय के केवल एक ही कमरे में कक्षा 1 से लेकर 5 तक के छात्रों की पढ़ाई कराई जा रही थी। हैरानी की बात यह रही कि सभी कक्षाओं के छात्रों की कुल संख्या सिर्फ 12 थी, जबकि विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर में 50 से 60 छात्रों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। इस स्थिति को देखकर महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने नाराजगी जताई और मौके पर ही फोन के माध्यम से बेसिक शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट तैयार कर तत्काल भेजने के निर्देश दिए।
एक ही टीचर संभाल रहा पांच कक्षाएं:
निरीक्षण के दौरान जब चारू शर्मा ने शिक्षकों की संख्या के बारे में जानकारी ली, तो उपस्थित एकमात्र शिक्षक ने बताया कि विद्यालय में कुल चार शिक्षक हैं। इनमें से दो शिक्षक अवकाश पर हैं और एक शिक्षक की ड्यूटी डीएलएड (D.El.Ed) परीक्षा में लगी हुई है, जिसके कारण केवल एक शिक्षक ही पांचों कक्षाओं की जिम्मेदारी संभाल रहा है। यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को दिखाती है, बल्कि छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
मर्जर नीति के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति:
बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) ने हाल ही में कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का मर्जर किया था, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। हालांकि, गाजीपुर के इस विद्यालय में मर्जर के बाद भी हालात जस के तस हैं। एक ही कमरे में सभी कक्षाओं की पढ़ाई और बेहद कम उपस्थिति यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अब भी जमीनी स्तर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है।
महिला आयोग की सख्त टिप्पणी:
इस पूरे मामले पर उपाध्यक्ष चारू शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बच्चों की शिक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मामले की विस्तृत जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करें और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया:
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना था कि विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति अक्सर कम रहती है, और बच्चों को पर्याप्त ध्यान नहीं मिल पाता। कई अभिभावकों ने यह भी कहा कि विद्यालय की स्थिति देखकर बच्चे पढ़ाई से दूरी बना रहे हैं।
निष्कर्ष:
यह मामला सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जहां एक ओर राज्य सरकार शिक्षा सुधार के लिए नीतियां बना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उनका पालन न होना चिंता का विषय है।
#tag: #Ghazipur #Education #PrimarySchool #CharuSharma #UPGovernment
डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।